Monday, July 6, 2026
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गौतम अडानी को बड़ी राहत: अमेरिकी न्याय विभाग ने आपराधिक मामला वापस लेने का किया समर्थन, हरीश साल्वे बोले—’सिर्फ बदनाम करने की कोशिश थी’

नई दिल्ली। भारत के उद्योगपति गौतम अडानी से जुड़े अमेरिका में चल रहे आपराधिक मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी न्याय विभाग (Department of Justice-DoJ) ने अदालत में दाखिल अपने जवाब में इस मामले को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए संकेत दिया है कि अभियोजन जारी रखने का पर्याप्त आधार नहीं है। इसके बाद भारत, ब्रिटेन और अमेरिका के कई कानूनी विशेषज्ञों ने भी माना है कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मुकदमा चलाना उचित नहीं होगा।

अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से अदालत में दाखिल विस्तृत रिपोर्ट में कहा गया कि इस मामले में किसी संगठित अपराधी गिरोह की भूमिका नहीं थी। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी कंपनियों को कोई प्रत्यक्ष नुकसान नहीं हुआ, भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा और जिन पहलुओं की जांच आवश्यक थी, उनकी भारत में पहले ही जांच हो चुकी है। विभाग ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर इस मुकदमे की शुरुआत किन आधारों पर की गई थी।

हरीश साल्वे: ‘यह सिर्फ नाम खराब करने की कोशिश थी’

सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे ने कहा कि अमेरिकी न्याय विभाग की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि इस मामले में वे तत्व मौजूद नहीं थे, जिनके आधार पर सामान्यतः अमेरिका में आपराधिक मुकदमा चलाया जाता है। उनके अनुसार न तो राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित हुई, न अमेरिकी कंपनियों को नुकसान पहुंचा और न ही संगठित अपराध का कोई पहलू सामने आया।

साल्वे ने आरोप लगाया कि बचाव पक्ष की दलीलें सुने बिना ही 2024 के अंत में मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन बाइडेन प्रशासन के दौरान भारत के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाया जा रहा था और कुछ अमेरिकी सांसद लगातार भारत पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे थे। उनके मुताबिक यह पूरा मामला “नाम खराब करने और शर्मिंदा करने” की कोशिश था, जिसमें अभियोजन की सफलता की वास्तविक संभावना नहीं थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिकी अदालत जल्द ही इस मामले को बंद कर देगी।

विजय अग्रवाल: ‘ठोस सबूत नहीं थे’

वरिष्ठ अधिवक्ता विजय अग्रवाल ने कहा कि अमेरिकी न्याय विभाग की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि अभियोजन पक्ष के पास पर्याप्त और मजबूत साक्ष्य नहीं थे। उनके अनुसार शुरुआत से ही मामला कमजोर था और किसी वास्तविक नुकसान को भी साबित नहीं किया जा सका।

उन्होंने कहा कि अदालतें स्वयं मुकदमा शुरू नहीं करतीं, बल्कि उनके समक्ष प्रस्तुत मामलों पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देती हैं। यदि अभियोजन पक्ष के पास पर्याप्त आधार नहीं है, तो मुकदमा आगे बढ़ाना कठिन हो जाता है।

क्या है आगे की प्रक्रिया?

अब अंतिम निर्णय अमेरिकी अदालत को लेना है। यदि न्याय विभाग औपचारिक रूप से अभियोजन वापस लेने का अनुरोध करता है और अदालत उसे स्वीकार कर लेती है, तो गौतम अडानी के खिलाफ चल रहा यह आपराधिक मामला समाप्त हो सकता है। फिलहाल अदालत के अंतिम आदेश का इंतजार किया जा रहा है।

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