कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दे रही है। राज्य में वर्षों से चर्चा में रहे शिक्षा भर्ती घोटाले, नगरपालिका भ्रष्टाचार और सहकारी विभाग में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को जांच और अभियोजन की अनुमति दे दी है। इस फैसले को बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के प्रति “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाए हुए है और सार्वजनिक संस्थानों का दुरुपयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने लगभग चार वर्षों तक वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति रोक कर रखी थी, जिसके कारण कई महत्वपूर्ण जांच लंबित पड़ी थीं।
शिक्षा और भर्ती घोटालों की जांच में आएगी तेजी
राज्य सरकार के इस फैसले के बाद अब शिक्षा विभाग, नगरपालिका संस्थाओं और सहकारी विभागों में कथित भर्ती घोटालों और वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, कई हाई-प्रोफाइल अधिकारियों और पूर्व प्रशासनिक पदाधिकारियों पर शिकंजा कस सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में भर्ती प्रक्रियाओं में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि तत्कालीन सरकार इन मामलों में कार्रवाई से बचने के लिए अदालतों का सहारा लेती रही, लेकिन अब उनकी सरकार हर मामले की निष्पक्ष जांच कराएगी।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था CBI जांच का विवाद
गौरतलब है कि इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार के बीच CBI जांच को लेकर बड़ा विवाद सामने आया था। पूर्व सरकार ने राज्य में CBI की कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की थी और बिना अनुमति जांच पर सवाल उठाए थे। लेकिन अब नई सरकार ने खुद जांच एजेंसी को अनुमति देकर साफ संकेत दे दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
अवैध फैक्ट्रियों पर भी सख्त रुख
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध फैक्ट्रियों और अवैध निर्माणों पर भी कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में एक अवैध इमारत में आग लगने से दो लोगों की मौत के बाद सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है।
मुख्यमंत्री ने उस अवैध इमारत को गिराने के निर्देश दिए हैं, जहां हादसा हुआ था। पुलिस ने फैक्ट्री के दोनों मालिकों को गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा टॉप्सिया और मोमिनपुर जैसे इलाकों में संचालित अवैध फैक्ट्रियों की बिजली और पानी की लाइनें काटने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
“कानून से ऊपर कोई नहीं” — सरकार का संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शुभेंदु सरकार शुरुआती दिनों में ही सख्त प्रशासनिक छवि स्थापित करना चाहती है। भर्ती घोटालों की जांच, भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई और अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
सरकार के भीतर से संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में कई और बड़े फैसले और छापेमारी अभियान देखने को मिल सकते हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि चाहे मामला कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं होगा।














