नोएडा: एक तरफ चमचमाते एक्सप्रेसवे, ऊंची-ऊंची इमारतें, मल्टीनेशनल कंपनियों के ग्लास टावर और करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाएं… दूसरी तरफ टूटती छतें, दरकती दीवारें, सीलन भरे कमरे और हर पल मौत के डर में जीते हजारों परिवार।
यह विरोधाभास किसी दूरदराज के पिछड़े इलाके का नहीं, बल्कि देश के सबसे आधुनिक शहरों में गिने जाने वाले नोएडा का है। सेक्टर-122 स्थित जनता फ्लैट्स की हालत आज नोएडा के तथाकथित “WORLD CLASS CITY” मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

हाल ही में NOIDA CITIZEN FORUM (NCF) की कार्यकारी अध्यक्ष शालिनी सिंह अपने पदाधिकारियों के साथ सेक्टर-122 के जनता फ्लैट्स पहुंचीं और वहां की जमीनी स्थिति का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जो हालात सामने आए, उन्होंने न केवल स्थानीय निवासियों की पीड़ा उजागर की, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता की तस्वीर भी सामने रख दी।
टूटती दीवारें, झड़ती छतें और हर पल हादसे का डर
जनता फ्लैट्स की इमारतें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि कई जगहों पर दीवारों में गहरी दरारें साफ दिखाई देती हैं। छतों से प्लास्टर झड़ रहा है, लोहे की सरिए बाहर निकल चुके हैं और बरसात के दिनों में पानी रिसकर कमरों तक पहुंच जाता है।
गलियारों में गंदगी, टूटे पाइप और बदबू का आलम है। कई फ्लैट्स में रहने वाले लोगों ने बताया कि हर बारिश उनके लिए डर लेकर आती है। उन्हें हमेशा यह भय बना रहता है कि कहीं छत गिरने या दीवार ढहने से कोई बड़ा हादसा न हो जाए।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहां रहने वाले लोग घरों में नहीं, बल्कि “खतरे के बीच” जीवन बिताने को मजबूर हैं।
“बच्चे दीवारों के नीचे खेलते हैं, जिनके गिरने का डर हर वक्त बना रहता है”
निरीक्षण के दौरान महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने अपनी समस्याएं NCF टीम के सामने रखीं।
स्थानीय महिलाओं ने बताया कि खाना बनाते समय भी उन्हें ऊपर की छत की चिंता सताती रहती है। वहीं बुजुर्गों ने कहा कि रात को सोते समय हमेशा डर बना रहता है कि कहीं कोई हिस्सा गिर न जाए।
बच्चे उन्हीं गलियारों और दीवारों के बीच खेलते हैं जिनकी हालत बेहद खतरनाक हो चुकी है। कई परिवारों ने बताया कि वे वर्षों से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।

“अधिकारियों के निरीक्षण सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए”
स्थानीय लोगों के अनुसार, कई बार प्राधिकरण और संबंधित विभागों के अधिकारी यहां निरीक्षण करने पहुंचे, लेकिन हर बार केवल आश्वासन देकर चले गए।
निवासियों का आरोप है कि फाइलें बनती हैं, सर्वे होते हैं, तस्वीरें खींची जाती हैं, लेकिन हालात जस के तस बने रहते हैं।
लोगों का कहना है कि शहर में सौंदर्यीकरण और नई परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जिन लोगों को सुरक्षित आवास देने का वादा किया गया था, उनके घर खुद खंडहर में बदलते जा रहे हैं।

NCF ने उठाए गंभीर सवाल
NOIDA CITIZEN FORUM की कार्यकारी अध्यक्ष शालिनी सिंह ने कहा कि जनता फ्लैट्स की स्थिति बेहद चिंताजनक है और इसे केवल “रखरखाव की समस्या” कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते मरम्मत और पुनर्विकास की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को असुरक्षित हालात में जीवन बिताने के लिए छोड़ देना ही शहरी विकास मॉडल है?
“वर्ल्ड क्लास सिटी” बनाम जमीनी हकीकत
सेक्टर-122 के जनता फ्लैट्स आज केवल एक आवासीय समस्या नहीं रह गए हैं, बल्कि यह नोएडा के विकास मॉडल और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर बड़ा सवाल बन चुके हैं।
एक तरफ आलीशान सोसाइटियों में क्लब हाउस, स्विमिंग पूल और आधुनिक सुविधाओं की चर्चा होती है, जबकि दूसरी तरफ जनता फ्लैट्स के निवासी मूलभूत सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शहर की वास्तविक पहचान उसकी ऊंची इमारतों से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि वहां आम और कमजोर वर्ग कितना सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहा है।
लोगों की मांग — सुरक्षित आवास और स्थायी समाधान
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण से मांग की है कि जनता फ्लैट्स की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए और जर्जर इमारतों की मरम्मत या पुनर्विकास की दिशा में ठोस योजना लागू की जाए।
लोगों का कहना है कि उन्हें सिर्फ “छत” नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन चाहिए।
क्योंकि घर वह जगह होनी चाहिए जहां इंसान सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस करे…
न कि वह जगह जहां हर रात यह डर बना रहे —














