नोएडा। प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा देशभर में “वर्क फ्रॉम होम” (WFH) और वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा देने की अपील का असर अब ज़मीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में गौतम बुद्ध नगर विकास समिति ने प्रधानमंत्री की इस पहल का समर्थन करते हुए जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर को ईमेल के माध्यम से एक विस्तृत अनुरोध पत्र सौंपा है।
समिति ने मांग की है कि जिले की निजी कंपनियों, आईटी संस्थानों और कॉर्पोरेट कार्यालयों को अधिक से अधिक कर्मचारियों के लिए “वर्क फ्रॉम होम” नीति लागू करने हेतु प्रोत्साहित किया जाए, ताकि ट्रैफिक, प्रदूषण और ईंधन खपत जैसी गंभीर समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने संबोधन में कहा था कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, बढ़ती ईंधन कीमतों और राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा को देखते हुए देश को डिजिटल कार्य संस्कृति की ओर तेजी से बढ़ना चाहिए। उन्होंने कंपनियों और संस्थानों से अपील की थी कि जहां संभव हो, वहां वर्क फ्रॉम होम, वर्चुअल मीटिंग्स, कार पूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता दी जाए।
प्रधानमंत्री की इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए गौतम बुद्ध नगर विकास समिति की अध्यक्ष रश्मि पाण्डेय ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि जिले की कंपनियों को स्वैच्छिक रूप से हाइब्रिड या वर्क फ्रॉम होम मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि बड़ी संख्या में कर्मचारी घर से काम करेंगे तो नोएडा और ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम हो सकता है।
समिति के सचिव अनूप सोनी ने कहा कि वर्तमान समय में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण जिले की सबसे बड़ी समस्याओं में शामिल हैं। ऐसे में वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था अपनाने से सड़कों पर वाहनों की संख्या घटेगी, जिससे जाम की समस्या में राहत मिलेगी और वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी। साथ ही ईंधन की खपत कम होने से देश की विदेशी मुद्रा बचाने में भी मदद मिलेगी।
वहीं समिति के उपाध्यक्ष हिमांशु राजपूत ने कहा कि वर्क फ्रॉम होम केवल पर्यावरणीय समाधान नहीं बल्कि आर्थिक राहत का भी बड़ा माध्यम बन सकता है। उनके अनुसार, यदि कर्मचारी रोजाना ऑफिस आने-जाने से बचते हैं तो एक परिवार प्रतिमाह लगभग ₹5000 तक की बचत कर सकता है। इसके अलावा लोगों का समय बचेगा, मानसिक तनाव कम होगा और कार्यक्षमता में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।
गौतम बुद्ध नगर विकास समिति ने अपने पत्र में जिलाधिकारी से आग्रह किया है कि जनहित, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए जिले की कंपनियों एवं संस्थानों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और परामर्श जारी किए जाएं, ताकि “वर्क फ्रॉम होम” जैसी डिजिटल कार्य संस्कृति को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सके।
समिति का मानना है कि यदि प्रशासन और कॉर्पोरेट सेक्टर मिलकर इस पहल को आगे बढ़ाते हैं तो नोएडा देश के उन शहरों में शामिल हो सकता है जहां तकनीक और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ेंगे।














