दुबई की चमचमाती इमारतों, तुर्की के आलीशान ठिकानों, कनाडा के सुरक्षित समझे जाने वाले नेटवर्क और यूरोप के अंडरग्राउंड रूट्स में बैठे भारतीय भगोड़े डॉन, ड्रग माफिया और गैंगस्टर अब पहली बार सचमुच डरने लगे हैं। वजह—भारत ने फाइलों वाला नहीं, फील्ड वाला शिकार शुरू कर दिया है। नाम है Operation Global Hunt। यह सिर्फ एक सरकारी कार्रवाई नहीं, बल्कि एक सीक्रेट अंतरराष्ट्रीय शिकारी मिशन की तरह चलाया जा रहा है जिसमें NCB, CBI, ED, NIA, इंटेलिजेंस यूनिट्स और INTERPOL की संयुक्त टीमें विदेशों में छिपे करीब 100 हाई-वैल्यू भारतीय अपराधियों की लोकेशन, फंडिंग, पासपोर्ट, हवाला चैन और ड्रग रूट को एक-एक कर लॉक कर रही हैं। संदेश साफ है—अब विदेश भाग जाना बच निकलना नहीं है। अब भागे हुए डॉन की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।
दुबई , तुर्की, कनाडा अब सुरक्षित नहीं
सूत्रों के मुताबिक इस मिशन में सिर्फ रेड कॉर्नर नोटिस का पुराना रास्ता नहीं अपनाया जा रहा। भारतीय एजेंसियां सिल्वर नोटिस, सीक्रेट फाइनेंशियल ट्रैकिंग, डिजिटल लोकेशन मैपिंग, ट्रैवल डॉक्यूमेंट स्कैन, फ्रंट कंपनियों की निगरानी और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग कर रही हैं। यानी दुबई में बैठा माफिया सिर्फ अपने बॉडीगार्ड नहीं गिन रहा—वह अब हर कॉल, हर बैंक ट्रांसफर और हर यात्रा को शक की नजर से देख रहा है। तुर्की में ठिकाना बदलने वाले गैंगस्टर अब समझ चुके हैं कि भारतीय एजेंसियां अब इंतजार नहीं, पीछा कर रही हैं।
सलीम डोला तो सिर्फ ट्रेलर था
इस इंटरनेशनल शिकारी मिशन का पहला बड़ा संदेश था दाऊद इब्राहिम का करीबी मोहम्मद सलीम डोला। तुर्की के इस्तांबुल में महीनों तक ट्रैकिंग, गुप्त समन्वय और डिपोर्टेशन चैनल के बाद उसे चुपचाप भारत लाया गया। कोई लंबा राजनीतिक शोर नहीं, कोई पहले से सार्वजनिक चेतावनी नहीं—सीधा पकड़ो और ले आओ मॉडल। एजेंसियों के भीतर इसे “proof of reach” कहा जा रहा है, यानी दुनिया के किसी भी कोने में बैठे अपराधी तक भारतीय हाथ पहुंच सकता है। सलीम डोला की वापसी के बाद भगोड़ा नेटवर्क में सबसे ज्यादा हलचल दुबई सर्किट में बताई जा रही है क्योंकि वहां बैठे कई नार्को-फंडर अब अपने संपर्क बदल रहे हैं।
100 मोस्ट वॉन्टेड की लिस्ट तैयार, अंडरवर्ल्ड की धड़कनें तेज
रडार पर सिर्फ एक-दो नाम नहीं—करीब 100 हाई-वैल्यू टारगेट हैं।
इनमें शामिल हैं:
ड्रग कार्टेल ऑपरेटर
डी-कंपनी लिंक वाले फाइनेंसर
हवाला चैनल मैनेजर
साइबर फ्रॉड मास्टरमाइंड
विदेश से गैंगवार ऑपरेट करने वाले शूटर्स के हैंडलर
आर्थिक भगोड़े
आसिफ मेमन नेटवर्क, हरमीत सिंह, परमजीत ढालीवाल, जसविंदर उर्फ जैज, सनी कालरा, हाजी सलीम जैसे नाम लगातार निगरानी में बताए जा रहे हैं। कुछ पहले से विदेशी हिरासत में हैं, कुछ पर स्थानीय एजेंसियों से समन्वय चल रहा है। हर टारगेट के लिए सिर्फ लोकेशन नहीं, उसका पैसा कहां से घूमता है, किस पासपोर्ट से यात्रा करता है, कौन रिश्तेदार फ्रंट बिजनेस चलाता है—सबकी फाइल तैयार की जा रही है।
स्पेशल प्लेन मिशन: पकड़ो और भारत लाओ
सबसे सनसनीखेज बात यह है कि भारतीय एजेंसियां अब सिर्फ वर्षों लंबी प्रत्यर्पण लड़ाई पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। कई मामलों में डिपोर्टेशन विंडो, इमिग्रेशन डिटेंशन, लोकल केस सिंक्रोनाइजेशन और स्पेशल एयरलिफ्ट मॉडल पर काम हो रहा है। यानी जिस दिन विदेशी देश ने हरी झंडी दी, उसी दिन आरोपी को विशेष विमान में बैठाकर भारत लाया जा सकता है। यह ठीक वैसा मॉडल है जैसा बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी या माफिया मामलों में इस्तेमाल होता है। इसीलिए एजेंसियों के अंदर इसे “hunt, hold, haul” कहा जा रहा है—ढूंढो, रोको, उठा लाओ।
ड्रग्स, काला धन और गैंगवार—सब पर एक साथ हमला
2025 में 1.33 लाख किलो से ज्यादा ड्रग्स जब्ती, हजारों करोड़ की नष्ट की गई खेप, दर्जनों इंटरपोल नोटिस और लगातार अंतरराष्ट्रीय समन्वय के बाद अब भारत ने तय कर लिया है कि अपराधियों को सिर्फ माल से नहीं, मौजूदगी से भी खत्म करना है। क्योंकि विदेश में बैठा डॉन सिर्फ पैसा नहीं भेजता—वह भारत में नशा, हथियार, सुपारी, साइबर ठगी और गैंगवार का रिमोट कंट्रोल चलाता है। इसलिए Operation Global Hunt का असली लक्ष्य गिरफ्तारी से भी बड़ा है—विदेश में बैठे पूरे अपराधी इकोसिस्टम की रीढ़ तोड़ना।
अंडरवर्ल्ड में पैनिक मोड
भारतीय एजेंसियों की इस गुप्त घेराबंदी के बाद विदेशों में बैठे भगोड़े नेटवर्क में भारी बेचैनी बताई जा रही है। दुबई, तुर्की, कनाडा और यूरोप में छिपे कई भारतीय अपराधियों ने अपने संपर्क, मोबाइल नंबर, यात्रा रूट और आर्थिक चैनल बदलने शुरू कर दिए हैं। एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि कई ड्रग और हवाला ऑपरेटर लगातार लोकेशन शिफ्ट कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि अगला नंबर उनका हो सकता है।
यह पहली बार है जब भारत की केंद्रीय एजेंसियां केवल कागजी प्रत्यर्पण नहीं, बल्कि targeted international pickup strategy पर काम कर रही हैं। यानी अपराधी जहां मिलेगा, वहीं स्थानीय एजेंसियों की मदद से उसे रोका जाएगा और कानूनी खिड़की मिलते ही भारत लाया जाएगा। सलीम डोला की गिरफ्तारी ने यह साफ कर दिया है कि यह अभियान सिर्फ घोषणा नहीं—जमीन पर शुरू हो चुका शिकारी मॉडल है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
दुबई में कौन अगला पकड़ा जाएगा?
तुर्की से अगली डिपोर्टेशन किसकी होगी?
कनाडा में कौन सा गैंगस्टर भारतीय रडार पर है?
और क्या ड्रग्स, हवाला, गैंगवार चलाने वाले विदेश बैठे डॉन सचमुच भारत लाए जाएंगे?
Operation Global Hunt ने इतना तो साफ कर दिया है—
विदेश में बैठा भगोड़ा अब सुरक्षित नहीं है,
और भारतीय एजेंसियां इस बार लंबी दौड़ खेलने नहीं, सीधा शिकंजा कसने निकली हैं।














