पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का मतदान पूरा हो चुका है और अब पूरे देश की नजर 4 मई की मतगणना पर टिक गई है। राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों के लिए वोटों की गिनती सोमवार को होगी, लेकिन इस बार सबसे बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल मतगणना केंद्रों की संख्या को लेकर खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि पूरे राज्य में मतगणना अब केवल 77 काउंटिंग सेंटरों पर कराई जाएगी, जबकि इससे पहले इनकी संख्या 108, फिर 87 थी।
मतगणना केंद्रों में इस लगातार कटौती ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। All India Trinamool Congress ने इस फैसले पर गंभीर सवाल उठाए हैं और काउंटिंग से पहले पारदर्शिता, सुरक्षा तथा EVM मूवमेंट को लेकर कड़ी निगरानी की मांग की है। इसी बीच राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने संकेत दिया है कि “जरूरत पड़ी तो संख्या और कम भी की जा सकती है,” जिससे राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है।
108 से 87… और अब 77: आखिर क्यों घटते गए काउंटिंग सेंटर?
पश्चिम बंगाल में:
2016 विधानसभा चुनाव में 90 केंद्रों पर मतगणना हुई थी
2021 चुनाव में इसे बढ़ाकर 108 किया गया
17 अप्रैल 2026 को आयोग ने इसे घटाकर 87 कर दिया
और अब अंतिम रूप से 77 केंद्रों की सूची जारी हुई है
चुनाव आयोग का तर्क है कि प्रशासनिक पुनर्संतुलन, सुरक्षा समेकन और लॉजिस्टिक नियंत्रण के लिए यह पुनर्व्यवस्था की गई है। लेकिन विपक्षी दल, खासकर तृणमूल कांग्रेस, इसे सामान्य तकनीकी बदलाव मानने को तैयार नहीं है।
TMC नेताओं का कहना है कि कम केंद्रों का मतलब है:
अधिक EVM का केंद्रीकृत मूवमेंट
मजबूत निगरानी की अतिरिक्त जरूरत
एजेंटों पर बढ़ा दबाव
और संभावित भ्रम की स्थिति
यही कारण है कि मतगणना से पहले ही स्ट्रॉन्ग रूम से काउंटिंग टेबल तक की प्रक्रिया अब बंगाल की सबसे बड़ी राजनीतिक चिंता बन गई है।
EVM विवाद के बीच काउंटिंग को लेकर बढ़ी बेचैनी
मतदान खत्म होने के बाद राज्य में EVM मूवमेंट और कथित छेड़छाड़ को लेकर बहस पहले से ही गर्म है। CEO मनोज अग्रवाल ने गुरुवार को स्वीकार किया कि दूसरे चरण के मतदान के बाद 77 शिकायतें EVM से छेड़छाड़/अनियमितता संबंधी मिली हैं, जिनकी समीक्षा की जा रही है और जरूरत पड़ने पर 2 मई से पहले री-पोल भी कराया जा सकता है।
हालांकि चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर वायरल EVM चोरी या संदिग्ध ढुलाई के दावे भ्रामक हैं और रिजर्व मशीनों को तय प्रोटोकॉल के तहत शिफ्ट किया गया था।
लेकिन एग्जिट पोल से गरम माहौल, EVM शिकायतें और अब काउंटिंग सेंटरों की कटौती — इन तीनों ने 4 मई की गिनती को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।
जिलेवार कहां-कहां होगी मतगणना?
जारी सूची के मुताबिक राज्य के 77 काउंटिंग सेंटर विभिन्न जिलों में बनाए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से:
अलीपुरद्वार – 1
बांकुड़ा – 3
बीरभूम – 3
कूचबिहार – 5
दार्जिलिंग – 3
हुगली – 5
हावड़ा – 4
कोलकाता – 5
मुर्शिदाबाद – 5
नादिया – 4
नॉर्थ 24 परगना – 7
साउथ 24 परगना – 6
ईस्ट/वेस्ट मिदनापुर – 7 संयुक्त
ईस्ट/वेस्ट बर्दवान – 6 संयुक्त
पुरुलिया – 3
नॉर्थ दिनाजपुर – 2
आदि शामिल हैं।
यानी जिन जिलों में सीटें ज्यादा हैं, वहां केंद्रों का दबाव भी ज्यादा रहेगा। खासकर नॉर्थ 24 परगना, साउथ 24 परगना, कोलकाता, हुगली और मुर्शिदाबाद इस बार सबसे हाई-वोल्टेज काउंटिंग ज़ोन माने जा रहे हैं।
कोलकाता की 11 सीटें 5 सेंटर पर, नॉर्थ 24 परगना सबसे संवेदनशील
राजधानी Kolkata की 11 विधानसभा सीटों के वोट पांच केंद्रों पर गिने जाएंगे, जिनमें:
बाबा साहेब अंबेडकर एजुकेशन यूनिवर्सिटी
बालीगंज गवर्नमेंट हाई स्कूल
नेताजी इंडोर स्टेडियम
शाखावत मेमोरियल स्कूल
सेंट थॉमस बॉयज स्कूल
शामिल हैं।
वहीं राज्य की सबसे ज्यादा 33 सीटों वाला नॉर्थ 24 परगना जिला सबसे अहम माना जा रहा है, जहां 7 से अधिक बड़े परिसरों में गिनती की व्यवस्था की गई है। साउथ 24 परगना की 31 सीटों के लिए 6 केंद्र बनाए गए हैं।
इन जिलों के नतीजे ही तय करेंगे कि बंगाल में सत्ता किसके हाथ जाएगी।
एग्जिट पोल ने बढ़ाया तनाव, अब काउंटिंग सेंटर बने नई लड़ाई का मैदान
एग्जिट पोल में जहां कई एजेंसियों ने Bharatiya Janata Party को बढ़त दिखाई है, वहीं Mamata Banerjee और TMC नेतृत्व एग्जिट पोल को “मनोवैज्ञानिक खेल” बता चुका है।
सोशल मीडिया चर्चाओं में भी लगातार यही बात उभर रही है कि अब असली लड़ाई मतदान नहीं बल्कि counting management, EVM security और table-wise vigilance की है।
यानी 4 मई को सिर्फ वोटों की गिनती नहीं होगी —
हर राउंड, हर टेबल, हर EVM और हर strong room पर सियासी निगाहें जमी होंगी।
4 मई: बंगाल का सबसे बड़ा राजनीतिक इम्तिहान
मतदान खत्म हो चुका है, एग्जिट पोल आ चुके हैं, आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं, EVM शिकायतें दर्ज हैं और काउंटिंग सेंटरों की संख्या घट चुकी है।
अब पूरा बंगाल एक ही सवाल पर टिका है —
77 सेंटरों से निकलेगा किसका राज?
4 मई को यह सिर्फ मतगणना नहीं, बल्कि बंगाल की सत्ता, चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और राजनीतिक धैर्य — तीनों की अग्निपरीक्षा होगी।














