Saturday, April 18, 2026
Your Dream Technologies
HomeLok Sabhaमहिला आरक्षण विधेयक पर सियासी घमासान: स्मृति ईरानी का कांग्रेस पर तीखा...

महिला आरक्षण विधेयक पर सियासी घमासान: स्मृति ईरानी का कांग्रेस पर तीखा हमला, ‘महिलाओं से धोखा’ का आरोप

नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के बाद देश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इस बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर जोरदार हमला बोलते हुए इस घटनाक्रम को महिलाओं के साथ “धोखा” करार दिया है।


“महिलाओं के अधिकारों पर जश्न मना रहा विपक्ष”

स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि जब लोकसभा में यह विधेयक गिरा, तब कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के सांसदों ने ताली बजाकर और मेज थपथपाकर इस बात का जश्न मनाया कि महिलाओं को 33% आरक्षण का अधिकार नहीं मिल सका उन्होंने कहा–
“जिन लोगों ने कल सदन में तालियां बजाईं और हंसे, उन्हें देश की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी। यह केवल एक बिल की हार नहीं, बल्कि महिलाओं की आकांक्षाओं के साथ विश्वासघात है।”


“98 साल का वादा, लेकिन अमल नहीं”

ईरानी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस दशकों से महिला आरक्षण का श्रेय लेने की कोशिश करती रही है, लेकिन लगभग 98 वर्षों में इसे लागू करने में असफल रही।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस वास्तव में महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना चाहती थी, तो इतने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद उसने इसे लागू क्यों नहीं किया।


प्रियंका गांधी पर भी सीधा आरोप

ईरानी ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर भी सीधा हमला करते हुए आरोप लगाया कि वे महिलाओं को 33% आरक्षण दिए जाने की विरोधी हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व केवल अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने में लगा है और नहीं चाहता कि गरीब या वंचित वर्ग की महिलाएं राजनीति में आगे आएं।


क्यों गिरा विधेयक?

महिला आरक्षण से जुड़े इस संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका।

पक्ष में वोट: 298

विरोध में वोट: 230

आवश्यक संख्या: 352

कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया, लेकिन जरूरी समर्थन न मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हो पाया।


सीट बढ़ाने और आरक्षण पर विवाद

इस विधेयक में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के साथ-साथ लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का भी प्रस्ताव शामिल था। ईरानी ने विपक्ष से सवाल किया कि यदि उनका उद्देश्य वास्तव में महिलाओं को अधिकार देना था, तो उन्होंने सीट बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन क्यों नहीं किया।


“पुरुषों के साथ भी न्याय जरूरी”

ईरानी ने यह भी कहा कि मौजूदा सीटों के भीतर आरक्षण लागू करने की मांग पुरुष प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकती है। उनके अनुसार, सरकार ने एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए महिलाओं को अवसर देने के साथ-साथ पुरुषों के अधिकारों को भी सुरक्षित रखने की कोशिश की है।


पीएम के संबोधन पर नजर

उन्होंने संकेत दिया कि नरेंद्र मोदी राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में इस विधेयक के भविष्य और सरकार के रुख को स्पष्ट कर सकते हैं।


सियासी पारा हाई

इस पूरे घटनाक्रम ने महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में ला दिया है। जहां सत्तापक्ष इसे महिलाओं के सशक्तिकरण का ऐतिहासिक अवसर बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति और अधूरे ढांचे वाला प्रस्ताव करार दे रहा है।

महिला आरक्षण विधेयक का लोकसभा में गिरना केवल एक संसदीय घटना नहीं, बल्कि देश की राजनीति में गहरे मतभेदों का संकेत है। स्मृति ईरानी के तीखे बयान ने इस बहस को और गरमा दिया है।

अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर क्या राजनीतिक और विधायी कदम उठाए जाते हैं, और क्या महिलाओं को आरक्षण का यह बहुप्रतीक्षित अधिकार मिल पाता है या नहीं।

- Advertisement -
Your Dream Technologies
VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Call Now Button