Saturday, April 11, 2026
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बंगाल में किसानों के मुद्दे पर सियासी संग्राम तेज: धर्मेंद्र प्रधान ने TMC सरकार पर बोला हमला, BJP ने MSP और बाजार की गारंटी का किया वादा

कोलकाता:पश्चिम बंगाल में किसानों की स्थिति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राज्य की All India Trinamool Congress (TMC) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और वे बिचौलियों के जाल में फंसे हुए हैं।

उन्होंने अमित शाह के ओंडा में दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा कि बंगाल के किसानों, खासकर आलू उत्पादकों, को उनकी मेहनत का सही दाम नहीं मिल पा रहा। उनके मुताबिक, राज्य सरकार की नीतियों के कारण बंगाल के किसानों के लिए ओडिशा, झारखंड और देश के अन्य बाजारों तक पहुंच बाधित हुई है।

धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि टीएमसी शासन में बिचौलियों का तंत्र मजबूत हुआ है, जबकि किसान अपनी ही उपज का मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “अन्नदाता खेतों में मेहनत करता है, लेकिन अव्यवस्था उसे उसके हक से दूर रखती है।”


आलू किसानों का मुद्दा केंद्र में

केंद्रीय मंत्री ने विशेष रूप से आलू किसानों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य में उत्पादित आलू को अन्य राज्यों में भेजने में बाधाएं हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इससे पहले केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने भी इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि बंगाल सरकार के रवैये के कारण किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा। उन्होंने वादा किया कि यदि राज्य में Bharatiya Janata Party (BJP) की सरकार बनती है, तो बंगाल का आलू पूरे देश में बेचा जाएगा।


BJP का वादा: बाजार और मूल्य दोनों की गारंटी

अमित शाह ने यह भी घोषणा की कि किसानों को बेहतर बीज उपलब्ध कराने के लिए विष्णुपुर में सहकारिता मंत्रालय की ओर से आलू बीज उत्पादन प्लांट स्थापित किया जाएगा। इससे किसानों को बाहर से बीज मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उत्पादन लागत भी कम होगी।

उन्होंने कहा कि “जिस दिन बंगाल में बीजेपी का मुख्यमंत्री शपथ लेगा, उसी दिन झारखंड और ओडिशा में आलू भेजने की अनुमति दे दी जाएगी।” यह बयान आगामी चुनावों को देखते हुए किसानों को साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।


सियासी मायने

बंगाल में किसानों, खासकर आलू उत्पादकों का मुद्दा अब राजनीतिक केंद्र में आ गया है। एक ओर बीजेपी किसानों के हितों को लेकर बड़े वादे कर रही है, वहीं TMC सरकार पर आरोप लगा रही है कि उसने किसानों को बाजार और उचित मूल्य से वंचित रखा है।

हालांकि, टीएमसी की ओर से अभी तक इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले चुनावों में यह मुद्दा बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है।

पश्चिम बंगाल में किसानों की स्थिति को लेकर उठी बहस अब राजनीतिक रंग ले चुकी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या किसानों के मुद्दे पर किए गए वादे जमीनी हकीकत में बदल पाते हैं या यह चुनावी रणनीति तक सीमित रहेंगे।

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VIKAS TRIPATHI
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