ईरान-अमेरिक के बीच जारी तनाव के बाद घोषित दो हफ्तों के युद्धविराम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस युद्धविराम में Pakistan की मध्यस्थता को लेकर जहां वह खुद को ‘शांति दूत’ के रूप में पेश कर रहा है, वहीं भारत में इस पर सवाल उठने लगे हैं।
कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने पाकिस्तान की इस भूमिका पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आज भले ही शांति की बात कर रहा हो, लेकिन उसके अतीत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। थरूर ने 26/11 मुंबई हमलों, आतंकी प्रशिक्षण शिविरों और हालिया पहलगाम हमले जैसे उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि “ऐसे रिकॉर्ड के साथ कोई देश खुद को शांति दूत कैसे कह सकता है?”
उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान ने अब तक किसी भी बड़े आतंकी नेटवर्क पर ठोस कार्रवाई नहीं की है और न ही अपने यहां चल रहे कथित आतंकी कैंपों को बंद किया है। थरूर के मुताबिक, “हम किस आधार पर भरोसा करें कि पाकिस्तान वास्तव में शांति चाहता है?”
हालांकि, थरूर ने यह भी माना कि अगर Iran, United States और Israel के बीच तनाव कम होता है, तो यह भारत के हित में होगा। उन्होंने कहा कि भारत को इस स्थिति में एक रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए और शांति प्रयासों का समर्थन करना चाहिए, चाहे मध्यस्थ कोई भी हो।
थरूर ने यह भी संकेत दिया कि पाकिस्तान की इस पहल के पीछे उसके अपने रणनीतिक हित हो सकते हैं। Iran के साथ 900 किमी लंबी सीमा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यदि संघर्ष बढ़ता है, तो शरणार्थियों का दबाव सीधे पाकिस्तान पर पड़ेगा, जिससे उसकी चिंता स्वाभाविक है।
इसके अलावा, उन्होंने पाकिस्तान और Washington के रिश्तों पर भी टिप्पणी करते हुए तंज कसा कि “दुनिया जानती है कि दोनों के बीच कैसे संबंध हैं।”
अंत में थरूर ने कहा कि भारत एक प्राचीन सभ्यता है और उसे उदारता दिखाते हुए शांति के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य केवल क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता होना चाहिए, न कि यह देखना कि शांति की पहल किस देश ने की है।














