बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर एक नया राजनीतिक कीर्तिमान स्थापित कर दिया। इसके साथ ही वे बिहार के उन चुनिंदा नेताओं की सूची में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा — चारों सदनों की सदस्यता हासिल की है।
नीतीश कुमार अब बिहार के छठे ऐसे नेता बन गए हैं, जिनका नाम इस विशेष सूची में दर्ज हुआ है। उनसे पहले यह उपलब्धि पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता रहे स्वर्गीय सुशील कुमार मोदी, राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा और वर्तमान बिहार सरकार में मंत्री रामकृपाल यादव हासिल कर चुके हैं।
राजनीतिक जीवन के लंबे और विविध अनुभव के कारण नीतीश कुमार पहले से ही देश के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। शपथ ग्रहण के बाद भी वे सरकार में मंत्री की भूमिका नहीं निभाएंगे, बल्कि पार्टी को मार्गदर्शन देने की दिशा में काम करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक बताया और उनके सुशासन, प्रशासनिक दक्षता तथा राजनीतिक प्रतिबद्धता की सराहना की।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर बेहद लंबा रहा है। 1985 में उन्होंने हरनौत सीट से पहली बार विधायक बनकर विधानसभा की राजनीति में प्रवेश किया। इसके बाद वे कई बार लोकसभा के लिए चुने गए और केंद्र सरकार में कृषि मंत्री तथा रेल मंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभा चुके हैं। विधानसभा और लोकसभा के बाद विधान परिषद में भी उनकी लंबी सक्रियता रही, जहां वे अलग-अलग कार्यकालों में कई बार सदस्य बने।
चारों सदनों की सदस्यता पाने वाले नेताओं में सबसे पहले नागमणि का नाम आता है। जगदेव प्रसाद के पुत्र नागमणि ने 1977 में कुर्था से विधायक बनकर राजनीतिक शुरुआत की थी। वे चतरा से लोकसभा सांसद रहे, बिहार विधान परिषद के सदस्य बने और 2002 से 2004 तक राज्यसभा में भी रहे।
लालू प्रसाद यादव का राजनीतिक सफर भी इसी उपलब्धि का हिस्सा रहा है। वे बिहार विधानसभा, बिहार विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा — चारों सदनों में रह चुके हैं। 1977 में वे पहली बार लोकसभा पहुंचे, 1980 में बिहार विधानसभा के सदस्य बने, 1998 में फिर लोकसभा गए और 2002 में राज्यसभा सदस्य बने।
स्वर्गीय सुशील कुमार मोदी ने भी इस सूची में अपनी खास जगह बनाई। 1990 में कुम्हरार सीट से विधानसभा पहुंचे सुशील मोदी बाद में भागलपुर से लोकसभा सदस्य बने, फिर विधान परिषद और उसके बाद राज्यसभा के सदस्य रहे।
रामकृपाल यादव का राजनीतिक सफर भी इसी सूची में शामिल है। उन्होंने पटना के डिप्टी मेयर से अपने करियर की शुरुआत की, फिर विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा तक पहुंचे। बाद में वे भाजपा में शामिल हुए और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे। हाल के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने दानापुर सीट से जीत दर्ज कर इस विशिष्ट सूची में अपना नाम और मजबूत किया।
उपेंद्र कुशवाहा भी उन गिने-चुने नेताओं में हैं, जिन्होंने चारों सदनों में प्रतिनिधित्व किया है। वे बिहार विधानसभा, लोकसभा, विधान परिषद और राज्यसभा — सभी में सदस्य रह चुके हैं। लव-कुश समीकरण के प्रमुख नेताओं में गिने जाने वाले कुशवाहा ने कई महत्वपूर्ण पदों पर राजनीतिक जिम्मेदारियां निभाईं।
अब नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के साथ यह सूची एक बार फिर चर्चा में है। उनका नाम इस सूची में जुड़ना न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि बिहार की राजनीति में उनके लंबे, बहुआयामी और प्रभावशाली सफर का भी प्रतीक माना जा रहा है।














