Friday, April 10, 2026
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यमुना पुनर्जीवन को मिशन मोड में लाने की तैयारी: LG और CM ने घाटों का किया निरीक्षण, ग्रीन बजट पर जोर

दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को यमुना नदी के किनारे स्थित प्रमुख घाटों—वासुदेव घाट और यमुना बाजार घाट—का निरीक्षण कर साफ-सफाई, आधारभूत ढांचे और पुनर्जीवन परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने यमुना को स्वच्छ और पुनर्जीवित करने के लिए चल रहे कार्यों को तेज़ करने के निर्देश दिए।

विकसित और अविकसित घाटों के बीच अंतर पर जोर

निरीक्षण के दौरान वासुदेव घाट, जिसे दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित किया गया है, और अन्य घाटों के बीच स्पष्ट अंतर देखने को मिला। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी घाटों को पर्यावरण-अनुकूल, हरित और आधुनिक सार्वजनिक स्थलों के रूप में विकसित किया जाए।

असिता, बनसेरा और यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क जैसे विकसित क्षेत्रों को मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया, जहां वॉकिंग ट्रेल्स, हरित क्षेत्र और जैव-विविधता संरक्षण के सफल प्रयास दिखाई दे रहे हैं।

फ्लडप्लेन और ग्रीनवे विकास पर फोकस

वजीराबाद से ओखला तक यमुना फ्लडप्लेन के पुनर्स्थापन कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। इसमें ग्रीनवे कॉरिडोर, साइक्लिंग ट्रैक, पौधारोपण, वेटलैंड्स पुनर्जीवन और प्राकृतिक जलधाराओं के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।

जन-संवाद से निकले समाधान

उपराज्यपाल ने बताया कि यह निरीक्षण नागरिकों के साथ हुए संवाद का परिणाम है, जिसमें यमुना प्रदूषण, वायु प्रदूषण, बाढ़ और जल संकट जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आए थे। उन्होंने कहा कि सरकार जन-फीडबैक के आधार पर ही योजनाओं को आगे बढ़ा रही है।

विभागों को सख्त निर्देश

निरीक्षण के बाद दिल्ली जल बोर्ड, DPCC, MCD और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग सहित सभी एजेंसियों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए। साथ ही समयबद्ध लक्ष्य तय करने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व सीवेज नियंत्रण पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने को कहा गया।

ग्रीन बजट से मिलेगा बड़ा समर्थन

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2026-27 के बजट में ₹22,236 करोड़ का ग्रीन बजट रखा गया है, जो कुल बजट का लगभग 21.44% है। इसका बड़ा हिस्सा यमुना की सफाई, सीवेज ट्रीटमेंट और डी-सिल्टिंग जैसे कार्यों पर खर्च किया जाएगा।

अतिक्रमण हटाने और स्थायी घाटों पर जोर

सरकार ने यमुना की जलधारण क्षमता बढ़ाने के लिए फ्लडप्लेन से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अस्थायी घाटों के बजाय स्थायी और आधुनिक घाट विकसित करने पर विशेष बल दिया गया है।

वैश्विक विशेषज्ञों का सहयोग

उपराज्यपाल ने कहा कि यमुना पुनर्जीवन अब राष्ट्रीय प्राथमिकता बन चुका है और इसके लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम किया जाएगा।

लक्ष्य: स्वच्छ, हरित और आकर्षक यमुना

LG और मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यमुना के किनारों को एक सतत (continuous) हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जो न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक होगा बल्कि आम जनता के लिए आकर्षण का केंद्र भी बनेगा।

 

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