कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस बयान को न केवल व्यक्तिगत अपमान बताया, बल्कि देश के अनुसूचित जाति और जनजाति (SC-ST) समाज के करोड़ों लोगों के सम्मान पर हमला करार दिया।
मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया में राहुल गांधी ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा “निंदनीय, शर्मनाक और अस्वीकार्य” है। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे एक वरिष्ठ, लोकप्रिय और सम्मानित दलित नेता हैं, जिनका राजनीतिक अनुभव और कद बेहद ऊंचा है।
‘यह केवल एक व्यक्ति नहीं, पूरे समाज का अपमान’
राहुल गांधी ने कहा कि खरगे के खिलाफ की गई टिप्पणी केवल एक नेता का अपमान नहीं है, बल्कि यह देश के SC-ST समुदाय के करोड़ों लोगों का भी अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की भाषा और सोच कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह बीजेपी और RSS की “पुरानी और सुनियोजित मानसिकता” का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब कोई दलित नेता सच्चाई बोलता है, तब-तब उसे अपमानित करने की कोशिश की जाती है। राहुल गांधी ने बाबासाहेब आंबेडकर के संदर्भ का जिक्र करते हुए कहा कि दलित नेतृत्व को नीचा दिखाना इस विचारधारा का हिस्सा रहा है।
पीएम मोदी से सीधा सवाल
कांग्रेस नेता ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी सीधे जवाब की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के इस बयान का समर्थन करते हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री इस मामले पर चुप रहते हैं, तो यह चुप्पी “मजबूरी नहीं, बल्कि सहमति” मानी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर देश के करोड़ों दलितों के सम्मान पर हमला होता है और प्रधानमंत्री प्रतिक्रिया नहीं देते, तो यह उनकी जिम्मेदारी से बचने जैसा है।
विवाद की जड़ क्या है?
दरअसल, कांग्रेस नेताओं ने एक वीडियो साझा किया है, जिसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा कथित तौर पर मल्लिकार्जुन खरगे के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं। इसी वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
सियासी टकराव तेज
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है, जहां कांग्रेस बीजेपी पर दलित विरोधी मानसिकता का आरोप लगा रही है, वहीं अब सभी की नजरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अब सामाजिक सम्मान, राजनीतिक मर्यादा और दलित प्रतिनिधित्व जैसे बड़े मुद्दों से जुड़ता नजर आ रहा है।














