देश में एलपीजी गैस की कथित किल्लत और वैश्विक ऊर्जा संकट को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए इसे ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल बताया है। वहीं उनके इस बयान पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव की देशभक्ति पर ही सवाल खड़े कर दिए।
अखिलेश के बयान पर मौर्य का पलटवार
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि वह अखिलेश यादव को देशद्रोही तो नहीं कह सकते, लेकिन उनके बयानों से उनकी देशभक्ति पर जरूर संदेह होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब पूरी दुनिया ऊर्जा संकट का सामना कर रही है, तब इस तरह के बयान माहौल खराब करने का काम करते हैं।
मौर्य ने कहा कि वर्तमान स्थिति का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहा संघर्ष है, जिसमें Iran, United States और Israel के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है।
उन्होंने दावा किया कि इस संकट के कारण देश में गैस सिलेंडरों की मांग अचानक बढ़ गई है। पहले जहां प्रतिदिन करीब 50 से 55 लाख गैस सिलेंडरों की बुकिंग होती थी, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 88 लाख तक पहुंच गई है।
मौर्य ने यह भी आरोप लगाया कि अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता Rahul Gandhi जैसे विपक्षी नेता इस मुद्दे पर अफवाहें फैलाकर जनता में घबराहट पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता ऐसे बयानों को समझती है और समय आने पर इसका जवाब भी देगी।
पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी टिप्पणी
केशव प्रसाद मौर्य ने इस दौरान West Bengal की राजनीति का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस की विदाई तय है और आने वाले समय में भाजपा की सरकार बनने जा रही है।
मौर्य ने कहा कि भाजपा के पक्ष में बनते माहौल से All India Trinamool Congress घबराई हुई है और इसी वजह से बयानबाजी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति कर रही है, लेकिन जनता उन्हें करारा जवाब देगी।
केंद्र की विदेश नीति पर अखिलेश का हमला
इससे पहले समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा था कि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक मजबूत भूमिका निभानी चाहिए थी।
Mumbai में मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि मौजूदा वैश्विक संकट के दौरान भारत के पास दुनिया को शांति का संदेश देने और नेतृत्व करने का मौका था।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की विदेश नीति विफल रही है और इसका असर देश की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ा है। उनके अनुसार भारत की एलपीजी आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय हालात पर निर्भर करती है।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि भारत को वैश्विक मंच पर शांति और स्थिरता के लिए अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए थी।
मध्य पूर्व संकट का ऊर्जा आपूर्ति पर असर
दरअसल मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के बाद Strait of Hormuz को लेकर स्थिति तनावपूर्ण हो गई है।
यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। अनुमान है कि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन इसी रास्ते से होता है।
भारत के लिए भी यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपने कुल तेल और गैस आयात का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से प्राप्त करता है। ऐसे में यदि इस मार्ग पर कोई बाधा आती है तो उसका असर सीधे भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
LPG संकट पर सियासत जारी
देश में एलपीजी सिलेंडरों की बढ़ती मांग और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होती जा रही है। जहां विपक्ष केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार और भाजपा नेता अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और मध्य पूर्व का तनाव अभी थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है।














