Wednesday, March 11, 2026
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ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज, दो दिन की बहस के बाद सदन ने जताया भरोसा

नई दिल्ली। लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार को ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया। दो दिनों तक चली लंबी बहस के बाद सदन ने प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए बिरला पर अपना भरोसा बरकरार रखा। इसके साथ ही ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष के पद पर बने रहेंगे।

यह अविश्वास प्रस्ताव मोहम्मद जावेद ने कई विपक्षी सांसदों के समर्थन से पेश किया था। विपक्ष का आरोप था कि स्पीकर सदन के संचालन में पक्षपात कर रहे हैं और विपक्षी सदस्यों को पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा। हालांकि सत्तारूढ़ गठबंधन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पीकर का जोरदार बचाव किया।

अमित शाह ने स्पीकर का किया जोरदार बचाव

बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पीकर की भूमिका का समर्थन करते हुए कहा कि संसद की कार्यवाही आपसी विश्वास और नियमों के पालन पर आधारित होती है। उन्होंने कहा कि स्पीकर की भूमिका सदन के एक निष्पक्ष संरक्षक की होती है।

अमित शाह ने कहा कि लोकसभा के स्थापित इतिहास में सदन की कार्यवाही आपसी भरोसे से चलती आई है। स्पीकर का दायित्व है कि वे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को समान रूप से अवसर दें और नियमों के अनुसार सदन का संचालन करें। उन्होंने यह भी कहा कि संसद कोई बाजार नहीं है, जहां बिना नियमों के कोई भी बोल सके; यहां सदस्यों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही अपनी बात रखनी होती है।

विपक्ष ने लगाए पक्षपात के आरोप

हालांकि विपक्षी सांसदों ने स्पीकर के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि कई बार विपक्षी सांसदों को ऐसा महसूस हुआ कि चेयर से उन्हें पूरी सुरक्षा और निष्पक्षता नहीं मिल रही।

उन्होंने कहा कि कुछ समय से चेयर सदन की स्वतंत्रता का प्रतीक बनने के बजाय सत्तारूढ़ दल के दबाव का प्रतीक बनती नजर आई है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि एक दिन में 140 से अधिक सांसदों के निलंबन की घटना भी सदन ने देखी थी, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।

विपक्ष के भाषणों में रुकावट का आरोप

इसी दौरान सांसद विजय कुमार हंसदक ने आरोप लगाया कि जब विपक्षी सांसद बोलते हैं तो अक्सर उन्हें बीच में रोका जाता है और कई बार कैमरा भी दूसरी दिशा में कर दिया जाता है।

वहीं सांसद बजरंग मनोहर सोनवाने ने कहा कि विपक्ष को पहले से ही पता था कि प्रस्ताव पारित होना मुश्किल है, लेकिन इस बहस के माध्यम से वे संसद में लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ी चिंताओं को सामने लाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्ति विशेष पर हमला नहीं बल्कि संसदीय परंपराओं पर चर्चा का अवसर था।

बहस के बाद ध्वनि मत से प्रस्ताव खारिज

दो दिनों तक चली तीखी बहस के बाद स्पीकर के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया। इसके साथ ही लोकसभा ने स्पष्ट संकेत दिया कि सदन का बहुमत अभी भी स्पीकर ओम बिरला के साथ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बहस ने एक बार फिर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक टकराव को उजागर किया है, हालांकि संसदीय प्रक्रिया के तहत अंततः सदन का फैसला स्पीकर के पक्ष में गया।

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