नई दिल्ली: 18वीं लोकसभा के कार्यकाल में भारत ने कैरिबियाई देशों के साथ अपने संसदीय संबंधों को नई दिशा देने की पहल की है। संसद में भारत–कैरिकॉम पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप का औपचारिक गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत और कैरिबियाई देशों के बीच लोकतांत्रिक संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रणनीतिक सहयोग को सुदृढ़ करना है।
लोकसभा सचिवालय के डायरेक्टर एल. वी. रमण द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी को इस समूह का अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति को भारत–कैरिकॉम संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे संसदीय कूटनीति को नई गति मिलने की उम्मीद है।
संसदीय संवाद को मिलेगा संस्थागत मंच
यह मित्रता समूह भारत और कैरिकॉम सदस्य देशों के सांसदों के बीच नियमित संवाद और सहयोग का एक सशक्त मंच प्रदान करेगा। इसके माध्यम से दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडलों की यात्राएं, विचार-विमर्श, नीति-निर्माण के अनुभवों का आदान-प्रदान और संसदीय प्रक्रियाओं की समझ को बढ़ावा दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल लोकतांत्रिक मूल्यों की साझेदारी को मजबूत करेगी और जलवायु परिवर्तन, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, कृषि, डिजिटल नवाचार तथा विकास साझेदारी जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खोलेगी।
11सांसदों की सहभागिता
इस संसदीय मित्रता समूह में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 11 सदस्य शामिल हैं। इनमें गेनिबेन नागाजी ठाकोर, हरभजन सिंह, भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, रामशंकर विद्यार्थी राजभर, विजेंद्र सिंह ओला, गिरिधारी यादव, मुकेश राजपूत, दर्शना सिंह, वेस वी. सुब्बा रेड्डी और चुन्नीलाल गरासिया प्रमुख हैं।
15देशों का संगठन है कैरिकॉम
कैरिकॉम (कैरेबियन कम्युनिटी) एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें 15 सदस्य देश शामिल हैं—एंटीगुआ और बारबुडा, बहामास, बारबाडोस, बेलीज, डोमिनिका, ग्रेनेडा, गुयाना, हैती, जमैका, मॉन्टसेराट, सेंट किट्स एंड नेविस, सेंट लूसिया, सेंट विंसेंट एंड ग्रेनाडाइंस, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो। यह संगठन आर्थिक एकीकरण, क्षेत्रीय सहयोग और साझा विकास के उद्देश्य से कार्य करता है।
नई ऊर्जा के संकेत
मनोज तिवारी की अध्यक्षता में गठित यह समूह भारत और कैरिबियाई देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान कर सकता है। भारतीय मूल के प्रवासी समुदाय की महत्वपूर्ण उपस्थिति वाले इन देशों के साथ भारत के संबंध पहले से ही सुदृढ़ रहे हैं। अब संसदीय स्तर पर संवाद की इस औपचारिक व्यवस्था से द्विपक्षीय रिश्तों को और मजबूती मिलने की संभावना है।
कुल मिलाकर, भारत–कैरिकॉम पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप का गठन न केवल कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच सहयोग की नई मिसाल भी पेश करता है।














