Monday, February 23, 2026
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तमिलनाडु में सीट बंटवारे पर तकरार: DMK ने 25 से ज्यादा सीटें देने से किया इनकार, कांग्रेस की 45 सीटों की मांग से गठबंधन पर संकट

चेन्नई: तमिलनाडु में सत्तारूढ़ गठबंधन के दो प्रमुख दलों—Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) और Indian National Congress (कांग्रेस)—के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज हो गई है। कांग्रेस जहां आगामी विधानसभा चुनाव के लिए 45 सीटों की मांग पर अड़ी है, वहीं मुख्यमंत्री M. K. Stalin के नेतृत्व वाली डीएमके ने 25 से अधिक सीटें देने से साफ इनकार कर दिया है।

इस टकराव ने गठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब राज्य में इसी वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं।


क्या है कांग्रेस की मांग?

कांग्रेस का तर्क है कि पिछली बार डीएमके जिन 40 सीटों पर चुनाव हारी थी, उनमें से कम से कम 20 सीटें कांग्रेस को दी जाएं। कांग्रेस का कहना है कि पिछली बार उसने 25 सीटों पर चुनाव लड़ा था; यदि इस बार 20 अतिरिक्त सीटें मिलती हैं तो कुल संख्या 45 हो जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने सत्ता में हिस्सेदारी के सवाल पर अपना रुख नरम करने के संकेत भी दिए थे, लेकिन डीएमके ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।


वेणुगोपाल-स्टालिन बैठक बेनतीजा

कांग्रेस के संगठन महासचिव K. C. Venugopal और मुख्यमंत्री स्टालिन के बीच हुई अहम बैठक से भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। हालांकि दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है।

इसके बाद कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश और डीएमके की वरिष्ठ नेता Kanimozhi Karunanidhi के बीच नई दौर की चर्चा शुरू हुई है। अब सबकी निगाहें कनिमोझी पर टिकी हैं कि क्या वे गतिरोध तोड़ने में सफल होंगी।


पिछले चुनाव के आंकड़े

पिछले विधानसभा चुनाव में डीएमके ने 173 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से उसे 133 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि 40 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। इन हारी हुई सीटों में से अधिकांश पर All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) और Bharatiya Janata Party (बीजेपी) को सफलता मिली थी।

कांग्रेस का तर्क है कि इन कमजोर सीटों पर वह बेहतर प्रदर्शन कर सकती है और गठबंधन को मजबूती दे सकती है।


तीसरा मोर्चा सक्रिय?

इसी बीच अभिनेता से नेता बने Vijay की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) ने कांग्रेस को अपने साथ लाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। विजय ने पिछले वर्ष अपनी पार्टी का गठन किया था और अब वे राज्य की राजनीति में तीसरे विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि डीएमके और कांग्रेस के बीच समझौता नहीं होता, तो इससे विपक्षी दलों को फायदा मिल सकता है।


गठबंधन का भविष्य अधर में

स्टालिन ने बार-बार सत्ता में हिस्सेदारी की मांग पर नाराजगी जताई है और साफ किया है कि सीटों के बंटवारे में डीएमके अपनी शर्तों पर ही आगे बढ़ेगी।

एक तरफ डीएमके और कांग्रेस समेत अन्य दलों का सत्तारूढ़ गठबंधन है, तो दूसरी ओर एआईएडीएमके, बीजेपी और अन्य दल चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

ऐसे में तमिलनाडु की राजनीति में सीट बंटवारे की यह रस्साकशी आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है। अब देखना होगा कि क्या बातचीत से समाधान निकलता है या फिर राज्य की सियासत में नए समीकरण उभरते हैं।

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