Monday, February 23, 2026
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एनबीएफसी सेक्टर में एयरटेल की बड़ी छलांग: ‘एयरटेल मनी’ में 20,000 करोड़ निवेश, 9,000 करोड़ से अधिक लोन पहले ही वितरित

नई दिल्ली: देश की अग्रणी टेलीकॉम कंपनी Bharti Airtel ने वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में बड़ा दांव खेलते हुए अपनी नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (एनबीएफसी) ‘एयरटेल मनी लिमिटेड’ के विस्तार की घोषणा की है। कंपनी ने बताया कि अगले कुछ वर्षों में इस एनबीएफसी में कुल 20,000 करोड़ रुपये की पूंजी निवेश की जाएगी।

इस पूंजी निवेश में लगभग 70 प्रतिशत योगदान एयरटेल की ओर से किया जाएगा, जबकि शेष 30 प्रतिशत हिस्सेदारी प्रमोटर समूह Bharti Enterprises की तरफ से आएगी। यह कदम भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल लोन बाजार में कंपनी की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की रणनीति का हिस्सा है।

आरबीआई से मिला लाइसेंस

एयरटेल मनी लिमिटेड को 13 फरवरी 2026 को Reserve Bank of India से एनबीएफसी के रूप में संचालन का लाइसेंस प्राप्त हुआ। लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी अब औपचारिक रूप से लोन वितरण, क्रेडिट आकलन और अन्य वित्तीय सेवाएं प्रदान कर सकेगी।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब डिजिटल फाइनेंस और फिनटेक सेक्टर में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। इस पहल को बाजार में रिलायंस समूह के वित्तीय विस्तार—जो अप्रत्यक्ष रूप से Mukesh Ambani के नेतृत्व में हो रहा है—को चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है।


9,000 करोड़ रुपये से अधिक का लोन वितरण

एयरटेल ने बताया कि पिछले दो वर्षों में उसने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से एक मजबूत लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर (LSP) मॉडल विकसित किया है। इस मॉडल के जरिए अब तक 9,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण वितरित किए जा चुके हैं।

कंपनी का दावा है कि उसका क्रेडिट और जोखिम आकलन तंत्र अत्यंत सशक्त है। डेटा-आधारित एल्गोरिद्म, ग्राहकों की व्यवहारिक प्रोफाइलिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से कर्ज चूक (डिफॉल्ट) की दर को नियंत्रित रखा गया है।

एयरटेल के अनुसार, अनुशासित पोर्टफोलियो प्रबंधन और डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम के चलते ऋण प्रक्रिया पारदर्शी और तेज बनी हुई है।


क्या है कंपनी की रणनीति?

एयरटेल के कार्यकारी वाइस चेयरमैन गोपाल विट्टल ने कहा कि कंपनी की ताकत उसके टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म, डेटा एनालिटिक्स क्षमता और करोड़ों ग्राहकों के भरोसे में निहित है। इन तीनों तत्वों के संयोजन से राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव डालने की क्षमता साबित हुई है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि एनबीएफसी विस्तार का लक्ष्य एक भरोसेमंद, पारदर्शी और इनोवेटिव डिजिटल लोन इकोसिस्टम तैयार करना है, जो आम उपभोक्ताओं, छोटे व्यवसायों और नए उभरते उद्यमियों तक आसानी से पहुंच सके।


भारत में ऋण विस्तार की संभावनाएं

रेटिंग एजेंसी केयर एज रेटिंग्स के अनुसार, भारत में संगठित ऋण का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुपात में स्तर लगभग 53 प्रतिशत है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश में ऋण विस्तार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहां औपचारिक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच सीमित है।

एयरटेल का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल कनेक्टिविटी के जरिए वित्तीय समावेशन को नई गति दी जा सकती है।


एलएसपी और एनबीएफसी मॉडल का तालमेल

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि एनबीएफसी का वितरण तंत्र उसके मौजूदा एलएसपी मंच से एकीकृत रहेगा। हालांकि, परिचालन स्तर पर दोनों के बीच स्पष्ट अलगाव बनाए रखा जाएगा ताकि नियामकीय अनुपालन और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

इस संरचना से एयरटेल को टेक्नोलॉजी-आधारित ऋण वितरण और पारंपरिक वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।


प्रतिस्पर्धा और बाजार पर प्रभाव

डिजिटल लेंडिंग के क्षेत्र में एयरटेल की यह आक्रामक रणनीति टेलीकॉम कंपनियों के फाइनेंशियल सर्विसेज में विस्तार की नई प्रवृत्ति को दर्शाती है। टेलीकॉम ग्राहक आधार, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म के सहारे वित्तीय सेवाओं का विस्तार अब कंपनियों के लिए बड़ा अवसर बन चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि 20,000 करोड़ रुपये का निवेश एयरटेल को एनबीएफसी सेक्टर में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकता है। इससे न केवल कंपनी के राजस्व स्रोतों में विविधता आएगी, बल्कि भारत में डिजिटल वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा भी और तेज होगी।

एयरटेल मनी लिमिटेड में 20,000 करोड़ रुपये का निवेश और अब तक 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का लोन वितरण इस बात का संकेत है कि कंपनी टेलीकॉम से आगे बढ़कर फाइनेंशियल सर्विसेज के क्षेत्र में दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है।

आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि एयरटेल का यह कदम भारत के एनबीएफसी और डिजिटल लेंडिंग बाजार की तस्वीर किस तरह बदलता है।

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VIKAS TRIPATHI
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