
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया श्रीलंका यात्रा केवल औपचारिक राजनयिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि चीन की ‘सिल्क रोड डिप्लोमेसी’ के खिलाफ एक सधी हुई कूटनीतिक चाल साबित हुई है। इस दौरे में श्रीलंका ने मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘मित्र विभूषण’ से नवाज कर स्पष्ट संकेत दिया कि अब वह चीन के प्रभाव से बाहर निकलकर भारत के साथ मजबूत साझेदारी की ओर बढ़ रहा है।
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के कार्यकाल में यह मोदी की पहली यात्रा थी, लेकिन बीते 10 वर्षों में यह उनकी चौथी श्रीलंका यात्रा है — जो भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति की गंभीरता और निरंतरता को दर्शाता है। इस दौरे के ज़रिए भारत ने यह साबित कर दिया कि वह अब दक्षिण एशिया में महज़ ‘डिफेंस मोड’ में नहीं रहेगा, बल्कि अपनी सामरिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कूटनीति को आक्रामक रूप से आगे बढ़ाएगा।
मित्र विभूषण के जरिए श्रीलंका का भरोसा, चीन के लिए सख्त संदेश
मोदी को श्रीलंका के ‘मित्र विभूषण’ से सम्मानित किया जाना केवल सम्मान नहीं, बल्कि एक रणनीतिक बयान था। राष्ट्रपति दिसानायके ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनकी ज़मीन भारत विरोधी किसी गतिविधि के लिए इस्तेमाल नहीं होने दी जाएगी। यह बयान सीधे चीन को निशाना बनाता है, जिसने हम्बनटोटा पोर्ट और कोलंबो पोर्ट सिटी जैसे परियोजनाओं के जरिए श्रीलंका में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश की थी।
भारत की सक्रिय रणनीति: चीन की हर चाल का जवाब
2014 में चीनी पनडुब्बी की कोलंबो में एंट्री और 2022 में जासूसी जहाज़ युआन वांग 5 की मौजूदगी ने भारत की चिंता बढ़ा दी थी। अब प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा इन घटनाओं का कूटनीतिक उत्तर बनकर सामने आई है। भारत अब केवल विरोध दर्ज नहीं कर रहा, बल्कि साझेदार देशों के साथ मजबूत रिश्ते बनाकर चीन की हर हरकत का जवाब उसी की भाषा में दे रहा है।
‘पड़ोसी पहले’ से ‘प्रो-एक्टिव’ कूटनीति की ओर भारत
भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति अब ‘प्रो-एक्टिव स्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट’ में तब्दील हो चुकी है। श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने में भारत की मदद, बिजली, रेलवे और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं में निवेश और आपदा के समय मानवीय सहायता — ये सब भारत के भरोसेमंद साझेदार होने के प्रमाण हैं।
दक्षिण एशिया की कूटनीति में भारत की निर्णायक वापसी
इस यात्रा ने साफ कर दिया है कि दक्षिण एशिया में अब चीन की एकतरफा दबंगई नहीं चलेगी। भारत शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली ढंग से अपने हितों की रक्षा करेगा, और मित्र देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करेगा। श्रीलंका की ओर से मिले समर्थन से यह भी तय हो गया है कि क्षेत्रीय राजनीति में भारत की निर्णायक भूमिका अब और गहरी होगी।

VIKAS TRIPATHI
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