“स्थानीय लोगों का आरोप—शिकायतों और पत्राचार के बाद भी हालात जस के तस; ₹5 लाख मासिक कथित वसूली की निष्पक्ष जांच की मांग”
पर्दाफाश न्यूज़
नोएडा। नोएडा की सुनियोजित सड़कों और सेक्टरों के बीच सेक्टर-76 से सेक्टर-101 मेट्रो स्टेशन तक फुटपाथ और सड़क किनारे अतिक्रमण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर ‘नो-वेंडिंग’ के बोर्ड लगे होने के बावजूद फुटपाथ और सार्वजनिक रास्तों पर ठेले, सब्जी स्टॉल, कार वॉश, ऑटो और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। लोगों का कहना है कि इस संबंध में शिकायतें और पत्राचार किए जाने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है। ऐसे में अब सवाल केवल अतिक्रमण का नहीं, बल्कि नियमों के पालन, निगरानी और प्रशासनिक कार्रवाई का भी है।
नो-वेंडिंग बोर्ड के बावजूद जमीन पर अलग तस्वीर क्यों?
सेक्टर-78 को लेकर 26 सितंबर 2026 की द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में भी नो-वेंडिंग जोन के बावजूद फुटपाथों पर अतिक्रमण और साप्ताहिक बाजार की समस्या का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, वेद वन पार्क के सामने नो-वेंडिंग जोन करीब पांच वर्ष पहले स्थापित किए गए थे, लेकिन स्थानीय निवासियों ने फुटपाथ के बड़े हिस्से पर विक्रेताओं के कब्जे की शिकायत की।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बुधवार को लगने वाले साप्ताहिक बाजार के कारण विंडसर कोर्ट, हाइड पार्क तथा एंट्रिक्श गोल्फ व्यू-1 और 2 जैसी सोसायटियों के आसपास आवाजाही प्रभावित होती है। स्थानीय निवासी विनीत तिवारी व कुछ अन्य लोगों ने नाम ना उजागर हो कि शर्तों के हवाले से कहा कि कई ठेले फुटपाथ से आगे मुख्य सड़क तक पहुंच जाते हैं।
स्थानीय लोगों ने अब सेक्टर-76 से सेक्टर-101 मेट्रो स्टेशन तक के हिस्से को लेकर भी इसी तरह के सवाल उठाए हैं।

फुटपाथ जनता के लिए या कारोबार के लिए?
फुटपाथ का उद्देश्य पैदल चलने वालों को सुरक्षित और सुगम रास्ता उपलब्ध कराना है। जब फुटपाथ पर दुकान, ठेला, वाहन या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां फैल जाती हैं तो पैदल यात्रियों को सड़क की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। मेट्रो स्टेशन के आसपास यह स्थिति सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
ऐसे में सवाल किसी एक विक्रेता को हटाने का नहीं, बल्कि यह स्पष्ट करने का है कि सार्वजनिक स्थान का इस्तेमाल किस नियम के तहत और कितनी सीमा तक किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का दावा—₹5 लाख प्रतिमाह की कथित वसूली
इस मामले में स्थानीय लोगों की ओर से एक और गंभीर आरोप लगाया गया है। उनका दावा है कि सेक्टर-76 से सेक्टर-101 के आसपास कथित अनधिकृत गतिविधियों से करीब पांच लाख रुपये प्रतिमाह की रकम पैदा हो रही है। आरोप यह भी है कि यह रकम सरकारी राजस्व के रूप में प्राधिकरण के खाते में जाने के बजाय कथित तौर पर कुछ अधिकारियों तक पहुंचती है।
हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसे प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। यही वजह है कि मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। यदि ₹5 लाख प्रतिमाह का दावा गलत है तो संबंधित विभाग सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट कर सकता है। वहीं, यदि किसी प्रकार की अवैध वसूली या नियमविरुद्ध आर्थिक लेन-देन के प्रमाण मिलते हैं तो उसके स्रोत और जिम्मेदारी की जांच जरूरी होगी।

“पर्दाफाश न्यूज़” के हाथ लगा महत्वपूर्ण पत्र,18 सितंबर को कार्रवाई थी निर्धारित
“पर्दाफाश न्यूज़” के हाथ लगे नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी के एक महत्वपूर्ण पत्र ने इस पूरे मामले को नया संदर्भ दिया है। पत्र में सेक्टर-78 में सिंचाई नाले के समानांतर हाईटेंशन लाइन के नीचे किए गए अवैध/अनाधिकृत निर्माण के ध्वस्तीकरण के संबंध में कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। पत्र के अनुसार, इस कार्रवाई के लिए 18 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे का समय निर्धारित किया गया था।
पत्र में संबंधित अधिकारियों और प्रवर्तन दल को निर्धारित तिथि एवं समय पर मौके पर उपस्थित रहकर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही अभियान को शांतिपूर्ण एवं प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराने को कहा गया था।
पत्र में पुलिस अधिकारियों, तहसील प्रशासन, वर्क सर्किल तथा नोएडा प्राधिकरण के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच समन्वय बनाकर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कार्रवाई की तारीख और समय निर्धारित था तथा संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश भी दिए जा चुके थे, तो आखिर निर्धारित कार्रवाई हुई या नहीं? यदि कार्रवाई नहीं हुई तो उसे किस कारण से रोका या टाला गया?
और यदि कार्रवाई रोकी गई थी, तो किस स्तर पर निर्णय लिया गया और उसका लिखित आधार क्या था? इन सवालों का स्पष्ट जवाब अभी सामने आना बाकी है।
अगर ₹5 लाख की बात है तो रिकॉर्ड में होना चाहिए हिसाब
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कुछ बिंदुओं पर सरकारी रिकॉर्ड खंगालना जरूरी है—
- संबंधित स्थानों पर कितने वेंडिंग लाइसेंस जारी किए गए?
- किन लोगों या एजेंसियों को अनुमति दी गई?
- अनुमति की अवधि क्या है?
- निर्धारित शुल्क कितना है?
- अब तक कितना शुल्क सरकारी खाते में जमा हुआ?
- किसके नाम से रसीदें जारी हुईं?
- क्या कोई निजी व्यक्ति या संस्था वसूली कर रही है?
- यदि वसूली हो रही है तो उसका कानूनी आधार क्या है?
- पिछले एक वर्ष में कितने निरीक्षण हुए?
- कितने चालान काटे गए?
- कितने अतिक्रमण हटाए गए?
- कार्रवाई के बाद वही गतिविधियां दोबारा कैसे शुरू हुईं?
इन सवालों का जवाब मौखिक दावों से नहीं बल्कि सरकारी रिकॉर्ड से मिलना चाहिए।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई कहां अटकी?
स्थानीय लोगों के अनुसार इस मामले को लेकर नोएडा प्राधिकरण और सरकार के संबंधित अधिकारियों तक ट्वीट और पत्राचार के माध्यम से शिकायतें भी पहुंचाई जा चुकी हैं। ऐसे में अब सवाल है कि इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई।
क्या मौके का निरीक्षण कराया गया?
क्या निरीक्षण रिपोर्ट तैयार हुई?
क्या संबंधित लोगों से अनुमति के दस्तावेज मांगे गए?
क्या अतिक्रमण हटाया गया?
यदि हटाया गया तो दोबारा उसी स्थान पर गतिविधियां कैसे शुरू हुईं?
और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो उसकी वजह क्या थी?
इन सवालों के जवाब से ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत से लेकर कार्रवाई तक की प्रशासनिक प्रक्रिया कहां जाकर रुकी।
प्राधिकरण का पक्ष भी महत्वपूर्ण
नोएडा प्राधिकरण अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि 7x सेक्टरों में अतिक्रमण हटाने के लिए समय-समय पर ध्वस्तीकरण अभियान चलाए जाते हैं। प्राधिकरण का यह पक्ष रिकॉर्ड पर है।
लेकिन इसके साथ स्थानीय लोगों का सवाल भी है कि यदि नियमित रूप से अभियान चलाए जाते हैं तो अतिक्रमण दोबारा क्यों दिखाई देता है?
स्थायी समाधान के लिए अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ लगातार निगरानी की व्यवस्था भी जरूरी है। केवल अभियान चलाना पर्याप्त नहीं, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि कार्रवाई के बाद संबंधित स्थान दोबारा अतिक्रमण की चपेट में न आए।

साप्ताहिक बाजार में रोजगार और व्यवस्था के बीच संतुलन जरूरी
साप्ताहिक बाजार छोटे कारोबारियों और विक्रेताओं की आजीविका से जुड़ा विषय है। इसलिए समाधान केवल हटाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। दूसरी ओर, आसपास रहने वाले लोगों की आवाजाही, पार्किंग और सार्वजनिक रास्तों की सुविधा को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यदि किसी स्थान पर बाजार की अनुमति है तो उसके लिए निर्धारित स्थान, समय, पार्किंग और पैदल आवागमन की व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए। वहीं, यदि कोई क्षेत्र आधिकारिक रूप से नो-वेंडिंग घोषित है तो वहां नियमों का समान रूप से पालन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
मेट्रो स्टेशन के आसपास अतिक्रमण का सवाल और गंभीर
सेक्टर-76 से सेक्टर-101 तक का क्षेत्र मेट्रो कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। मेट्रो स्टेशन के आसपास पैदल यात्रियों की आवाजाही अधिक होने के कारण फुटपाथ का साफ और सुगम रहना जरूरी है।
फुटपाथ पर अतिक्रमण होने से यह केवल शहर की सुंदरता या अव्यवस्था का मुद्दा नहीं रहता, बल्कि पैदल आवागमन और सड़क सुरक्षा से भी जुड़ जाता है। इसलिए प्राधिकरण को स्पष्ट करना चाहिए कि इस क्षेत्र में नो-वेंडिंग और वेंडिंग जोन की आधिकारिक सीमाएं क्या हैं और उनके प्रवर्तन की जिम्मेदारी किस विभाग की है।
पार्किंग और सार्वजनिक आयोजनों की व्यवस्था पर भी सवाल
सेक्टर-78 की रिपोर्ट में सम्राट मिहिर भोज पार्क की पार्किंग में वार्षिक रामलीला मेले के दौरान नियमित आगंतुकों को होने वाली परेशानी का भी उल्लेख किया गया है। स्थानीय निवासी आदित्य के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि मेला पार्क के प्रवेश द्वार तक फैल गया था, जिससे सुबह आने वाले लोगों को पार्किंग और प्रवेश को लेकर परेशानी हुई।
ऐसे आयोजनों के लिए पहले से वैकल्पिक पार्किंग, प्रवेश और निकास की व्यवस्था करना नागरिक सुविधा और आयोजन—दोनों के बीच संतुलन बनाने का एक तरीका हो सकता है।
पर्दाफाश न्यूज़ के 12 सीधे सवाल
1. सेक्टर-76 से सेक्टर-101 तक नो-वेंडिंग क्षेत्र की आधिकारिक सीमा क्या है?
2. इस क्षेत्र में कितने वैध वेंडिंग लाइसेंस जारी किए गए हैं?
3. कितने विक्रेताओं की अनुमति समाप्त हो चुकी है?
4. पिछले एक वर्ष में कितने निरीक्षण हुए?
5. कितने चालान काटे गए?
6. कितने अतिक्रमण हटाए गए?
7. हटाए गए अतिक्रमण दोबारा कैसे दिखाई दिए?
8. ₹5 लाख प्रतिमाह कथित वसूली के आरोप की कोई जांच हुई है या नहीं?
9. यदि कोई रकम वसूली जा रही है तो वह किस खाते में जमा हो रही है?
10. स्थानीय लोगों की शिकायतों और पत्राचार पर क्या कार्रवाई हुई?
11. 18 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे निर्धारित ध्वस्तीकरण कार्रवाई का क्या परिणाम रहा?
12. यदि निर्धारित कार्रवाई नहीं हुई तो उसे रोकने या टालने का निर्णय किस स्तर पर और किस आधार पर लिया गया?

अब बोर्ड नहीं, जमीन पर जवाब चाहिए
नोएडा को व्यवस्थित और आधुनिक शहर बनाने के लिए केवल सड़कों और इमारतों का विकास पर्याप्त नहीं है। फुटपाथ, सार्वजनिक रास्ते, वेंडिंग जोन और अतिक्रमण नियंत्रण की व्यवस्था भी पारदर्शी और प्रभावी होनी चाहिए।
छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों की आजीविका का सम्मान जरूरी है, लेकिन साथ ही सार्वजनिक स्थानों और नागरिक सुविधाओं की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
यदि वेंडिंग वैध है तो उसे निर्धारित स्थान पर व्यवस्थित किया जाए। यदि कोई निर्माण या अतिक्रमण अवैध है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। यदि शुल्क लिया जा रहा है तो उसका हिसाब सरकारी रिकॉर्ड में स्पष्ट होना चाहिए। और यदि अवैध वसूली या किसी प्रभाव के कारण कार्रवाई रुकने जैसे आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पर्दाफाश न्यूज़ किसी व्यक्ति को बिना प्रमाण दोषी ठहराने के पक्ष में नहीं है। लेकिन गंभीर सार्वजनिक शिकायतों और सामने आए सरकारी पत्र को नजरअंदाज करना भी उचित नहीं होगा।
अब जरूरत इस बात की है कि नोएडा प्राधिकरण स्पष्ट करे—
18 सितंबर को प्रस्तावित कार्रवाई का क्या हुआ?
क्या ध्वस्तीकरण अभियान चला या नहीं?
यदि नहीं चला तो क्यों?
क्या कार्रवाई रोकने का कोई लिखित आदेश जारी हुआ?
और यदि हुआ तो किस अधिकारी के स्तर से?
क्योंकि सवाल सिर्फ फुटपाथ पर खड़े एक ठेले या एक निर्माण का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है, जहां एक ओर ‘नो-वेंडिंग’ का बोर्ड लगा हो और दूसरी ओर उसी क्षेत्र में गतिविधियों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हों।
अब जनता को बोर्ड नहीं—जवाब चाहिए।
आश्वासन नहीं—रिकॉर्ड चाहिए।
और आरोप नहीं—निष्पक्ष जांच के जरिए सच चाहिए।
पर्दाफाश न्यूज़ की नजर इस पूरे मामले पर बनी रहेगी।















