Thursday, October 1, 2026
Your Dream Technologies
HomeInternationalअंतरिक्ष में बढ़ रही सैन्य हलचल, ब्रिटेन ने बनाया नया स्पेस स्क्वाड्रन;...

अंतरिक्ष में बढ़ रही सैन्य हलचल, ब्रिटेन ने बनाया नया स्पेस स्क्वाड्रन; भारत के लिए क्यों अहम है यह खबर?

नई दिल्ली: अंतरिक्ष अब सिर्फ वैज्ञानिक खोज और सैटेलाइट लॉन्चिंग तक सीमित नहीं रह गया है। दुनिया की बड़ी शक्तियां इसे अपनी सुरक्षा और सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बना रही हैं। इसी बीच ब्रिटेन ने सितंबर 2026 में नंबर-3 स्पेस इफेक्ट्स स्क्वाड्रन का गठन किया है। यह यूनिट अंतरिक्ष में विरोधी देशों की गतिविधियों को रोकने और उनकी अंतरिक्ष क्षमताओं पर प्रभाव डालने से जुड़ी भूमिका निभाएगी।

सैटेलाइट को नष्ट किए बिना भी किया जा सकता है बड़ा नुकसान

अंतरिक्ष में किसी देश की क्षमता को कमजोर करने के लिए सैटेलाइट को मिसाइल से नष्ट करना ही एकमात्र तरीका नहीं है। सिग्नल जैमिंग, साइबर अटैक, स्पूफिंग, लेजर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक तकनीकों के जरिए भी सैटेलाइट की सेवाओं को प्रभावित किया जा सकता है।

सैटेलाइट आज सेना के लिए संचार, नेविगेशन, निगरानी, मिसाइल चेतावनी और सटीक समय निर्धारण जैसे महत्वपूर्ण काम करते हैं। इसलिए किसी महत्वपूर्ण सैटेलाइट सिस्टम में बाधा आने का असर सैन्य क्षेत्र के साथ-साथ आम नागरिक जीवन पर भी पड़ सकता है।

GNSS बंद हुआ तो अर्थव्यवस्था पर भी असर

ब्रिटेन की 2026 स्पेस स्ट्रेटजी में सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम यानी GNSS को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है। इसकी सेवा बाधित होने पर टेलीकॉम, इंटरनेट, विमान, जहाज, रेल और सड़क परिवहन जैसी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

यानी अंतरिक्ष में किसी संघर्ष का असर धरती पर मौजूद सामान्य लोगों तक भी पहुंच सकता है।

ब्रिटेन ने अंतरिक्ष सुरक्षा पर बढ़ाया फोकस

नंबर-3 स्पेस इफेक्ट्स स्क्वाड्रन के अलावा ब्रिटेन के पास पहले से नंबर-1 स्पेस ऑपरेशंस स्क्वाड्रन और नंबर-2 स्पेस वार्निंग स्क्वाड्रन मौजूद हैं। ब्रिटेन भविष्य में और अंतरिक्ष इकाइयां विकसित करने की योजना पर भी काम कर रहा है।

ब्रिटेन ने 2026-27 से 2029-30 के बीच अंतरिक्ष से खुफिया जानकारी, निगरानी और सैन्य क्षमताओं से जुड़े कार्यों के लिए लगभग 88 करोड़ पाउंड के निवेश की बात कही है। हालांकि, ब्रिटेन ने यह भी कहा है कि वह सैटेलाइट को नष्ट करने वाली एंटी-सैटेलाइट मिसाइलों के परीक्षण से दूर रहेगा।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

भारत के लिए अंतरिक्ष सुरक्षा पहले से ही रणनीतिक महत्व रखती है। 2019 के मिशन शक्ति के दौरान भारत ने एंटी-सैटेलाइट मिसाइल क्षमता का प्रदर्शन किया था। इसके बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हुआ, जिन्होंने इस तरह की क्षमता प्रदर्शित की है।

लेकिन अंतरिक्ष सुरक्षा केवल दूसरे देश के सैटेलाइट को निशाना बनाने तक सीमित नहीं है। अपने सैटेलाइट नेटवर्क को सुरक्षित रखना, अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं पर नजर रखना और संभावित खतरों की समय रहते पहचान करना भी महत्वपूर्ण है।

इसी दिशा में इसरो का NETRA (Network for Space Objects Tracking and Analysis) कार्यक्रम काम कर रहा है। इसके तहत रडार, ऑप्टिकल टेलीस्कोप और अन्य तकनीकों की मदद से अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं की निगरानी और ट्रैकिंग की क्षमता विकसित की जा रही है।

NavIC भी भारत की रणनीतिक क्षमता का हिस्सा

भारत का अपना सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम NavIC भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसका इस्तेमाल नेविगेशन और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए किया जाता है और इसके तहत रणनीतिक उपयोग के लिए प्रतिबंधित सेवा भी उपलब्ध है।

ऐसे में सैटेलाइट आधारित सेवाओं पर किसी भी तरह का जैमिंग, साइबर हमला या स्पूफिंग भारत की संचार, नेविगेशन और सुरक्षा प्रणालियों के लिए चुनौती बन सकता है।

अंतरिक्ष युद्ध का असर सिर्फ सेना तक सीमित नहीं

अगर भविष्य में किसी बड़े संघर्ष के दौरान सैटेलाइट सेवाएं गंभीर रूप से बाधित होती हैं, तो इसका असर बैंकिंग, मोबाइल नेटवर्क, मौसम की निगरानी, विमानन, समुद्री परिवहन, बिजली, संचार और रक्षा सेवाओं तक पहुंच सकता है।

इसलिए आने वाले समय में अंतरिक्ष सुरक्षा का मतलब केवल एंटी-सैटेलाइट हथियार विकसित करना नहीं, बल्कि अपने सैटेलाइट नेटवर्क को जैमिंग, साइबर हमले, स्पूफिंग और अन्य खतरों से सुरक्षित और मजबूत बनाना भी होगा।

अंतरराष्ट्रीय नियम भी लागू

अंतरिक्ष में सैन्य गतिविधियों के बावजूद वहां अंतरराष्ट्रीय नियम लागू होते हैं। Outer Space Treaty अंतरिक्ष में परमाणु हथियार और अन्य सामूहिक विनाश के हथियार रखने पर रोक लगाती है तथा अंतरिक्ष के इस्तेमाल को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप रखने की बात करती है।

ब्रिटेन का नया स्पेस स्क्वाड्रन इस बात का संकेत है कि दुनिया के कई देश अब अंतरिक्ष को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहे हैं। भारत के लिए भी बदलते इस माहौल में अपने सैटेलाइट और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं की सुरक्षा मजबूत करना अहम होगा।

- Advertisement -
Your Dream Technologies
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Call Now Button