बगदाद: अमेरिका ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को इराक से अपनी सैन्य वापसी पूरी कर ली। इसके साथ ही इराक में अमेरिकी नेतृत्व वाले Operation Inherent Resolve का मिशन समाप्त हो गया। यह अभियान 2014 में ISIS के खिलाफ शुरू किया गया था। अमेरिकी सेना और उसके सहयोगी अब इराक से बाहर हैं, जबकि ISIS के खिलाफ क्षेत्रीय अभियान का मुख्यालय जॉर्डन में रहेगा।
23 साल बाद अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का एक बड़ा अध्याय खत्म
इराक में अमेरिकी सैन्य कहानी 2003 के अमेरिकी नेतृत्व वाले आक्रमण से शुरू हुई थी, जिसने सद्दाम हुसैन की सरकार को सत्ता से हटा दिया। 2011 में अमेरिकी लड़ाकू सैनिकों की वापसी हुई, लेकिन 2014 में ISIS के तेजी से उभार के बाद अमेरिकी सेना दोबारा इराक लौटी।
अब 30 सितंबर 2026 की वापसी 2024 में अमेरिका और इराक के बीच हुए समझौते के तहत हुई है। अंतिम चरण में इराक के कुर्द क्षेत्र स्थित एरबिल एयर बेस से अमेरिकी सैनिकों और सैन्य उपकरणों की वापसी पूरी की गई।
क्या इराक पूरी तरह अमेरिकी सुरक्षा छतरी से बाहर हो गया?
सैन्य मिशन समाप्त होने का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका और इराक के संबंध खत्म हो गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार अब दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रक्षा संबंध के नए ढांचे पर जोर रहेगा। वहीं, ISIS के खिलाफ अमेरिकी अभियान का क्षेत्रीय हिस्सा जॉर्डन से जारी रहेगा।
सबसे बड़ी चुनौती—ईरान समर्थित मिलिशिया
अमेरिकी वापसी के बाद इराक के सामने एक अहम सवाल ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के प्रभाव का है। कुछ विश्लेषकों ने आशंका जताई है कि अमेरिकी सैन्य मौजूदगी खत्म होने से इन समूहों के लिए इराक की सुरक्षा और राजनीति में प्रभाव बढ़ाने की गुंजाइश बन सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इराकी सरकार की सुरक्षा नीति और हथियारों पर राज्य के नियंत्रण को लागू करने की क्षमता पर निर्भर करेगा।
ISIS का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं
अमेरिका के अनुसार ISIS को इराक में एक संगठित सैन्य ताकत के रूप में पराजित किया जा चुका है। लेकिन संगठन के बचे हुए नेटवर्क और स्लीपर सेल को लेकर सुरक्षा चिंताएं बनी हुई हैं। अब इराकी सुरक्षा बलों को आतंकवाद विरोधी अभियानों में ज्यादा जिम्मेदारी खुद संभालनी होगी।
एयर डिफेंस भी बड़ी चुनौती
अमेरिकी वापसी के साथ इराक के कुर्द क्षेत्र में मौजूद कुछ अमेरिकी एयर-डिफेंस क्षमताएं भी हटाई गई हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे मिसाइल और ड्रोन हमलों के खिलाफ सुरक्षा में अंतर पैदा हो सकता है। दूसरी ओर, इराक ने अपनी एयर-डिफेंस क्षमता को मजबूत करने के लिए नए सिस्टम हासिल करने की प्रक्रिया तेज की है।
क्या बदलेगा मिडिल ईस्ट का शक्ति-संतुलन?
अमेरिका की इराक से सैन्य वापसी मध्य-पूर्व में अमेरिकी प्रत्यक्ष सैन्य मौजूदगी के स्वरूप में बड़ा बदलाव है। इससे इराक को अपनी सुरक्षा व्यवस्था में अधिक जिम्मेदारी निभानी होगी। साथ ही ईरान समर्थित समूहों, ISIS के बचे नेटवर्क और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर भी नजर रहेगी।
हालांकि, अमेरिका की वापसी को सीधे तौर पर किसी एक देश के बढ़ते प्रभुत्व का प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी। आने वाले समय में इराक की घरेलू सुरक्षा नीति, ईरान के साथ उसके संबंध और अमेरिका-इराक के नए रक्षा सहयोग से तस्वीर ज्यादा स्पष्ट होगी।















