100% टैरिफ के बीच भारत की चुनिंदा Specialty Medicines को राहत, Generic दवाओं पर भी Section 232 शुल्क लागू नहीं
नई दिल्ली: अमेरिका ने भारत समेत 20 देशों से आयात होने वाली कुछ विशेष फार्मास्यूटिकल दवाओं और उनसे जुड़े जरूरी ingredients पर शून्य प्रतिशत (0%) एड वैलोरम टैरिफ की व्यवस्था की है। यह राहत ऐसे समय में मिली है जब अमेरिका 29 सितंबर 2026 से कुछ पेटेंटेड फार्मास्यूटिकल उत्पादों और उनसे जुड़े ingredients पर 100% तक टैरिफ लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।
हालांकि, यह फैसला भारत से अमेरिका जाने वाली सभी दवाओं को टैरिफ से मुक्त नहीं करता। शून्य टैरिफ का लाभ केवल अधिसूचना में निर्धारित विशेष दवा श्रेणियों और पात्र उत्पादों को मिलेगा।
किन दवाओं को मिलेगी 0% टैरिफ की सुविधा?
अमेरिकी व्यवस्था के तहत शून्य टैरिफ वाली श्रेणियों में ऐसी दवाएं और उनके संबंधित ingredients शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल गंभीर और दुर्लभ बीमारियों के इलाज में किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
– Rare Disease / Orphan Drugs
– Fertility Treatments
– Nuclear Medicines
– Plasma-derived Therapies
– Cell Therapies
– Gene Therapies
– Antibody-Drug Conjugates (ADCs)
– कुछ Specialty Pharmaceutical Products
– कुछ Animal Health Pharmaceuticals
इन दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले संबंधित ingredients को भी निर्धारित शर्तों के तहत इस व्यवस्था का लाभ मिल सकता है।
भारत समेत 20 देश और क्षेत्र सूची में
अमेरिकी Commerce Department की सूची में भारत के अलावा अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, यूरोपीय संघ, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम शामिल हैं।
इस व्यवस्था के तहत पात्र उत्पादों को 0% टैरिफ मिल सकता है, बशर्ते वे निर्धारित शर्तों और संबंधित उत्पाद श्रेणी में आते हों।
100% टैरिफ का क्या है मामला?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 2 अप्रैल की घोषणा के बाद Section 232 के तहत कुछ पेटेंटेड फार्मास्यूटिकल उत्पादों, बायोलॉजिक्स और संबंधित ingredients पर 100% एड वैलोरम टैरिफ का प्रावधान किया गया था। कुछ कंपनियों के लिए यह व्यवस्था 31 जुलाई से लागू हुई, जबकि अन्य कवर की गई कंपनियों पर इसका विस्तार 29 सितंबर से होना था।
लेकिन नई व्यवस्था में निर्धारित विशेष दवाओं के लिए पात्र देशों से आने वाले उत्पादों को 0% टैरिफ का रास्ता दिया गया है।
Generic दवाओं के लिए क्या बदला?
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि Generic pharmaceutical products और उनके संबंधित ingredients इस Section 232 pharmaceutical tariff के दायरे में नहीं आते। इसलिए भारत की बड़ी मात्रा में होने वाली generic drug exports के संदर्भ में 100% टैरिफ को लेकर अलग स्थिति है।
यानी भारत के लिए राहत केवल नई specialty-drug exemption तक सीमित नहीं है; generic medicines पर भी इस विशेष Section 232 शुल्क व्यवस्था का वही असर नहीं है जो कुछ patented pharmaceutical products पर है।
भारत के फार्मा सेक्टर के लिए क्यों अहम है फैसला?
अमेरिका भारतीय फार्मास्यूटिकल कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है। ऐसे में अमेरिकी टैरिफ नीति में बदलाव का भारतीय दवा निर्यातकों पर सीधा असर पड़ सकता है।
विशेष रूप से rare-disease medicines, advanced therapies और अन्य specialty products के लिए 0% टैरिफ की सुविधा से उन उत्पादों के अमेरिकी बाजार में प्रवेश पर संभावित शुल्क दबाव कम हो सकता है। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि किसी विशेष उत्पाद की श्रेणी, origin और अन्य पात्रता शर्तें क्या हैं।
20 देशों को राहत, लेकिन शर्तों के साथ
अमेरिकी Commerce Department की व्यवस्था को व्यापक रूप से सभी फार्मास्यूटिकल उत्पादों की टैरिफ छूट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। किस दवा पर 0% शुल्क लगेगा, यह उसके प्रकार और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।
इसके अलावा, अमेरिकी प्रशासन ने कुछ ऐसे specialty medicines के लिए भी राहत का प्रावधान रखा है जिन्हें अमेरिका में किसी urgent health need को पूरा करने के लिए जरूरी माना जाता है। ऐसे मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन और समीक्षा की व्यवस्था है।
भारत के लिए बड़ी बात क्या है?
भारत को राहत मिली है, लेकिन यह blanket tariff exemption नहीं है।
यानी अमेरिका ने भारत से आने वाली हर दवा पर टैरिफ खत्म नहीं किया है। राहत मुख्य रूप से तय specialty medicines और उनके संबंधित ingredients पर है, जबकि generic medicines पहले से ही इस खास Section 232 tariff regime से बाहर हैं।
अमेरिका का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब Washington घरेलू pharmaceutical manufacturing को बढ़ावा देने और विदेशी दवाओं पर अपनी व्यापार नीति को कड़ा करने की दिशा में कदम उठा रहा है। भारत के लिए अब अहम यह होगा कि इस नई व्यवस्था का वास्तविक असर उसके specialty pharmaceutical exports पर कितना पड़ता है।















