Monday, September 21, 2026
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इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ के बाद सियासी संग्राम, मोदी की मिमिक्री पर घमासान

“राहुल गांधी के कार्यक्रम में कॉमेडियन ने की पीएम मोदी की नकल, बीजेपी ने साधा निशाना; कांग्रेस ने युवाओं की आवाज और छात्र मुद्दों को बताया केंद्र”

इंदौर/नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद देश की सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री किए जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस आमने-सामने हैं। एक ओर बीजेपी ने इसे प्रधानमंत्री का अपमान बताते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है, तो दूसरी ओर कांग्रेस इस पूरे कार्यक्रम को युवाओं, शिक्षा, रोजगार और छात्रों से जुड़े सवालों को सामने लाने का मंच बता रही है।

19 सितंबर को इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि ने पीएम मोदी की शैली की नकल करते हुए राहुल गांधी के साथ मंच साझा किया। कार्यक्रम का वीडियो कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया पर भी साझा किया गया, जिसके बाद यह मामला तेजी से राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया।

मिमिक्री पर बीजेपी का पलटवार

मिमिक्री का वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। बीजेपी की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का इस तरह मजाक उड़ाना उचित नहीं है। पार्टी नेताओं ने राहुल गांधी से इस मामले में माफी की मांग भी की।

बीजेपी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन प्रधानमंत्री के सार्वजनिक व्यवहार और व्यक्तिगत प्रसंगों की नकल को राजनीतिक मंच पर प्रस्तुत करना मर्यादा का सवाल खड़ा करता है। इस मुद्दे ने देखते ही देखते कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और किरेन रिजिजू समेत बीजेपी के कई नेताओं ने भी इस मामले पर राहुल गांधी और कांग्रेस को घेरा। बीजेपी की प्रतिक्रिया में कार्यक्रम की राजनीतिक शैली और मंच पर प्रस्तुत किए गए हास्य को लेकर सवाल उठाए गए।

फडणवीस बोले- राजनीति छोड़ स्टैंड-अप कॉमेडियन बन जाएं राहुल

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस विवाद पर राहुल गांधी पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जिस तरह राहुल गांधी मिमिक्री कर रहे हैं, उन्हें राजनीति छोड़कर स्टैंड-अप कॉमेडियन बन जाना चाहिए। फडणवीस ने यह टिप्पणी 20 सितंबर को पत्रकारों के सवालों के जवाब में की।

फडणवीस ने राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका पर भी कटाक्ष किया और कहा कि अगर वह हास्य के क्षेत्र में जाते हैं तो उन्हें वहां काम मिल सकता है। उनके इस बयान के बाद विवाद और तीखा हो गया।

कांग्रेस ने युवाओं के मुद्दों को बनाया केंद्र

कांग्रेस की ओर से इस विवाद के समानांतर ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के मूल उद्देश्य को सामने रखा जा रहा है। पार्टी के मुताबिक कार्यक्रम में छात्रों और युवाओं से शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक और भविष्य से जुड़े सवालों पर संवाद किया गया।

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि छात्रों के सवाल पूछने की क्षमता ही व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।

कांग्रेस के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाना और उनकी समस्याओं को सार्वजनिक मंच देना था। इसी वजह से पार्टी नेताओं ने मिमिक्री विवाद के बजाय कार्यक्रम में उठाए गए छात्र मुद्दों को प्रमुखता देने की कोशिश की है।

शशि थरूर बोले- नई पीढ़ी अपनी आवाज और नेता तलाश रही

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि “यह ऐसा जोश है, जो देशों को आगे बढ़ाता है। एक ऐसी पीढ़ी जो अपनी आवाज और अपना नेता ढूंढ रही है।” थरूर की यह टिप्पणी कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी और उत्साह को रेखांकित करती है।

थरूर की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कार्यक्रम का राजनीतिक संदेश और मंच पर हुई मिमिक्री दोनों राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।

गहलोत का दावा- बीजेपी से निराश है युवा वर्ग

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इंदौर के कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस के पक्ष में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश का युवा वर्ग बीजेपी से निराश है और राहुल गांधी से उम्मीद लगाए हुए है।

गहलोत ने कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे विद्यार्थियों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं ने जिस उत्साह के साथ अपनी समस्याएं रखीं, उससे उनकी अपेक्षाओं का पता चलता है। उनके मुताबिक रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों पर युवा समाधान चाहते हैं।

गहलोत का यह बयान भी सीधे तौर पर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है, क्योंकि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही युवा मतदाताओं और छात्रों के मुद्दों को लेकर अपना-अपना राजनीतिक नैरेटिव सामने रख रहे हैं।

मोहन चरण माझी ने उठाया राहुल के ‘संस्कार’ का सवाल

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी प्रधानमंत्री मोदी की कथित मिमिक्री को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने राजनीतिक विरोध में बुनियादी शिष्टाचार और मर्यादा के महत्व की बात कही।

बीजेपी के कई नेताओं ने इसी आधार पर सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री के पद की गरिमा और व्यक्तिगत प्रसंगों को राजनीतिक हास्य का हिस्सा बनाया जाना कहां तक उचित है। दूसरी तरफ कांग्रेस समर्थक नेताओं ने इस तरह के राजनीतिक व्यंग्य को लोकतांत्रिक राजनीतिक संवाद के दायरे में बताया है।

‘मिमिक्री’ से आगे छात्र मुद्दों की राजनीति

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का विवाद केवल मिमिक्री तक सीमित नहीं है। इसके पीछे शिक्षा, रोजगार और युवाओं के राजनीतिक जुड़ाव की बड़ी बहस भी दिखाई दे रही है।

राहुल गांधी ने कार्यक्रम में छात्रों से संवाद करते हुए शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। कांग्रेस इसे युवाओं की आवाज से जोड़ रही है, जबकि बीजेपी कार्यक्रम के मंच और राजनीतिक संदेश को लेकर सवाल उठा रही है।

कार्यक्रम के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस ने इसे राज्य के अन्य जिलों तक ले जाने की योजना भी जाहिर की है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी ‘छात्रों की गूंज’ को केवल एक कार्यक्रम के बजाय व्यापक युवा संपर्क अभियान के रूप में आगे बढ़ाना चाहती है।

सियासी वार-पलटवार ने बढ़ाई गर्मी

इंदौर के मंच से शुरू हुआ यह विवाद अब बीजेपी बनाम कांग्रेस की व्यापक राजनीतिक बहस में बदल गया है। बीजेपी के लिए प्रधानमंत्री की मिमिक्री और मंच की मर्यादा मुख्य मुद्दा है, जबकि कांग्रेस के लिए छात्रों की समस्याएं, शिक्षा और रोजगार कार्यक्रम का केंद्रीय विषय हैं।

एक ही कार्यक्रम को लेकर दोनों दलों की राजनीतिक व्याख्या अलग-अलग है। बीजेपी जहां मिमिक्री को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं कांग्रेस युवाओं की भागीदारी और उनके मुद्दों को चर्चा के केंद्र में रख रही है।

ऐसे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम ने इंदौर से निकलकर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है। प्रधानमंत्री मोदी की मिमिक्री पर जारी बयानबाजी के बीच अब निगाह इस बात पर है कि कांग्रेस इस छात्र संवाद अभियान को किस तरह आगे बढ़ाती है और बीजेपी इस मुद्दे को राजनीतिक स्तर पर कितना प्रमुख बनाती है।

 

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VIKAS TRIPATHI
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