Thursday, July 2, 2026
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होर्मुज के बाद अब पनामा कैनाल पर ट्रंप का निशाना, चीन को दी खुली चेतावनी

ईरान के साथ तनाव के बीच पनामा कैनाल पर ट्रंप का बड़ा बयान

अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को लेकर जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब दुनिया के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग पनामा कैनाल (Panama Canal) को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि अमेरिका ने पनामा कैनाल का नियंत्रण पनामा को सौंपकर ऐतिहासिक गलती की थी। उन्होंने दावा किया कि इस फैसले का सबसे ज्यादा फायदा पनामा और अप्रत्यक्ष रूप से चीन को मिला है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर चीन को इस रणनीतिक जलमार्ग पर प्रभाव बढ़ाने नहीं देगा।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बना हुआ है और वैश्विक व्यापार पहले से ही अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में पनामा कैनाल का मुद्दा उठाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों पर अपनी पकड़ मजबूत रखना चाहता है।

क्या बोले ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को नॉर्थ डकोटा के मेडोरा शहर में थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन समारोह में पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने अपने संबोधन में पनामा कैनाल का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि “अमेरिका को कभी भी इस नहर का नियंत्रण पनामा को नहीं देना चाहिए था। ट्रंप के मुताबिक, जैसे ही पनामा को कैनाल का नियंत्रण मिला, उसने जहाजों से वसूले जाने वाले ट्रांजिट शुल्क में लगातार कई बार बढ़ोतरी कर दी।

ट्रंप ने कहा कि पहले शुल्क चार गुना बढ़ाया गया, लेकिन जहाजों की संख्या में कोई कमी नहीं आई। इसके बाद दो बार और शुल्क बढ़ाया गया और तब भी जहाजों का आवागमन जारी रहा। उनके अनुसार पनामा ने इस रणनीतिक जलमार्ग से वर्षों तक भारी मुनाफा कमाया और अमेरिका सिर्फ देखता रह गया।

चीन पर साधा निशाना

अपने भाषण में ट्रंप ने चीन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बीजिंग लंबे समय से पनामा कैनाल क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिका ऐसा नहीं होने देगा।

हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि चीन किस तरह इस जलमार्ग पर नियंत्रण स्थापित करना चाहता है, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।

ट्रंप का कहना था कि पनामा कैनाल सिर्फ एक नहर नहीं बल्कि वैश्विक व्यापार की धुरी है। इसलिए अमेरिका इसे चीन के प्रभाव में नहीं जाने देगा।

पनामा कैनाल का इतिहास

पनामा कैनाल दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण मानव निर्मित नहरों में से एक है।

इसका निर्माण अमेरिका ने 1904 में शुरू किया था और 1914 में यह पूरी तरह तैयार हुई। इसके बनने से पहले अटलांटिक महासागर से प्रशांत महासागर जाने वाले जहाजों को दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी छोर केप हॉर्न या मैगलन जलडमरूमध्य का लंबा और जोखिम भरा रास्ता तय करना पड़ता था।

पनामा कैनाल बनने के बाद समुद्री यात्रा हजारों किलोमीटर छोटी हो गई। इससे समय, ईंधन और लागत तीनों में भारी कमी आई।

अमेरिका ने पनामा को क्यों सौंपा नियंत्रण?

1977 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर और पनामा के नेता उमर टोरिजोस के बीच टोरिजोस-कार्टर संधि हुई थी। इस समझौते के तहत तय किया गया कि अमेरिका धीरे-धीरे पनामा कैनाल का नियंत्रण पनामा को सौंप देगा। 31 दिसंबर 1999 को यह प्रक्रिया पूरी हुई और इसके बाद से पनामा कैनाल अथॉरिटी इस नहर का संचालन कर रही है। ट्रंप लंबे समय से इस फैसले की आलोचना करते रहे हैं और उनका मानना है कि अमेरिका ने अपनी रणनीतिक ताकत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खो दिया।

पनामा कैनाल क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?

पनामा कैनाल केवल एक जलमार्ग नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा मानी जाती है। करीब 82 किलोमीटर लंबी यह नहर अटलांटिक महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ती है। दुनिया के लगभग 5 प्रतिशत समुद्री व्यापार का आवागमन इसी रास्ते से होता है। हर साल लगभग 14 हजार से अधिक जहाज इस नहर से गुजरते हैं। इन जहाजों के जरिए करीब 270 अरब डॉलर मूल्य का सामान दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचाया जाता है। अमेरिका के कुल कंटेनर व्यापार का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा भी इसी मार्ग से होकर गुजरता है।

कितना बचता है समय और दूरी?

पनामा कैनाल बनने से पहले न्यूयॉर्क से सैन फ्रांसिस्को जाने वाले जहाजों को दक्षिण अमेरिका के पूरे महाद्वीप का चक्कर लगाना पड़ता था। इस यात्रा में लगभग 8 हजार मील अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी। अब यही यात्रा पनामा कैनाल के जरिए कहीं कम समय और कम लागत में पूरी हो जाती है। इसी वजह से यह नहर वैश्विक सप्लाई चेन की सबसे अहम कड़ियों में गिनी जाती है।

होर्मुज और पनामा कैनाल में क्या समानता है?

होर्मुज जलडमरूमध्य और पनामा कैनाल दोनों ही दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग हैं। होर्मुज से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति होती है, जबकि पनामा कैनाल वैश्विक कंटेनर और मालवाहक जहाजों के लिए सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। यदि इन दोनों में से किसी भी मार्ग पर संकट पैदा होता है तो पूरी दुनिया में व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग लागत प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि अमेरिका दोनों क्षेत्रों को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों से जोड़कर देखता है।

क्या है चीन की भूमिका?

पिछले कुछ वर्षों में चीन ने लैटिन अमेरिका और मध्य अमेरिका में अपने निवेश में तेजी लाई है। बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में चीनी कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी को अमेरिका रणनीतिक चुनौती के रूप में देखता है।

हालांकि पनामा कैनाल का संचालन पनामा कैनाल अथॉरिटी के पास है, लेकिन ट्रंप और उनके समर्थकों का मानना है कि चीन का आर्थिक प्रभाव भविष्य में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को जन्म दे सकता है।

वैश्विक व्यापार पर क्या असर पड़ सकता है?

अगर अमेरिका और चीन के बीच पनामा कैनाल को लेकर तनाव बढ़ता है, तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। यह वैश्विक सप्लाई चेन, कंटेनर शिपिंग, बीमा लागत और समुद्री परिवहन पर भी असर डाल सकता है दूसरी ओर यदि पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव जारी रहता है, तो दुनिया को एक साथ दो महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर भू-राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप का पनामा कैनाल पर दिया गया बयान केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का संकेत भी माना जा रहा है। एक ओर अमेरिका ईरान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर टकराव की स्थिति में है, वहीं दूसरी ओर चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर पनामा कैनाल पर भी अपनी चिंता जता रहा है। वैश्विक व्यापार के लिए ये दोनों समुद्री मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इनमें किसी भी तरह की अस्थिरता का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। आने वाले समय में अमेरिका, चीन और पनामा की नीतियां यह तय करेंगी कि यह रणनीतिक प्रतिस्पर्धा किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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