Friday, May 1, 2026
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7रुपये_कम_कर_एहसान? कमर्शियल सिलेंडर ₹993 महंगा कर जनता पर महंगाई बम, अखिलेश का फूटा गुस्सा—‘सीधे 1000 बढ़ा देते!’

देश में एक बार फिर महंगाई ने ऐसा वार किया है कि होटल से लेकर ठेले तक, चाय की दुकान से लेकर ढाबे तक हर रसोई पर संकट मंडराने लगा है। 1 मई से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में एक झटके में ₹993 की रिकॉर्ड बढ़ोतरी कर दी गई है। इसके बाद दिल्ली में यह सिलेंडर ₹3,071.50 का हो गया है, जबकि मुंबई समेत कई बड़े शहरों में भी कीमत ₹3,000 के पार पहुंच गई है। यह हाल के महीनों की सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है और इसका सीधा असर बाजार की हर खाने-पीने की चीज पर पड़ना तय माना जा रहा है।

इस महंगाई बम पर समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने केंद्र सरकार पर बेहद तीखा हमला बोला। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा—“सिलेंडर महंगा नहीं होता, रोटी-थाली महंगी होती है… बढ़ाना था तो सीधे 1000 रुपये बढ़ा देते, 1000 में 7 रुपये कम करके भाजपावाले किस पर एहसान कर रहे हैं?” उन्होंने आगे बेरोजगारी, मंदी और महंगाई पर भाजपा को घेरते हुए पूछा कि सरकार जनता की तकलीफ पर निंदा प्रस्ताव कब लाएगी। अखिलेश का यह हमला ऐसे समय आया है जब बाजार में पहले से खाद्य महंगाई को लेकर बेचैनी बनी हुई है।

 महंगाई_का_मुक्का रोटी_थाली_पर_सीधा_वार

कमर्शियल सिलेंडर सस्ता ईंधन नहीं, बल्कि बाजार की रसोई की रीढ़ होता है। यही सिलेंडर होटल, रेस्टोरेंट, हलवाई, ढाबा, फास्ट फूड, ठेला, कैंटीन और छोटे कारोबारी इस्तेमाल करते हैं। अब जब एक सिलेंडर पर ₹993 का अतिरिक्त बोझ पड़ गया है, तो साफ है कि समोसे से लेकर मोमोज, चाय से लेकर छोले-भटूरे और थाली से लेकर टिफिन तक सब महंगा होने वाला है। सोशल मीडिया और ऑनलाइन चर्चाओं में भी लोगों का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है—कई यूजर्स लिख रहे हैं कि अब बाहर खाना “लक्जरी” बन जाएगा और छोटे दुकानदारों की कमर टूट जाएगी।

कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है। Indian National Congress ने एक्स पर पोस्ट कर कहा—“महंगाई मैन मोदी का चाबुक फिर चला है… सिर्फ चार महीनों में कमर्शियल सिलेंडर ₹1,518 महंगा हो चुका है, और सरकार की वसूली जारी है।” कांग्रेस ने जनवरी से मई तक बढ़ी कीमतों का हिसाब गिनाते हुए आरोप लगाया कि यह सरकार राहत नहीं, सिर्फ वसूली करना जानती है। पार्टी ने 5 किलो वाले छोटू सिलेंडर में ₹261 की बढ़ोतरी को भी गरीब और प्रवासी मजदूरों पर अतिरिक्त बोझ बताया।

चुनाव_खत्म_महंगाई_शुरू?

इस फैसले के समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कई विपक्षी नेता और सोशल मीडिया यूजर्स यह आरोप लगा रहे हैं कि चुनावी प्रक्रिया खत्म होते ही कीमतों का बड़ा झटका दे दिया गया। लोगों का कहना है कि जब तक वोटिंग थी तब तक दाम रोके गए, और मतदान खत्म होते ही महंगाई का इंजेक्शन लगा दिया गया। ऑनलाइन प्रतिक्रियाओं में यह भावना साफ दिख रही है कि अब होटल का मेन्यू, स्ट्रीट फूड और रोजमर्रा के छोटे कारोबार की दरें तेजी से ऊपर जाएंगी।

सरकार की तरफ से संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट, पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई चेन दबाव के चलते यह बढ़ोतरी की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक फरवरी के बाद यह तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है और वैश्विक गैस लागत में उछाल का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है। लेकिन विपक्ष का सवाल है—जब भी वैश्विक संकट आता है, उसकी कीमत सिर्फ भारतीय उपभोक्ता और छोटे कारोबारी ही क्यों चुकाते हैं?

जनता_पूछ_रही_है

एक झटके में ₹993 की बढ़ोतरी का मतलब सिर्फ सिलेंडर महंगा होना नहीं है—
मतलब है चाय महंगी,
नाश्ता महंगा,
होटल महंगा,
मिठाई महंगी,
और आखिर में आम आदमी की थाली महंगी।

अखिलेश यादव का “7 रुपये कम करके किस पर एहसान?” वाला तंज इसलिए वायरल हो रहा है क्योंकि जनता भी यही पूछ रही है—क्या राहत के नाम पर सिर्फ आंकड़ों का खेल खेला जा रहा है जबकि जेब पर लगातार हथौड़ा चल रहा है?

एक तरफ सरकार कह रही है घरेलू सिलेंडर नहीं बढ़ाया,
दूसरी तरफ बाजार की पूरी रसोई पर ₹993 का बम फोड़ दिया गया।

यानी असर देर-सबेर आम आदमी की जेब पर ही उतरना है।

 

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