पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच सियासी संग्राम अब साइबर क्राइम की चौखट तक पहुंच गया है। Mahua Moitra के खिलाफ दिल्ली के मंदिर मार्ग साइबर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज होने के बाद साइबर सेल की टीम मामले की तकनीकी जांच में जुट गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया पर एक कथित फर्जी AI वीडियो वायरल कर चुनावी माहौल में भ्रम फैलाने, मतदाताओं को प्रभावित करने और चुनाव आयोग द्वारा तैनात IPS अधिकारी Ajay Pal Sharma की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई।
दिल्ली पुलिस को दी गई लिखित शिकायत में दावा किया गया है कि वायरल क्लिप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के जरिए एडिट या मॉर्फ की गई हो सकती है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस वीडियो का मकसद केवल व्यक्तिगत मानहानि नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के संवेदनशील चुनावी वातावरण में अविश्वास और कन्फ्यूजन पैदा करना था। FIR दर्ज होने के बाद साइबर विशेषज्ञ वीडियो की डिजिटल फॉरेंसिक जांच, अपलोड सोर्स, मेटाडाटा और सोशल मीडिया ट्रेल खंगाल रहे हैं।
अजय पाल शर्मा को लेकर पहले से गरम था विवाद
दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दक्षिण 24 परगना के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव आयोग के पुलिस ऑब्जर्वर के तौर पर तैनात अजय पाल शर्मा का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह TMC उम्मीदवार जहांगीर खान और उनके समर्थकों को सख्त चेतावनी देते दिखाई दिए। वायरल वीडियो में शर्मा कहते सुनाई दिए कि अगर मतदाताओं को धमकाने या चुनाव में गड़बड़ी की शिकायत मिली तो “अच्छे से खबर ली जाएगी” और बाद में पछताना पड़ेगा। इस वीडियो ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया।
Fair & lovely Babua @DripsAjaypal – good to see you enjoying yourself FantaCop style. Stay Thanda Thanda Cool Cool. Bengal is always Trinamool. pic.twitter.com/CYfJ1q3pzn
— Mahua Moitra (@MahuaMoitra) April 28, 2026
इसके बाद Mahua Moitra ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अजय पाल शर्मा का एक कथित निजी वीडियो साझा कर उन पर तंज कसा। महुआ ने दावा किया कि वीडियो असली है, जबकि शिकायतकर्ता ने इसे AI आधारित फर्जी सामग्री बताया है। इसी पोस्ट के बाद दिल्ली पुलिस में शिकायत दी गई और अब मामला साइबर जांच तक पहुंच चुका है।
TMC और विपक्ष ने बनाया राजनीतिक मुद्दा
Trinamool Congress ने आरोप लगाया कि अजय पाल शर्मा चुनावी निष्पक्षता की सीमा लांघ रहे हैं और बीजेपी के पक्ष में दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं Akhilesh Yadav ने भी उन पर भाजपा का “एजेंट” होने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि बंगाल में केंद्रीय एजेंसियों और बाहरी अधिकारियों के जरिए मतदाताओं को डराने का प्रयास हो रहा है।
अब साइबर सेल के सामने तीन बड़े सवाल
इस FIR के बाद जांच एजेंसियों के सामने अब तीन अहम बिंदु हैं—
1.क्या वायरल वीडियो वास्तव में AI जनरेटेड या मॉर्फ्ड है?
2.वीडियो का मूल स्रोत क्या है और इसे सबसे पहले किसने अपलोड किया?
3.क्या इसका इस्तेमाल चुनावी नैरेटिव प्रभावित करने के लिए सुनियोजित तरीके से किया गया?
साइबर पुलिस इन सभी तकनीकी पहलुओं पर काम कर रही है। यदि वीडियो फर्जी पाया जाता है तो आईटी एक्ट, मानहानि, फेक डिजिटल कंटेंट और चुनाव प्रभावित करने से जुड़े गंभीर प्रावधान लागू हो सकते हैं।
बंगाल चुनाव में डिजिटल वार का नया अध्याय
बंगाल की लड़ाई अब सिर्फ रैलियों और आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रही, बल्कि AI वीडियो, साइबर शिकायत, वायरल क्लिप और डिजिटल प्रोपेगेंडा तक पहुंच गई है। महुआ मोइत्रा पर दर्ज FIR ने साफ कर दिया है कि इस चुनाव में सोशल मीडिया पोस्ट भी कानूनी संकट खड़ा कर सकती है। अब सबकी नजर साइबर सेल की रिपोर्ट पर टिकी है, क्योंकि यही तय करेगी कि यह महज राजनीतिक तंज था या फिर चुनावी भ्रम फैलाने की सुनियोजित डिजिटल साजिश।














