महाराष्ट्र विधान परिषद की 10 सीटों पर 12 मई को होने वाले चुनाव से पहले सत्तारूढ़ महायुति में जबरदस्त हलचल मची हुई है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव और 1 रिक्त सीट पर उपचुनाव एक साथ कराया जाएगा। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 अप्रैल है, जबकि मतदान और मतगणना 12 मई को ही होगी।
लेकिन असली सियासी घमासान चुनावी मैदान में नहीं, बल्कि BJP के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर छिड़ा हुआ है। पार्टी ने अब तक अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए हैं और सूत्रों के मुताबिक अंतिम सूची नामांकन के आखिरी दिन 30 अप्रैल को जारी की जाएगी।
BJP में दावेदारों की बाढ़, 30 नाम दिल्ली भेजे… हाईकमान ने कहा आधे करो
विधान परिषद की 6 संभावित सीटें BJP के खाते में जाती दिख रही हैं। यही वजह है कि पार्टी में दावेदारों की लंबी कतार लग गई है। पूर्व विधायक, चुनाव हारे दिग्गज, संगठन के पुराने पदाधिकारी, प्रवक्ता, क्षेत्रीय नेता—हर कोई विधान परिषद के जरिए राजनीतिक पुनर्वास चाहता है।
सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र BJP ने शुरुआती दौर में करीब 30 नामों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेजी थी, लेकिन दिल्ली से साफ संदेश आया—सूची छोटी करो, सिर्फ गंभीर नाम रखो। इसके बाद अब 14 नामों की संशोधित लिस्ट फिर से हाईकमान के पास भेजी गई है और प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।
यानी टिकट की लड़ाई अब सीधे मुंबई से निकलकर दिल्ली दरबार में पहुंच चुकी है।
मौजूदा गणित: BJP 6, शिंदे सेना 2, अजित पवार NCP 1… विपक्ष के हिस्से सिर्फ 1 सीट
288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के मौजूदा अंकगणित के हिसाब से महायुति इस चुनाव में लगभग एकतरफा बढ़त पर है। भाजपा के पास 137 विधायक, Eknath Shinde की शिवसेना के पास 57 और Ajit Pawar की NCP के पास 41 विधायक हैं। इस संख्या बल के आधार पर महायुति आराम से 9 में से 9 और उपचुनाव सहित कुल 10 में से 9 सीटें जीतने की स्थिति में है। पार्टी सूत्रों का अनुमान है कि इनमें BJP 6, शिवसेना 2 और NCP 1 सीट ले सकती है, जबकि विपक्षी महा विकास आघाड़ी के खाते में सिर्फ 1 सीट सुरक्षित मानी जा रही है।
हर उम्मीदवार को जीत के लिए करीब 28 विधायकों के वोटों का कोटा चाहिए, और यही गणित सत्तापक्ष को लगभग अजेय बना रहा है।
आम कार्यकर्ताओं को मौका या बड़े चेहरों की वापसी? BJP की सबसे बड़ी दुविधा
BJP के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती जीत नहीं, बल्कि टिकट का संतुलन है।
पार्टी के भीतर दो लॉबी बन चुकी हैं—एक पक्ष चाहता है कि लंबे समय से संगठन में काम कर रहे समर्पित कार्यकर्ताओं को मौका मिले, जबकि दूसरा गुट चाहता है कि चुनाव हार चुके बड़े नेताओं और प्रभावशाली चेहरों को विधान परिषद के जरिए एडजस्ट किया जाए।
सूत्र बताते हैं कि इस बार मुंबई से बाहर के क्षेत्रों को भी प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर काम हो रहा है ताकि क्षेत्रीय असंतोष न बढ़े। यही कारण है कि अंतिम समय तक नामों में जोड़-घटाव जारी है।
इन 10 सीटों पर चुनाव क्यों अहम है? कई दिग्गज हो रहे रिटायर
12 मई को जिन 10 सीटों पर चुनाव होना है, उनमें 9 सीटें उन MLCs की हैं जिनका कार्यकाल 13 मई को खत्म हो रहा है, जबकि 10वीं सीट पर उपचुनाव होगा। रिटायर होने वालों में Uddhav Thackeray, नीलम गोरे, संजय केनेकर, संदीप जोशी, दादाराव केचे, रणजीत मोहिते पाटिल, अमोल मिटकरी, राजेश राठौड़ और शशिकांत शिंदे जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
यही वजह है कि यह चुनाव सिर्फ नियमित प्रक्रिया नहीं बल्कि महाराष्ट्र की ऊपरी सदन की राजनीतिक पुनर्रचना माना जा रहा है।
विपक्ष की निगाह सिर्फ एक सीट पर, उद्धव ठाकरे की वापसी की तैयारी
महा विकास आघाड़ी के पास मौजूदा संख्या के हिसाब से सिर्फ एक उम्मीदवार जिताने लायक वोट हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि वह एक सीट Uddhav Thackeray को देने पर सहमति बना सकता है, क्योंकि उनका कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है और विपक्ष उन्हें विधान परिषद में बनाए रखना चाहता है। इसको लेकर कांग्रेस और सहयोगी दलों में अंदरूनी चर्चा तेज है।
30 अप्रैल सबसे निर्णायक दिन, उसी दिन खुलेगा महायुति का पूरा पत्ता
30 अप्रैल नामांकन की आखिरी तारीख है और माना जा रहा है कि उसी दिन BJP अपने सभी छह उम्मीदवारों के नामों का ऐलान करेगी। शिवसेना और NCP भी अंतिम क्षण तक अपने नाम रोककर चल रही हैं ताकि नाराजगी को संभाला जा सके।
यानी 12 मई का चुनाव भले औपचारिक लगे, लेकिन 30 अप्रैल महाराष्ट्र की सियासत में टिकट असंतोष, गुटबाजी और शक्ति प्रदर्शन का सबसे बड़ा दिन साबित होने जा रहा है।














