नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमले के मामले में आरोपियों को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ट्रायल रोकने का कोई आधार नहीं है और निचली अदालत की कार्यवाही जारी रहेगी।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने आरोपियों सकरिया राजेशभाई खिमजीभाई और तहसीन रजा की याचिका खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि “जब तक साफ तौर पर कोई गलती न दिखे, ट्रायल पर रोक नहीं लगाई जा सकती—और इस मामले में ऐसा कुछ नजर नहीं आता।”
कोर्ट के तीखे सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपियों की मौजूदगी पर सवाल उठाए—
“जब आप दिल्ली के रहने वाले नहीं हैं, तो मुख्यमंत्री की जन सुनवाई में क्या कर रहे थे?”
मोबाइल फोन की होगी फोरेंसिक जांच
कोर्ट ने फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी रोहिणी को निर्देश दिया है कि दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच कर चार हफ्तों में रिपोर्ट पेश की जाए। अदालत यह जानना चाहती है कि दोनों के बीच क्या संबंध और बातचीत थी।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 20 अगस्त 2025 की है, जब सिविल लाइंस स्थित कैंप ऑफिस में जन सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री पर हमला हुआ था। ट्रायल कोर्ट पहले ही हत्या की कोशिश, आपराधिक साजिश और सरकारी कर्मचारी पर हमले जैसी गंभीर धाराओं में आरोप तय कर चुका है।
गवाहों को किया जा चुका है तलब
मामले में मेडिकल अधिकारी, MLC तैयार करने वाले डॉक्टर और मुख्यमंत्री के PSO को भी अदालत में पेश होने के लिए बुलाया जा चुका है। जल्द ही सबूतों की प्रक्रिया शुरू होगी।
अगली सुनवाई 21 मई को
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 21 मई तय की है।
संदेश साफ है:
अदालत ने यह संकेत दे दिया है कि गंभीर आपराधिक मामलों में बिना ठोस आधार के ट्रायल रोकना आसान नहीं होगा। अब सभी की नजरें फोरेंसिक रिपोर्ट और आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।














