गाज़ीपुर – मेडिकल कॉलेज में वार्ड में शिफ्ट होने के कुछ देर बाद उषा देवी को यूरिन पास न होने सहित कई अन्य समस्याएं शुरू हो गईं। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने वार्ड में मौजूद कर्मचारियों से मरीज की स्थिति देखने का आग्रह किया, लेकिन कोई भी कर्मचारी सुनने को तैयार नहीं था। इस दौरान दो से तीन कर्मचारी कथित तौर पर मोबाइल पर रील देखने में व्यस्त थे।
यूरिन पास न होने की शिकायत के बाद सफाईकर्मी को दिया गया निर्देश
परिजनों के मुताबिक जब उन्होंने उषा देवी के यूरिन पास न होने और पेट फूलने की शिकायत दोबारा की, तब कर्मचारियों ने एक सफाईकर्मी को पाइप लगाकर महिला का यूरिन पास कराने का निर्देश दिया। सफाईकर्मी अपना कार्य कर ही रही थी कि इसी दौरान उषा देवी की मौत हो गई।
मौत के बाद मेडिकल कॉलेज में हंगामा
उषा देवी की मौत के बाद परिजनों ने मेडिकल कॉलेज में जमकर हंगामा किया। उनका आरोप था कि मेडिकल कर्मचारियों की घोर लापरवाही के कारण उनकी बहन की जान गई है। इस मामले में उन्होंने प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज को एक लिखित शिकायत सौंपी है, जिसमें पूरे मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
ईएमओ ने कहा— मरीज की हालत पहले से गंभीर थी
इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के ईएमओ डॉ. विष्णु मोहन ने बताया कि मरीज की हालत पहले से ही गंभीर थी और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच कराई जा रही है और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद एक बार फिर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि विधानसभा में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक द्वारा गाज़ीपुर के स्वास्थ्य महकमे में “सब चंगा है” कहने का दावा इस घटना के बाद सवालों के घेरे में आ गया है।














