नोएडा/गौतम बुद्ध नगर: 30 सितंबर 1959 को राजस्थान के अलवर जिले के मानेठी गांव में जन्मे डॉ. महेश शर्मा आज गौतम बुद्ध नगर की राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम हैं। पेशे से चिकित्सक, स्वास्थ्य क्षेत्र में उद्यमी और फिर सक्रिय राजनीति में आए डॉ. शर्मा ने नोएडा की बदलती तस्वीर के साथ अपने सार्वजनिक जीवन की भी एक लंबी यात्रा तय की है। वर्तमान में वे गौतम बुद्ध नगर से लोकसभा सदस्य हैं और 2024 में लगातार तीसरी बार इस सीट से निर्वाचित हुए। संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड में उनका जन्म 30 सितंबर 1959 और गौतम बुद्ध नगर से वर्तमान सांसद के रूप में उल्लेख है।
उनकी कहानी को केवल एक राजनेता की कहानी कहना शायद अधूरा होगा। इसमें गांव से निकलकर दिल्ली में शिक्षा हासिल करने वाला एक युवक है, चिकित्सा सेवा से अपना संस्थान खड़ा करने वाला डॉक्टर है, नोएडा के शुरुआती दौर का चिकित्सक है, विधानसभा तक पहुंचा जनप्रतिनिधि है और फिर केंद्र सरकार में संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभालने वाला मंत्री भी है।
लेकिन किसी भी सार्वजनिक जीवन वाले व्यक्ति की तस्वीर केवल उपलब्धियों से पूरी नहीं होती। उनके राजनीतिक सफर में समर्थकों की प्रशंसा के साथ आलोचनाएं और विवाद भी रहे हैं। इसलिए डॉ. महेश शर्मा को समझने का सही तरीका शायद यही है कि उपलब्धियों, सामाजिक योगदान, राजनीतिक यात्रा और सार्वजनिक विवाद—इन सभी को एक साथ देखा जाए।
मानेठी से नोएडा तक—एक साधारण शुरुआत
डॉ. महेश शर्मा की जन्मभूमि राजस्थान का मानेठी गांव रही है। उनके पिता कैलाश चंद शर्मा शिक्षक थे। उपलब्ध जीवन-वृत्तों के अनुसार शुरुआती शिक्षा के बाद उनका परिवार दिल्ली आया और उन्होंने आगे की पढ़ाई दिल्ली में की। उन्होंने जाकिर हुसैन कॉलेज से विज्ञान की पढ़ाई की और बाद में यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज से एमबीबीएस किया।
चिकित्सा शिक्षा पूरी करने के बाद उनका रास्ता सीधे बड़े शहर के स्थापित अस्पताल की ओर नहीं गया। उन्होंने नोएडा के सेक्टर-19 में छोटे क्लिनिक से चिकित्सा सेवा शुरू की। बाद में यही अनुभव कैलाश अस्पताल के विस्तार का आधार बना। उनके आधिकारिक जीवन-वृत्त में भी यह उल्लेख है कि उस दौर में नोएडा में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं की कमी महसूस करते हुए उन्होंने स्थानीय लोगों के लिए अस्पताल स्थापित करने का निर्णय लिया।
यहीं से उनके व्यक्तित्व का पहला महत्वपूर्ण पक्ष सामने आता है—चिकित्सा को व्यवसाय के साथ-साथ सामाजिक सेवा से जोड़ने की कोशिश।
कैलाश हेल्थकेयर की आधिकारिक सामग्री उन्हें समूह का संस्थापक चेयरमैन बताती है और स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने की बात करती है।
आज नोएडा के सेक्टर-27 स्थित कार्यालय पर जन्मदिवस के अवसर पर क्षेत्रवासियों, पार्टी पदाधिकारीगण, कार्यकर्ता बंधुओं एवं हजारों की संख्या में आए आत्मीयजनों ने जिस स्नेह, अपनत्व और शुभकामनाओं के साथ मेरा स्वागत किया, उसके लिए हृदय से आभार।
सुबह से देर शाम तक आप सभी से मिलना,… pic.twitter.com/J6TcbnNCRC
— Dr. Mahesh Sharma (@dr_maheshsharma) September 30, 2026
डॉक्टर से सामाजिक पहचान तक
नोएडा में डॉक्टर के रूप में काम करते हुए डॉ. शर्मा ने धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। उनके समर्थकों के बीच उनकी छवि ऐसे चिकित्सक की रही है जो मरीजों से सीधे जुड़ते थे और चिकित्सा को केवल आर्थिक गतिविधि नहीं मानते थे। हालांकि इन दावों को मुख्यतः उनके आधिकारिक जीवन-वृत्त और संस्थागत सामग्री के संदर्भ में ही देखना चाहिए।
कैलाश समूह के विस्तार ने उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र में एक अलग पहचान दी। अस्पताल की वर्तमान आधिकारिक वेबसाइट पर भी डॉ. महेश शर्मा को संस्थापक चेयरमैन और सांसद के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वहां अस्पताल के उद्देश्य के रूप में दूरदराज के क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने की बात कही गई है।
इसका सामाजिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि नोएडा जब आज के बड़े औद्योगिक और शहरी केंद्र के रूप में विकसित नहीं हुआ था, उस समय स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार स्थानीय जरूरत से जुड़ा विषय था।
राजनीति में प्रवेश—पहली हार से पहली बड़ी जीत तक
डॉ. महेश शर्मा की राजनीति का संसदीय अध्याय 2009 से शुरू हुआ। उन्होंने पहली बार गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन बसपा के सुरेंद्र सिंह नागर से हार गए। 2012 में भाजपा ने उन्हें नोएडा विधानसभा सीट से मैदान में उतारा और उन्होंने जीत दर्ज की। उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 77,319 वोट हासिल किए और बसपा के ओमदत्त शर्मा को 27,676 वोट से पीछे छोड़ा।
यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि परिसीमन के बाद नोएडा एक अलग विधानसभा क्षेत्र के रूप में सामने आया था और 2012 में डॉ. महेश शर्मा उस सीट के पहले निर्वाचित विधायक बने।
लेकिन विधानसभा की राजनीति में उनका कार्यकाल लंबा नहीं रहा। 2014 में लोकसभा चुनाव जीतकर वे राष्ट्रीय राजनीति में पहुंच गए।
2014: नोएडा से दिल्ली तक राजनीतिक छलांग
2014 का चुनाव डॉ. महेश शर्मा के राजनीतिक जीवन का निर्णायक मोड़ बना। उन्होंने गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट जीती और नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री बनाए गए। केंद्र सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार नवंबर 2014 में उन्होंने संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का कार्यभार संभाला तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय में भी राज्य मंत्री की जिम्मेदारी निभाई।
मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में पर्यटन, संस्कृति और विमानन से संबंधित कई पहल सामने आईं। इनमें ताजमहल और हुमायूं के मकबरे के लिए ई-टिकटिंग तथा 24 घंटे की ‘Incredible India Tourist Helpline’ शुरू करने जैसी घोषणाएं शामिल थीं।
पर्यटन के क्षेत्र में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने पर भी उन्होंने जोर दिया। सरकार ने मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बोर्ड गठित किया और उस समय इस क्षेत्र को भारत के लिए संभावनाशील क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया।
संस्कृति के मोर्चे पर भी वे विभिन्न विरासत कार्यक्रमों में सक्रिय रहे। हिमालयी सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक स्मारकों और संग्रहालयों से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी दर्ज है।
लगातार चुनावी सफलता और गौतम बुद्ध नगर से जुड़ाव
2019 में डॉ. शर्मा ने फिर लोकसभा चुनाव जीता। 2024 में भी वे गौतम बुद्ध नगर से भाजपा उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित हुए। भारत निर्वाचन आयोग की 2024 की सूची में गौतम बुद्ध नगर से निर्वाचित सदस्य के रूप में उनका नाम दर्ज है। संसद की वर्तमान सदस्य सूची भी उन्हें गौतम बुद्ध नगर से मौजूदा सांसद बताती है।
इस लगातार राजनीतिक उपस्थिति से यह तथ्य सामने आता है कि गौतम बुद्ध नगर की राजनीति में उनका एक मजबूत और स्थायी आधार बना है। हालांकि चुनावी जीत को केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा—हर चुनाव में पार्टी, राष्ट्रीय राजनीतिक माहौल, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं की प्राथमिकताएं भी भूमिका निभाती हैं।
सामाजिक पक्ष—स्वास्थ्य सेवा उनकी सबसे अलग पहचान
डॉ. महेश शर्मा के सार्वजनिक जीवन का सबसे स्पष्ट गैर-राजनीतिक पक्ष स्वास्थ्य क्षेत्र है।
एक डॉक्टर के रूप में उनका करियर राजनीति से काफी पहले शुरू हुआ। कैलाश समूह के संस्थापक के रूप में उनका नाम आज भी अस्पताल समूह की आधिकारिक सामग्री में प्रमुखता से दर्ज है।
उनके पक्ष में यह बात कही जा सकती है कि उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐसा संस्थागत ढांचा खड़ा किया जो समय के साथ नोएडा से आगे बढ़ा। कैलाश समूह की विभिन्न इकाइयों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हुआ है।
लेकिन यहां एक दूसरा पक्ष भी है—निजी स्वास्थ्य संस्थान का विस्तार और राजनीति में सक्रिय भूमिका, दोनों साथ होने के कारण सार्वजनिक जीवन में हितों के टकराव, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे सवाल स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इन सवालों का उत्तर व्यक्तिगत आरोपों से नहीं बल्कि संस्थागत नियमों, सार्वजनिक घोषणाओं और पारदर्शी प्रक्रियाओं से दिया जाना चाहिए।
आर्थिक स्थिति भी सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा
2024 के चुनावी हलफनामे के अनुसार डॉ. महेश शर्मा ने करीब 83.82 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी और उनके नाम कोई आपराधिक मामला घोषित नहीं था। 2019 के हलफनामे में घोषित संपत्ति करीब 47.88 करोड़ रुपये थी।
यह आंकड़ा अपने आप में न तो उपलब्धि का प्रमाण है और न आलोचना का आधार। यह केवल उस समय उम्मीदवार द्वारा चुनावी हलफनामे में घोषित संपत्तियों का सार्वजनिक रिकॉर्ड है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसी जानकारी जनता के सामने उपलब्ध हो और जनप्रतिनिधि अपनी संपत्ति तथा देनदारियों की जानकारी नियमानुसार घोषित करें।
इसी तरह उनके पुराने चुनावी रिकॉर्ड में 2009 के हलफनामे में एक मामला घोषित था, जबकि 2012, 2014, 2019 और 2024 के उपलब्ध हलफनामों में आपराधिक मामलों की संख्या शून्य दर्ज है।
आलोचनाएं और विवाद भी इस कहानी का हिस्सा हैं
डॉ. महेश शर्मा का सार्वजनिक जीवन पूरी तरह विवादों से मुक्त नहीं रहा। अप्रैल 2024 में एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान उनके एक बयान पर विवाद हुआ। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एक वीडियो में उन्होंने मोदी और योगी से संबंधित राजनीतिक टिप्पणी करते हुए ‘देशद्रोही’ शब्द का इस्तेमाल किया। शर्मा ने बाद में कहा कि वीडियो को संदर्भ से अलग करके देखा गया है और उन्होंने अपने बयान की पृष्ठभूमि भी बताई।
इस घटना से एक बड़ा सवाल सामने आता है—राजनीति में शब्द केवल शब्द नहीं होते। खासकर जब कोई व्यक्ति सांसद रह चुका हो और मंत्री पद संभाल चुका हो, तो उसके सार्वजनिक वक्तव्यों की व्याख्या और राजनीतिक प्रभाव दोनों व्यापक हो सकते हैं।
इसलिए समर्थकों के लिए जहां यह राजनीतिक तेवर हो सकता है, वहीं आलोचकों के लिए यह भाषा और लोकतांत्रिक संवाद की मर्यादा से जुड़ा सवाल बन सकता है। किसी एक पक्ष की व्याख्या को अंतिम सत्य मानने के बजाय पूरे संदर्भ को देखना अधिक उचित है।
डॉ. महेश शर्मा की राजनीति का दूसरा चेहरा
उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ी चुनौती एक ही जगह दिखाई देती है—वे लंबे समय से सत्ता और संगठन की मुख्यधारा में रहे हैं।
लंबा राजनीतिक अनुभव उन्हें प्रशासन, संगठन और चुनावी राजनीति की समझ देता है। लेकिन इसी वजह से जनता उनसे अपेक्षाएं भी अधिक रखती है।
गौतम बुद्ध नगर जैसे तेजी से विकसित होते क्षेत्र में सांसद के सामने केवल सड़क, बिजली और परिवहन की समस्याएं नहीं हैं। यहां ग्रामीण और शहरी आबादी, किसानों के मुद्दे, औद्योगिक विकास, रोजगार, प्रदूषण, ट्रैफिक, जमीन और बुनियादी सुविधाएं—सब एक साथ मौजूद हैं।
इसलिए डॉ. शर्मा की राजनीतिक विरासत का अंतिम मूल्यांकन केवल चुनाव जीतने से नहीं, बल्कि इस बात से भी होगा कि आने वाले समय में क्षेत्र के इन जटिल सवालों पर उनकी भूमिका कैसी रहती है।
डॉक्टर की संवेदना और नेता की जिम्मेदारी
डॉ. महेश शर्मा के जीवन की सबसे दिलचस्प बात यह है कि उनकी पहचान की शुरुआत राजनीति से नहीं, चिकित्सा से हुई। डॉक्टर के पेशे में मरीज के सामने पार्टी, जाति या राजनीतिक विचारधारा से पहले उसकी बीमारी दिखाई देती है।
राजनीति में भी यही संवेदना सबसे बड़ी कसौटी बनती है।
एक सांसद के रूप में उनके सामने ऐसे लोगों की समस्याएं आती हैं जो उनके समर्थक भी हो सकते हैं और आलोचक भी। लोकतांत्रिक जनप्रतिनिधित्व की असली परीक्षा इसी जगह होती है कि सेवा का दायरा राजनीतिक पसंद से बड़ा रहे।
यही वह क्षेत्र है जहां किसी भी नेता की उपलब्धियां केवल भाषणों या पोस्टरों से नहीं, बल्कि जनता के अनुभव से तय होती हैं।
जन्मदिन पर डॉ. महेश शर्मा के नाम एक बात
30 सितंबर को जब डॉ. महेश शर्मा अपना जन्मदिन मना रहे हैं, तो उनके जीवन को एक वाक्य में समेटना मुश्किल है।
एक गांव से निकला युवक।
दिल्ली में पढ़ाई करने वाला विद्यार्थी।
नोएडा में छोटे क्लिनिक से शुरुआत करने वाला डॉक्टर।
स्वास्थ्य संस्थान खड़ा करने वाला उद्यमी।
2012 में नोएडा का विधायक।
2014 में केंद्र सरकार का मंत्री।
और आज गौतम बुद्ध नगर का लगातार तीसरी बार निर्वाचित सांसद।
इस यात्रा में उपलब्धियां हैं तो विवाद भी हैं। समर्थकों का विश्वास है तो विरोधियों की आलोचनाएं भी हैं। सामाजिक सेवा की तस्वीर है तो बड़े निजी स्वास्थ्य संस्थान और सार्वजनिक जीवन के बीच पारदर्शिता जैसे सवाल भी हैं। चुनावी सफलताएं हैं तो राजनीतिक बयानों को लेकर उठे सवाल भी हैं।
शायद यही किसी भी लंबे सार्वजनिक जीवन की वास्तविक तस्वीर होती है—न पूरी तरह सफेद, न पूरी तरह काली।
डॉ. महेश शर्मा के लिए जन्मदिन का सबसे सार्थक संदेश यही हो सकता है कि उनके जीवन का अगला अध्याय राजनीति की उपलब्धियों से आगे बढ़कर जनसेवा, पारदर्शिता, संयमित सार्वजनिक संवाद और क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं के समाधान से जुड़ता जाए।
गौतम बुद्ध नगर आज जिस तेजी से बदल रहा है, उस बदलाव के साथ उसकी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे में लंबे राजनीतिक अनुभव वाले जनप्रतिनिधि से जनता की अपेक्षाएं भी स्वाभाविक रूप से बड़ी हैं।
जन्मदिन के अवसर पर डॉ. महेश शर्मा को शुभकामनाएं—स्वास्थ्य, दीर्घायु और सार्वजनिक जीवन में ऐसी भूमिका के लिए, जिसका मूल्यांकन आने वाली पीढ़ियां उपलब्धियों के साथ-साथ जवाबदेही और जनहित के पैमाने पर भी कर सकें।
क्योंकि किसी नेता की सबसे बड़ी पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उस पद के माध्यम से समाज के लिए छोड़ी गई स्थायी छाप से बनती है।















