वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर अमेरिका की अलग-अलग नीतियों पर सवालों का जवाब देते हुए उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का जिक्र किया। ट्रंप ने किम को अपना दोस्त बताते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत संवाद का महत्व है।
‘किम मेरा दोस्त है’
29 सितंबर को व्हाइट हाउस में एक बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप से पूछा गया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने पर जोर देता है, जबकि उत्तर कोरिया पहले से ही परमाणु हथियार रखने वाला देश है।
इस पर ट्रंप ने किम जोंग उन के साथ अपने संबंधों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि किम उनके दोस्त हैं और दोनों एक-दूसरे को पसंद करते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि किम के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों को लेकर उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ता है।
उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता पर क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप ने स्वीकार किया कि उत्तर कोरिया के पास परमाणु क्षमता है। उन्होंने इसके लिए पिछली अमेरिकी सरकारों की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि पूर्व प्रशासन उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा सके।
उत्तर कोरिया ने कई दशकों के दौरान अपना परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम विकसित किया है और कई परमाणु परीक्षण किए हैं। इसी वजह से वह आज परमाणु हथियार रखने वाले देशों में शामिल है।
ट्रंप-किम के बीच पहले भी हुई हैं कई मुलाकातें
ट्रंप और किम जोंग उन के बीच उनके पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण बैठकें हुई थीं। 2018 में दोनों नेताओं की सिंगापुर में ऐतिहासिक शिखर बैठक हुई थी। इसके बाद 2019 में हनोई में भी दोनों की मुलाकात हुई।
ट्रंप लंबे समय से यह कहते रहे हैं कि किम के साथ सीधे संवाद के जरिए अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच तनाव को कम करने की कोशिश की जा सकती है। उन्होंने भविष्य में भी किम से मुलाकात की संभावना का संकेत दिया है।
ईरान को लेकर अमेरिका का रुख अलग क्यों?
ईरान के मामले में ट्रंप प्रशासन ने परमाणु हथियार विकसित करने की संभावना का कड़ा विरोध किया है। अमेरिका का कहना है कि ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने से मध्य पूर्व में सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं और क्षेत्र में परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है।
दूसरी ओर, ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा।
सवाल सिर्फ ‘परमाणु हथियार’ का नहीं
ट्रंप के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि उत्तर कोरिया के मामले में अमेरिका की नीति में व्यक्तिगत कूटनीति, मौजूदा परमाणु वास्तविकता और पिछली अमेरिकी नीतियों जैसे कई पहलू शामिल हैं। वहीं ईरान के मामले में अमेरिका का घोषित लक्ष्य उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना रहा है।
इसलिए दोनों देशों को लेकर अमेरिकी नीति में अंतर को केवल इस आधार पर नहीं देखा जा सकता कि एक देश के पास परमाणु हथियार हैं और दूसरे को उन्हें हासिल करने से रोका जा रहा है। दोनों मामलों का इतिहास, कूटनीतिक संबंध और सुरक्षा परिस्थितियां अलग हैं।















