“CWC बैठक में राहुल गांधी ने रखे तीन प्रस्ताव—CEC का इस्तीफा, SIR पर रोक और PM-गृहमंत्री की जिम्मेदारी तय करने की मांग; बोले- “इस्तीफा दें तो बढ़िया, न दें तो और बढ़िया, हमारा आंदोलन चलता रहेगा””
नई दिल्ली। चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया। राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं के सामने कहा कि “ज्ञानेश कुमार को जाना ही होगा। उनका इस्तीफा होना ही है।” उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद उनका इस्तीफा करवाएंगे।
मंगलवार को हुई CWC बैठक में राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और SIR को लेकर पार्टी की आगे की रणनीति पर विस्तार से बात की। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक के बाद कांग्रेस ने CEC के इस्तीफे और SIR पर रोक समेत कई मांगों को लेकर अपना रुख और स्पष्ट किया।
“ज्ञानेश कुमार को जाना ही होगा”—राहुल का दो टूक संदेश
CWC में राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस को पीछे हटने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, जब तक ज्ञानेश कुमार पद पर बने रहते हैं, कांग्रेस का आंदोलन जारी रहेगा।
राहुल गांधी ने कहा कि “इस्तीफा करे तो बढ़िया, न करे तो और बढ़िया… क्योंकि हमारा आंदोलन चलेगा, चलता रहेगा।” उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अपना दबाव बनाए रखेगी और इसे केवल संसद तक सीमित नहीं रखा जाएगा।
राहुल के मुताबिक, पार्टी को इस लड़ाई को लगातार जनता के बीच ले जाना होगा। उन्होंने नेताओं से कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखना होगा।
यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब कांग्रेस और विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बताया है और आयोग के भीतर मतभेदों को संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा बताया है।
CWC में राहुल गांधी के तीन बड़े प्रस्ताव
CWC बैठक में राहुल गांधी ने मुख्य रूप से तीन प्रस्ताव सामने रखे। कांग्रेस की ओर से इन्हें आगे की राजनीतिक और आंदोलनात्मक रणनीति का आधार बनाया गया है।
पहला—ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो।
कांग्रेस लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रही है।
दूसरा—SIR को स्क्रैप किया जाए।
पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में चल रही प्रक्रिया को तत्काल रोका जाना चाहिए।
तीसरा—प्रधानमंत्री और गृहमंत्री जिम्मेदारी लें।
राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व ने इस पूरे विवाद को केंद्र सरकार की जवाबदेही से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
“आपको मुझ पर भरोसा नहीं, लेकिन मैं आपको बताता हूं…”
CWC की बैठक में राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं के सामने अपने राजनीतिक आकलन को लेकर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं को शायद उन पर पूरा भरोसा नहीं है।
राहुल ने कहा कि “आप लोगों को मुझ पर भरोसा नहीं है। आप भरोसा नहीं करते, लेकिन मैं आपको बताता हूं…”
इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक का हवाला देते हुए कहा कि जब वह मीटिंग के लिए उनके पास गए थे तो उनसे कहा गया कि वे वही कर रहे हैं जो इंदिरा गांधी के समय किया जाता था।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि मोदी और शाह ने उनसे यह भी कहा कि “हम जाएंगे तो आप आएंगे।” इस बात को बताते हुए उन्होंने पार्टी नेताओं से हल्के अंदाज में कहा कि अगर वे उन पर भरोसा कर रहे हैं कि वे आएंगे, तो पार्टी के नेताओं को भी उन पर भरोसा करना चाहिए।
रामलीला मैदान से लेकर राज्यों तक आंदोलन की तैयारी
कांग्रेस अब इस मुद्दे को बड़े जनआंदोलन का रूप देने की तैयारी में भी दिखाई दे रही है। राहुल गांधी ने कहा कि INDIA गठबंधन की बैठक के बाद तय किया जाएगा कि आंदोलन को रामलीला मैदान में बड़ी रैली के रूप में आगे बढ़ाया जाए या अलग-अलग राज्यों में कार्यक्रम किए जाएं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से रामलीला मैदान में रैली का प्रस्ताव रखा जाएगा।
यह संकेत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विपक्षी दल पहले से ही SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। INDIA गठबंधन की बैठक में भी संयुक्त आंदोलन और CEC के खिलाफ आगे की रणनीति पर चर्चा प्रस्तावित है।
“हमारा आंदोलन चलेगा, चलता रहेगा”
राहुल गांधी का संदेश CWC बैठक में सबसे स्पष्ट रूप से इसी बात को लेकर सामने आया कि कांग्रेस इस मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दे देते हैं तो अच्छी बात है, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो भी कांग्रेस अपना आंदोलन जारी रखेगी।
कांग्रेस की रणनीति अब दो स्तरों पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है—एक तरफ संसद और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से सवाल उठाना और दूसरी तरफ सड़क पर राजनीतिक आंदोलन को मजबूत करना।
CWC ने भी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची में बदलाव की जानकारी सार्वजनिक करने और हटाए गए नामों से जुड़े लोगों को जानकारी तथा अपील का अवसर देने जैसी मांगों को उठाया है।
“दो तरह की मैच फिक्सिंग” का राहुल का आरोप
बैठक में राहुल गांधी ने अपने पुराने “वोट चोरी” आरोपों को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक में मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए थे।
राहुल ने कहा कि शुरुआत में बहुत से लोगों ने कांग्रेस की बात को गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन उनके अनुसार पिछले दो वर्षों में परिस्थितियां बदली हैं क्योंकि कांग्रेस ने तथ्यों और प्रस्तुतियों के आधार पर अपने आरोप सामने रखे।
इसी क्रम में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनावों में दो तरह की “मैच फिक्सिंग” की जा रही है। उनके मुताबिक एक EVM से जुड़ी है और दूसरी मतदाता सूची में जानबूझकर गलतियां किए जाने से संबंधित है।
हालांकि ये राहुल गांधी और कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं। चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को स्वीकार नहीं करते और चुनाव प्रक्रिया तथा SIR को कानूनी प्रक्रिया के तहत संचालित बताते हैं।
2019 और 2024 के कानूनों पर भी उठाए सवाल
राहुल गांधी ने चुनावी व्यवस्था से जुड़े कानूनों और 2023 में बनाए गए मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य चुनाव आयुक्तों से संबंधित कानून पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि 2023 में कानून बनाए जाने के दौरान बड़ी संख्या में विपक्षी सांसदों को निलंबित किया गया था। राहुल ने इसे भविष्य की राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस को लगातार संघर्ष करते रहना होगा।
उनका कहना था कि पार्टी को दबाव बनाए रखना चाहिए और आंदोलन से पीछे नहीं हटना चाहिए।
उन्होंने अपने संबोधन में पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का उदाहरण देते हुए कहा कि जब दबाव बना रहता है तो राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव भी हो सकता है। राहुल ने कहा कि कांग्रेस को अपना दबाव जारी रखना होगा।
CEC विवाद अब संसद से सड़क तक
CEC को लेकर कांग्रेस की मांग अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है। पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है। वहीं विपक्षी INDIA गठबंधन की बैठक में भी इस मुद्दे पर संयुक्त रणनीति पर चर्चा होनी है।
मौजूदा विवाद में एक ओर कांग्रेस और विपक्ष चुनावी पारदर्शिता तथा मतदाता सूची को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा कांग्रेस के आरोपों को खारिज कर रहे हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि उसके फैसलों को कानूनी आधार प्राप्त है और आयोग के भीतर अलग-अलग विचार होना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है।
अब नजर INDIA गठबंधन की अगली बैठक पर
CWC बैठक के बाद राजनीतिक नजरें अब INDIA गठबंधन की बैठक पर टिक गई हैं। विपक्षी दलों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस के नेतृत्व में इस मुद्दे पर संयुक्त आंदोलन की रणनीति तैयार होती है और क्या रामलीला मैदान जैसे बड़े मंच पर शक्ति प्रदर्शन किया जाता है।
कांग्रेस की तरफ से संदेश स्पष्ट है कि वह ज्ञानेश कुमार, SIR और चुनावी पारदर्शिता के सवाल को लंबे आंदोलन में बदलने की तैयारी में है।
राहुल गांधी का CWC में दिया गया संदेश भी इसी दिशा में रहा—मुद्दा केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही के सवाल को लेकर आंदोलन जारी रहेगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। अब आने वाले दिनों में संसद, INDIA गठबंधन और सड़कों पर होने वाले आंदोलनों के जरिए यह विवाद किस दिशा में जाता है, इस पर देश की राजनीतिक निगाहें टिकी हैं।















