“एफडीए में कथित वसूली के आरोपों से महाराष्ट्र में सियासी और प्रशासनिक हलचल—आयुक्त बोले, ‘मेरे पास शिकायत ही नहीं आई तो जांच किसकी करूं?”
मुंबई: महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह बनी है शिवसेना (ठाकरे गुट) के सांसद संजय राउत की ओर से एफडीए के कुछ अधिकारियों पर लगाए गए कथित वसूली के आरोप। राउत के आरोपों के बाद मंगलवार को तुकाराम मुंढे ने सामने आकर पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा और कहा कि यदि किसी अधिकारी ने किसी कारोबारी या व्यक्ति से पैसे मांगे हैं तो उसकी जानकारी और सबूत एफडीए के सामने रखे जाएं। शिकायत और प्रमाण मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
तुकाराम मुंढे ने कहा कि उन्होंने संजय राउत की पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस देखी है। उनके मुताबिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राउत ने उनका अभिनंदन किया था और उनकी ईमानदारी पर कोई सवाल नहीं उठाया था। हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कई लोगों के संदेश आए और एफडीए की ओर से इस मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग की गई। मुंढे ने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए सवालों को देखते हुए उनका स्पष्टीकरण पहले से तैयार है।
‘किस अधिकारी ने पैसे मांगे, बताइए… सबूत दीजिए’
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कथित वसूली के आरोपों पर सबसे अहम सवाल यही उठाया कि यदि किसी अधिकारी ने 10 या 12 हजार रुपये की मांग की थी, तो इसकी जानकारी विभाग को क्यों नहीं दी गई?
उन्होंने कहा कि उनके पास अब तक ऐसी कोई शिकायत नहीं पहुंची है। उनका कहना है कि किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए कम से कम प्रारंभिक तथ्य या प्रमाण आवश्यक हैं। यदि किसी अधिकारी ने पैसे मांगे हैं तो यह बताया जाना चाहिए कि अधिकारी कौन था, उसने किस व्यक्ति से पैसे मांगे और किस मामले में मांग की गई।
मुंढे ने वीडियो या ऑडियो जैसे उपलब्ध प्रमाण सामने रखने की बात भी कही। उनका तर्क है कि जब तक उनके पास शिकायत या संबंधित जानकारी नहीं आएगी, तब तक जांच किस आधार पर और किस अधिकारी की की जाएगी?
यह बयान ऐसे समय में आया है जब एफडीए की कार्यप्रणाली और उसके अधिकारियों को लेकर राजनीतिक स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में मुंढे की ओर से दिया गया यह जवाब सीधे तौर पर शिकायत, प्रमाण और जांच की प्रक्रिया पर केंद्रित है।
संजय राउत का दावा—लाइसेंस रद्द करने की धमकी देकर वसूली?
दरअसल, संजय राउत की ओर से कथित तौर पर लिखे गए एक पत्र में एफडीए अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप यह है कि कुछ अधिकारी व्यवसायियों को लाइसेंस रद्द करने की धमकी देकर कथित रूप से पैसे की मांग करते हैं।
राउत के दावे के अनुसार, तुकाराम मुंढे के एफडीए आयुक्त बनने से पहले कथित तौर पर कुछ अधिकारी नोटिस बंद करने के नाम पर 10 से 12 हजार रुपये लेते थे। आरोप में यह भी दावा किया गया कि मुंढे के पदभार संभालने के बाद कथित वसूली की रकम बढ़कर 75 हजार रुपये से 2 लाख रुपये तक पहुंच गई।
हालांकि ये आरोप संजय राउत की ओर से लगाए गए हैं और इनकी पुष्टि के लिए संबंधित अधिकारियों, दस्तावेजों या अन्य प्रमाणों की आवश्यकता होगी। तुकाराम मुंढे ने भी स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि आरोपों के समर्थन में प्रमाण दिए जाते हैं तो विभाग नियमानुसार जांच और कार्रवाई कर सकता है।
पुरानी अनुशासनात्मक कार्रवाई का इस मामले से संबंध नहीं—मुंढे
एफडीए आयुक्त ने अधिकारियों के खिलाफ हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारियों के खिलाफ पहले ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन वह कार्रवाई एक अलग मामले में हुई थी।
मुंढे के मुताबिक उस कार्रवाई का संजय राउत के पत्र, वर्तमान में चर्चा में आए मामलों या शिकायतों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वह पहले भी अपना स्पष्टीकरण दे चुके हैं।
इस स्पष्टीकरण का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि अलग-अलग मामलों में हुई विभागीय कार्रवाई को एक ही प्रकरण से जोड़कर देखने पर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। मुंढे ने इस अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रत्येक मामले को उसके तथ्यों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर देखा जाना चाहिए।
गुटखा तस्करी पर FDA की बड़ी कार्रवाई
एक तरफ एफडीए पर कथित वसूली के आरोपों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी तरफ विभाग ने प्रतिबंधित गुटखा और अन्य अवैध उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई का दावा किया है।
तुकाराम मुंढे ने बताया कि महाराष्ट्र में गुटखा निर्माण की बात सामने नहीं आती, लेकिन दूसरे राज्यों से गुटखा महाराष्ट्र में लाकर ट्रांसपोर्ट किए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। विभाग ऐसे मामलों पर कार्रवाई कर रहा है।
उन्होंने बताया कि महज दो दिन पहले की गई कार्रवाई में करीब 1.26 करोड़ रुपये का गुटखा जब्त किया गया। इस कार्रवाई में दो ट्रकों का पीछा किया गया था और ठाणे से विशेष टीम को पालघर क्षेत्र में भेजा गया।
कार्रवाई के बाद मामले में चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और उसे गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई एफडीए की ओर से अवैध खाद्य एवं प्रतिबंधित उत्पादों के परिवहन के खिलाफ की जा रही निगरानी को भी सामने रखती है।
1.26 करोड़ की जब्ती ने बढ़ाई कार्रवाई की चर्चा
गुटखा तस्करी के मामले में इतनी बड़ी मात्रा में माल की जब्ती ने भी विभागीय कार्रवाई को चर्चा में ला दिया है। दो ट्रकों की निगरानी और उनका पीछा कर कार्रवाई तक पहुंचना बताता है कि विभाग की विशेष टीमें ऐसे मामलों पर नजर बनाए हुए हैं।
हालांकि गुटखा कहां से आया, इसकी पूरी सप्लाई चेन में कौन-कौन लोग शामिल थे और इसके पीछे कितने स्तर के कारोबारी या नेटवर्क काम कर रहे थे, ऐसे सवालों के जवाब आगे की जांच से सामने आने हैं।
एफडीए की कार्रवाई का अगला चरण केवल जब्ती और गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर पूरे नेटवर्क की पहचान और कानूनी कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
खामगांव में 3.51 करोड़ रुपये का बिना लाइसेंस ऑयल जब्त
एफडीए की एक अन्य बड़ी कार्रवाई बुलढाणा जिले के खामगांव में सामने आई है। यहां बिना लाइसेंस कारोबार से संबंधित करीब 3.51 करोड़ रुपये का ऑयल स्टॉक जब्त किए जाने की जानकारी तुकाराम मुंढे ने दी।
विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि जब्त किया गया उत्पाद किन-किन लोगों या संस्थाओं को बेचा गया था। इसके लिए बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड और संबंधित कारोबारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
यह मामला भी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि खाद्य एवं संबंधित उत्पादों के कारोबार में लाइसेंस और नियामकीय शर्तों का पालन अनिवार्य है। बिना लाइसेंस कारोबार सामने आने पर संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
नियम तोड़े तो 10 लाख तक जुर्माने का प्रावधान
तुकाराम मुंढे के अनुसार, बिना लाइसेंस कारोबार पाए जाने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके बाद मामले की प्रकृति और लागू नियमों के अनुसार 5 लाख और 3 लाख रुपये तक के जुर्माने की कार्रवाई भी हो सकती है।
एफडीए का जोर इस बात पर है कि कारोबारी आवश्यक लाइसेंस हासिल करें और निर्धारित नियमों एवं विनियमों का पालन करते हुए ही कारोबार संचालित करें।
खामगांव में करोड़ों रुपये के स्टॉक की जब्ती के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस उत्पाद की सप्लाई चेन कहां तक फैली थी और इसे किन-किन बाजारों या संस्थाओं तक पहुंचाया जाना था।
आरोपों से ज्यादा अब सबूत पर टिकी निगाहें
एफडीए को लेकर उठे ताजा विवाद में एक तरफ संजय राउत की ओर से लगाए गए कथित वसूली के आरोप हैं, वहीं दूसरी तरफ आयुक्त तुकाराम मुंढे का स्पष्ट जवाब है कि शिकायत और प्रमाण सामने आने पर कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरे विवाद का केंद्र अब यही बन गया है कि कथित वसूली से संबंधित शिकायतें, दस्तावेज, ऑडियो, वीडियो या अन्य प्रमाण सामने आते हैं या नहीं। फिलहाल मुंढे का रुख साफ है—आरोपों की जानकारी और सबूत उपलब्ध कराए जाएं, ताकि विभाग संबंधित अधिकारी या मामले की जांच कर सके।
साथ ही, गुटखा तस्करी और बिना लाइसेंस कारोबार के खिलाफ हुई करोड़ों रुपये की जब्ती वाली कार्रवाइयों ने एफडीए की भूमिका को भी चर्चा में ला दिया है।
अब देखना यह होगा कि कथित वसूली के आरोपों पर आगे कोई ठोस शिकायत या प्रमाण सामने आता है या नहीं और यदि आता है तो एफडीए उस पर किस स्तर की कार्रवाई करता है। दूसरी ओर, गुटखा और बिना लाइसेंस उत्पादों के मामलों में विभाग की जांच किस निष्कर्ष तक पहुंचती है, यह भी आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेगा।
फिलहाल तुकाराम मुंढे का संदेश स्पष्ट है—आरोप लगाना अलग बात है, लेकिन कार्रवाई के लिए तथ्य और प्रमाण जरूरी हैं।















