Tuesday, March 10, 2026
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ममता बनर्जी का बड़ा दावा: “सीवी आनंद बोस को इस्तीफा देने के लिए किया गया मजबूर”, मुलाकात के बाद बंगाल की राजनीति गरमाई

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पूर्व राज्यपाल सीवी आनंद बोस से मुलाकात के बाद बड़ा राजनीतिक दावा किया है। ममता बनर्जी ने कहा कि आनंद बोस ने अपनी इच्छा से राज्यपाल पद नहीं छोड़ा, बल्कि उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया था। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

मुख्यमंत्री ने अलीपुर स्थित सरकारी गेस्ट हाउस में आनंद बोस से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात ने विधानसभा चुनाव से पहले सियासी अटकलों को और तेज कर दिया है।

“दिल्ली बुलाकर इस्तीफा दिलवाया गया” – ममता बनर्जी

ममता बनर्जी ने कहा कि आनंद बोस राष्ट्रपति के एक कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे और इसके लिए उनकी बागडोगरा की फ्लाइट भी बुक कर दी गई थी। लेकिन कार्यक्रम में शामिल होने से पहले ही उन्हें अचानक दिल्ली बुला लिया गया।

ममता ने दावा करते हुए कहा कि दिल्ली बुलाए जाने के बाद उन्हें अपना इस्तीफा देना पड़ा। उनके अनुसार यह फैसला उनकी व्यक्तिगत इच्छा नहीं था।

राजभवन को चुनावी कार्यालय बनाने का आरोप

मुख्यमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी राजभवन को अपना चुनावी कार्यालय बनाना चाहती थी। ममता के अनुसार आनंद बोस इस बात से सहमत नहीं थे, जिसके कारण उन्हें पद छोड़ने के लिए दबाव झेलना पड़ा।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति को और संवेदनशील बना दिया है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं।

गुरुवार को दिया था इस्तीफा

गौरतलब है कि सीवी आनंद बोस ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया था। उस समय वे दिल्ली दौरे पर थे और वहीं से उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजा।

उनके इस्तीफे के तुरंत बाद आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया। विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल का इस्तीफा राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।

इस्तीफे के पीछे बताए जा रहे दो बड़े कारण

सीवी आनंद बोस को वर्ष 2022 में पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था, लेकिन तीन साल से भी कम समय में उन्हें पद छोड़ना पड़ा। उनके इस्तीफे के पीछे दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।

पहला कारण यह है कि पिछले दो वर्षों में उन पर यौन उत्पीड़न के दो गंभीर आरोप लगे थे। इनमें से एक आरोप राजभवन की एक महिला कर्मचारी ने लगाया था, जबकि दूसरा आरोप एक ओडिसी नृत्यांगना द्वारा लगाया गया था।

दूसरा कारण यह बताया जा रहा है कि बंगाल भाजपा के कुछ नेताओं के साथ उनके रिश्ते खराब हो गए थे। इन आरोपों और विवादों के बीच जांच पूरी भी नहीं हो पाई थी, क्योंकि वे उस समय राज्यपाल पद पर थे।

बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल

ममता बनर्जी और आनंद बोस की हालिया मुलाकात तथा उनके इस्तीफे को लेकर दिए गए बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है।

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