“महिला स्वास्थ्य से लेकर सेरेब्रल पाल्सी तक—एक ही मंच पर जागरूकता, परामर्श और थेरेपी की समझ; विशेषज्ञों ने कहा—समय पर जागरूकता और सही मार्गदर्शन बेहद जरूरी”
नोएडा, सेक्टर-73।
शहरों की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वास्थ्य अक्सर प्राथमिकताओं की सूची में पीछे छूट जाता है। खासकर महिलाओं के लिए पोस्चर, कमर दर्द, मासिक धर्म के दौरान होने वाली परेशानियां और रोजमर्रा की शारीरिक समस्याएं कई बार सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दी जाती हैं। दूसरी ओर, सेरेब्रल पाल्सी और अन्य विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के अभिभावकों के सामने अलग तरह की चुनौती होती है—सही थेरेपी कहां मिले, घर पर क्या सावधानियां बरती जाएं और बच्चे के विकास के लिए समय पर हस्तक्षेप कितना जरूरी है।
इन्हीं सवालों को केंद्र में रखते हुए फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन ने रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को नोएडा के सेक्टर-73 स्थित महादेव अपार्टमेंट में एक दिवसीय निःशुल्क महिला स्वास्थ्य एवं सेरेब्रल पाल्सी जागरूकता शिविर का आयोजन किया। आयोजकों के अनुसार, शिविर में 100 से अधिक महिलाओं और बच्चों/अभिभावकों ने हिस्सा लिया और विशेषज्ञों से स्वास्थ्य एवं थेरेपी संबंधी परामर्श प्राप्त किया।
यह आयोजन महज एक सामान्य स्वास्थ्य कैंप तक सीमित नहीं रहा। कार्यक्रम का फोकस दो महत्वपूर्ण मोर्चों पर रहा—महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग बनाना और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के अभिभावकों को सही थेरेपी एवं होम प्रोटोकॉल की जानकारी देना।
जब स्वास्थ्य की अनदेखी बन जाए रोजमर्रा की आदत
महिलाओं में लंबे समय तक बैठने, गलत तरीके से काम करने, लगातार मोबाइल या कंप्यूटर के इस्तेमाल और दैनिक जीवन की अन्य परिस्थितियों से जुड़े पोस्चर संबंधी बदलाव तथा कमर दर्द जैसी समस्याएं आम चर्चा का हिस्सा हैं। लेकिन समस्या तब गंभीर हो जाती है जब व्यक्ति लगातार होने वाली परेशानी को सामान्य मानकर विशेषज्ञ से सलाह लेने में देर करता रहे।
शिविर में विशेषज्ञों ने महिलाओं को पोस्चर करेक्शन, कमर दर्द और पीरियड्स के दौरान स्वास्थ्य देखभाल जैसे विषयों पर जागरूक किया। उद्देश्य यह रहा कि महिलाएं अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेने के महत्व को समझें।
कार्यक्रम से यह संदेश भी सामने आया कि स्वास्थ्य जागरूकता केवल बीमारी होने के बाद उपचार तक सीमित नहीं होनी चाहिए। सही जानकारी, समय पर सलाह और जीवनशैली में आवश्यक सुधार कई स्वास्थ्य समस्याओं को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सेरेब्रल पाल्सी: अभिभावकों के सवालों पर विशेषज्ञों का फोकस
शिविर का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों और उनके अभिभावकों से जुड़ा रहा। ऐसे बच्चों की देखभाल केवल क्लिनिक में मिलने वाली थेरेपी तक सीमित नहीं रहती। घर पर बच्चे के साथ किस तरह की गतिविधियां की जाएं, किन बातों का ध्यान रखा जाए और थेरेपी को लेकर निरंतरता कैसे बनाए रखी जाए—ये अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न होते हैं।
फाउंडेशन की टीम ने अभिभावकों को होम प्रोटोकॉल और समय पर थेरेपी के महत्व के बारे में जानकारी दी। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के मामले में अभिभावकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और उन्हें सही जानकारी तथा व्यावहारिक मार्गदर्शन मिलना आवश्यक है।
यहां सबसे बड़ा सवाल भी यही है कि क्या परिवारों को पर्याप्त जानकारी समय पर मिल पाती है? कई बार अभिभावक अलग-अलग स्रोतों से सलाह लेते हैं, लेकिन हर बच्चे की जरूरत एक जैसी नहीं होती। ऐसे में विशेषज्ञों द्वारा उचित मूल्यांकन और व्यक्तिगत सलाह की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
100 से अधिक प्रतिभागियों तक पहुंचा स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन के संस्थापक एवं वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. महिपाल सिंह, मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव और सीईओ डॉ. सुष्मिता भाटी ने शिविर में प्रतिभागियों को परामर्श दिया।
आयोजकों के अनुसार, 100 से अधिक प्रतिभागियों ने इस निःशुल्क कैंप का लाभ उठाया। महिलाओं ने अपने स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं और सवालों पर विशेषज्ञों से बातचीत की, जबकि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के अभिभावकों ने बच्चों की थेरेपी और घर पर देखभाल से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया।
निःशुल्क शिविर की सबसे अहम बात यह रही कि स्वास्थ्य परामर्श को उन लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया, जो अपने आसपास ही विशेषज्ञ सलाह प्राप्त कर सकें। ऐसे आयोजन समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने में उपयोगी हो सकते हैं।
देहरादून से पहुंचीं पूनम मिश्रा, अभिभावकों का बढ़ाया मनोबल
कार्यक्रम में देहरादून की संस्था ‘विंसम स्टेप्स’ की डायरेक्टर पूनम मिश्रा ने विशेष अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। उन्होंने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के अभिभावकों से संवाद करते हुए उनका मनोबल बढ़ाया।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चे की देखभाल कई परिवारों के लिए भावनात्मक और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे में अभिभावकों को यह महसूस कराना कि वे अकेले नहीं हैं और उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए सहयोग तथा जानकारी उपलब्ध है, जागरूकता कार्यक्रमों की एक महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
पूनम मिश्रा की मौजूदगी ने कार्यक्रम में इसी पहलू को मजबूती दी। अभिभावकों के लिए ऐसे मंच केवल चिकित्सकीय जानकारी देने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे अनुभव साझा करने और मानसिक रूप से मजबूत बनने का अवसर भी देते हैं।
पूरी टीम ने संभाली जिम्मेदारी
शिविर को सफल बनाने में फाउंडेशन की पूरी टीम ने सक्रिय योगदान दिया। कार्यक्रम में फिजियोथेरेपिस्ट अभिनव प्रताप सिंह, स्पेशल एजुकेटर इलिका रावत और एडमिन हेड कृष्णा यादव सहित टीम के अन्य सदस्यों ने अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
एक स्वास्थ्य जागरूकता शिविर को प्रभावी बनाने के लिए केवल विशेषज्ञ की मौजूदगी पर्याप्त नहीं होती। प्रतिभागियों का पंजीकरण, उनकी समस्याओं को समझना, सही विशेषज्ञ तक पहुंचाना, परामर्श की व्यवस्था और कार्यक्रम के प्रशासनिक संचालन जैसे कई स्तरों पर टीमवर्क की आवश्यकता होती है। आयोजकों के अनुसार, फाउंडेशन की टीम ने इसी समन्वय के साथ कैंप को संचालित किया।महादेव अपार्टमेंट में सेहत का बड़ा संदेश: फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन के फ्री हेल्थ कैंप में 100 से अधिक महिलाओं और बच्चों को मिला विशेषज्ञ परामर्श कैंप नहीं, लगातार जागरूकता की जरूरत
डॉ. महिपाल सिंह ने इस अवसर पर “जागरूकता ही बचाव है” के संदेश को दोहराया और कहा कि संस्था भविष्य में भी ऐसे शिविर आयोजित करती रहेगी।
दरअसल, स्वास्थ्य जागरूकता की सबसे बड़ी चुनौती एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि उसकी निरंतरता है। एक दिन कैंप में विशेषज्ञ से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है, लेकिन वास्तविक बदलाव तब आता है जब व्यक्ति उस सलाह को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाता है और आवश्यकता पड़ने पर नियमित चिकित्सकीय या थेरेपी संबंधी परामर्श लेता है।
महिलाओं के लिए भी यही संदेश महत्वपूर्ण है कि शरीर में लगातार बने रहने वाले दर्द या अन्य परेशानियों को केवल रोजमर्रा की थकान मानकर टालना उचित नहीं। वहीं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के अभिभावकों के लिए नियमितता, सही मार्गदर्शन और विशेषज्ञों से समय-समय पर परामर्श की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
महादेव अपार्टमेंट से उठी बड़ी आवाज—स्वास्थ्य को टालना बंद करना होगा
महादेव अपार्टमेंट में आयोजित यह शिविर एक स्थानीय आयोजन जरूर था, लेकिन इससे जुड़ा संदेश व्यापक है। स्वास्थ्य केवल अस्पतालों और क्लीनिकों का विषय नहीं है। समुदाय के बीच जाकर लोगों को जागरूक करना भी स्वास्थ्य व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण सामाजिक पक्ष है।
100 से अधिक लोगों की भागीदारी इस बात की ओर संकेत करती है कि आम लोगों में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और विशेषज्ञ सलाह की जरूरत बनी हुई है। महिलाओं की शारीरिक समस्याओं से लेकर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की थेरेपी तक—हर क्षेत्र में सही जानकारी और समय पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन महत्वपूर्ण है।
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन की यह पहल इसी दिशा में एक कदम के रूप में सामने आई है। अब चुनौती यह है कि ऐसे प्रयास केवल किसी एक रविवार या एक दिवसीय शिविर तक सीमित न रहें, बल्कि लगातार जागरूकता अभियानों का रूप लें।
क्योंकि स्वास्थ्य के मामले में सबसे महंगी गलती अक्सर बीमारी नहीं, बल्कि सही समय पर सही जानकारी को नजरअंदाज करना होती है।
पर्दाफाश न्यूज़ का सवाल
महादेव अपार्टमेंट का यह शिविर एक सकारात्मक पहल का उदाहरण जरूर पेश करता है, लेकिन इससे एक बड़ा सामाजिक सवाल भी निकलता है—क्या हमारे शहरों में महिलाओं और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए ऐसी स्वास्थ्य-जागरूकता पहल पर्याप्त संख्या में हो रही हैं?
अगर 100 से अधिक लोग एक स्थानीय निःशुल्क शिविर में विशेषज्ञ परामर्श लेने पहुंचते हैं, तो यह अपने आप में बताता है कि समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी की मांग कितनी बड़ी है।
जरूरत इस बात की है कि स्वास्थ्य जागरूकता को केवल आयोजन की तस्वीरों और एक दिन की गतिविधि तक सीमित न रखा जाए। इसे लगातार चलने वाली मुहिम बनाया जाए, जिसमें जागरूकता, विशेषज्ञ परामर्श, सही थेरेपी की जानकारी और परिवारों का मार्गदर्शन लगातार उपलब्ध हो।
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन,महादेव अपार्टमेंट से निकला संदेश साफ है—स्वास्थ्य को नजरअंदाज करने का दौर खत्म होना चाहिए और जागरूकता को समाज की आदत बनाना होगा।















