Thursday, October 1, 2026
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नोएडा को स्मार्ट सिटी बनाने के दावों के बीच आरडब्ल्यूए ने खोला व्यवस्था का ‘कच्चा चिट्ठा’!

“सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए का प्राधिकरण और पुलिस प्रशासन पर सीधा फोकस—कचरा, अतिक्रमण, जलभराव, निर्माण स्थलों की अव्यवस्था और सुरक्षा पर उठाए गंभीर सवाल; 24 घंटे CCTV, ऑन-द-स्पॉट चालान और अवैध कब्जों पर तत्काल कार्रवाई की मांग”

नोएडा: चमचमाती सड़कों, ऊंची इमारतों, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और विश्वस्तरीय शहर की पहचान बनाने की कोशिशों के बीच नोएडा की जमीनी व्यवस्थाओं को लेकर अब नागरिक संगठनों की आवाज भी तेज होती दिखाई दे रही है। सेक्टर-105 की आरडब्ल्यूए ने नोएडा प्राधिकरण और पुलिस प्रशासन को एक विस्तृत मांग पत्र भेजकर शहर की स्वच्छता, सुरक्षा, अतिक्रमण नियंत्रण और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं।

आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय की ओर से नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को भेजे गए मांग पत्र की प्रतिलिपि गौतम बुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नर को भी भेजी गई है। पत्र का मूल संदेश स्पष्ट है—सिर्फ विकास परियोजनाएं और सौंदर्यीकरण पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि शहर की रोजमर्रा की नागरिक व्यवस्थाओं पर भी प्रभावी निगरानी और जवाबदेही जरूरी है।

आरडब्ल्यूए ने प्रशासन से ऐसी व्यवस्था विकसित करने का आग्रह किया है, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने, कूड़ा डालने, अतिक्रमण करने या सार्वजनिक सुरक्षा को प्रभावित करने वाले मामलों पर केवल शिकायत के बाद कार्रवाई न हो, बल्कि निगरानी, तत्काल हस्तक्षेप और जवाबदेही की स्पष्ट प्रणाली मौजूद हो।

कूड़े के ढेर से लेकर बिजली पैनल तक—कहीं लापरवाही भारी न पड़ जाए

मांग पत्र में खुले स्थानों, नालों के किनारों और खाली भूखंडों पर अनियंत्रित तरीके से कचरा फेंके जाने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई गई है। आरडब्ल्यूए का कहना है कि सार्वजनिक स्थलों पर कचरे का जमाव केवल शहर की सुंदरता का विषय नहीं है, बल्कि यह स्वच्छता, पर्यावरण और नागरिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ प्रश्न है।

सबसे गंभीर चिंता सरकारी संपत्तियों और विद्युत पैनल बॉक्स के आसपास कचरा जमा होने को लेकर जताई गई है। आरडब्ल्यूए ने प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए संभावित दुर्घटनाओं के जोखिम को रेखांकित किया है।

सवाल यह है कि यदि किसी संवेदनशील विद्युत स्थल के आसपास लगातार कचरा जमा होता है तो उसकी निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है? क्या नियमित निरीक्षण की व्यवस्था है? यदि व्यवस्था है तो उसकी रिपोर्टिंग और अनुपालन की सार्वजनिक जवाबदेही किस स्तर पर तय होती है?

आरडब्ल्यूए की मांग इन्हीं सवालों को प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में लाने की कोशिश करती दिखाई देती है।

नालों और सड़कों पर पक्के निर्माण, फिर जलभराव का जिम्मेदार कौन?

नोएडा में जलनिकासी व्यवस्था लंबे समय से नागरिक सुविधाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए ने नालियों और सड़कों के किनारों पर किए जा रहे पक्के निर्माणों को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है।

आरडब्ल्यूए के अनुसार, इस तरह के निर्माण सफाई और जलनिकासी व्यवस्था में बाधा पैदा कर सकते हैं और परिणामस्वरूप जलभराव जैसी समस्या सामने आ सकती है। इसी आधार पर ऐसे निर्माणों की जांच और यदि वे नियमों के विरुद्ध पाए जाएं तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।

यहां आरडब्ल्यूए का सवाल केवल किसी एक निर्माण को हटाने तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि सड़क, नाली और सार्वजनिक भूमि से संबंधित निर्माणों की निगरानी कौन करता है और यदि कोई निर्माण नियमों का उल्लंघन करता है तो कार्रवाई की प्रक्रिया कितनी तेज है?

शिकायत के बाद निरीक्षण और निरीक्षण के बाद कार्रवाई—इन दोनों के बीच कितना समय लगेगा? यही वह प्रशासनिक खाई है जिसे नागरिक संगठन भरना चाहते हैं।

निर्माण स्थल सड़क पर फैलाएं सामान तो आम नागरिक रास्ता कैसे पाए?

शहर में लगातार निर्माण कार्य चलते रहते हैं। लेकिन निर्माण गतिविधियों के दौरान यदि सामग्री सड़कों तक फैल जाए, रास्ते बाधित हों या अस्थायी संरचनाएं सार्वजनिक आवागमन में परेशानी पैदा करें, तो उसका प्रभाव सीधे आम नागरिक पर पड़ता है।

आरडब्ल्यूए ने निर्माणाधीन स्थलों पर सड़क पर फैली निर्माण सामग्री और अवैध झोपड़ियों से रास्तों के बाधित होने का मुद्दा उठाया है। संस्था का आग्रह है कि ऐसे मामलों में संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए और सार्वजनिक रास्तों को बाधित करने वाली गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए।

विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन विकास के नाम पर सार्वजनिक रास्तों की सुरक्षा और नागरिकों की आवाजाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यही संतुलन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों और एजेंसियों की होती है।

‘लेबर वेरिफिकेशन’ की मांग, सुरक्षा व्यवस्था पर भी सीधा सवाल

आरडब्ल्यूए ने निर्माणाधीन स्थलों पर काम करने वाले सभी श्रमिकों के अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन की मांग भी उठाई है।

यह मांग नागरिक सुरक्षा और पुलिस सत्यापन की व्यवस्था से जुड़ी है। आरडब्ल्यूए का तर्क है कि बड़े पैमाने पर चल रहे निर्माण कार्यों में बाहरी श्रमिकों की मौजूदगी को देखते हुए उनकी पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया व्यवस्थित रूप से सुनिश्चित की जानी चाहिए।

हालांकि किसी भी श्रमिक या नागरिक को केवल संदेह के आधार पर अपराध से जोड़ना उचित नहीं होगा। इसलिए सत्यापन की प्रक्रिया कानूनसम्मत, पारदर्शी और निर्धारित नियमों के अनुरूप होना जरूरी है। आरडब्ल्यूए की मांग को इसी प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के आग्रह के रूप में देखा जाना चाहिए।

पार्क और आवासीय गेट के आसपास गंदगी रोकने की मांग

सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए ने सार्वजनिक पार्कों और आवासीय क्षेत्रों के मुख्य द्वारों के आसपास गंदगी फैलने से रोकने के लिए भी ठोस व्यवस्था की मांग की है।

नागरिक क्षेत्रों में प्रवेश और निकास के प्रमुख स्थान यदि कूड़े या गंदगी से प्रभावित हों तो उसका असर पूरे इलाके की स्वच्छता व्यवस्था पर पड़ता है। इसलिए आरडब्ल्यूए ने केवल सफाईकर्मियों की तैनाती नहीं, बल्कि निगरानी और नियमों के अनुपालन की व्यवस्था पर भी जोर दिया है।

यही वह जगह है जहां जन-जागरूकता और प्रशासनिक कार्रवाई दोनों की आवश्यकता दिखाई देती है। केवल लोगों से स्वच्छता की अपील करना पर्याप्त नहीं होगा और केवल जुर्माना लगाना भी स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। प्रभावी व्यवस्था के लिए दोनों स्तरों पर काम करना होगा।

आवारा पशुओं के लिए तय हों फीडिंग स्पॉट

मांग पत्र में आवारा पशुओं से जुड़ा विषय भी उठाया गया है। आरडब्ल्यूए ने सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप निश्चित फीडिंग स्पॉट निर्धारित करने की मांग की है।

इसका उद्देश्य यह बताया गया है कि सार्वजनिक पार्कों, आवासीय परिसरों और मुख्य प्रवेश द्वारों के आसपास अव्यवस्थित तरीके से पशुओं को भोजन कराने से पैदा होने वाली गंदगी और नागरिक असुविधा को नियंत्रित किया जा सके।

इस मामले में भी प्रशासन के लिए चुनौती यही है कि नागरिक भावनाओं, पशु कल्याण और सार्वजनिक स्वच्छता के बीच संतुलित एवं नियमसम्मत व्यवस्था कैसे लागू की जाए।

24 घंटे CCTV—आरडब्ल्यूए ने मांगी डिजिटल निगरानी की व्यवस्था

आरडब्ल्यूए की सबसे महत्वपूर्ण मांगों में संवेदनशील स्थानों पर 24 घंटे CCTV निगरानी की व्यवस्था शामिल है।

आरडब्ल्यूए का सुझाव है कि जहां कचरा फेंकने, अतिक्रमण, सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग या अन्य नियम उल्लंघनों की आशंका अधिक हो, वहां डिजिटल निगरानी की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए।

सवाल केवल कैमरे लगाने का नहीं है। कैमरा लगने के बाद रिकॉर्डिंग की निगरानी कौन करेगा? उल्लंघन सामने आने पर कार्रवाई कौन करेगा? शिकायतकर्ता को कार्रवाई की स्थिति कैसे पता चलेगी? यदि प्रशासन डिजिटल निगरानी को प्रभावी बनाता है तो इन सवालों के जवाब भी व्यवस्था का हिस्सा होने चाहिए।

ऑन-द-स्पॉट चालान और उड़नदस्ते—सिर्फ कागज पर कार्रवाई नहीं

आरडब्ल्यूए ने नियम तोड़ने वालों के खिलाफ ऑन-द-स्पॉट चालान की पारदर्शी व्यवस्था लागू करने का आग्रह किया है। साथ ही सुरक्षा मार्शलों और उड़नदस्तों की तैनाती का सुझाव भी दिया गया है।

इस मांग के पीछे मूल विचार यह है कि कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद शुरू होने वाली लंबी प्रक्रिया तक सीमित न रहे। संवेदनशील स्थानों पर नियमित निरीक्षण हो, नियमों का उल्लंघन मिलने पर निर्धारित कानून और प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई हो और पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।

लेकिन ऐसी व्यवस्था की विश्वसनीयता तभी बनेगी जब चालान और कार्रवाई स्पष्ट नियमों के आधार पर हो तथा नागरिकों और संबंधित पक्षों के लिए प्रक्रिया पारदर्शी हो।

‘स्वच्छ भारत’ का सपना—जागरूकता के साथ जवाबदेही भी जरूरी

आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने प्रधानमंत्री के ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा है कि नोएडा की स्वच्छ और भव्य पहचान बनाए रखने के लिए जन-जागरूकता के साथ कड़े प्रशासनिक एवं कानूनी कदम भी जरूरी हैं।

यह बात एक व्यापक नागरिक प्रश्न की ओर संकेत करती है। शहर को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी सिर्फ प्राधिकरण की नहीं हो सकती और न ही केवल नागरिकों पर डाली जा सकती है। कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा, अतिक्रमण नियंत्रण, सड़क और नाली व्यवस्था तथा नागरिक सुरक्षा के लिए प्रशासन, संस्थाओं, आरडब्ल्यूए और आम नागरिकों की साझा भूमिका आवश्यक है।

अब गेंद प्रशासन के पाले में—कार्रवाई कब और कैसे?

सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए ने अपना मांग पत्र सौंपकर प्रशासन के सामने मुद्दे रख दिए हैं। अब महत्वपूर्ण यह है कि संबंधित विभाग इन मांगों पर क्या कदम उठाते हैं।

क्या संवेदनशील स्थानों की पहचान होगी? क्या वहां CCTV निगरानी बढ़ाई जाएगी? क्या अतिक्रमण और अवैध निर्माण की शिकायतों की जांच होगी? क्या निर्माण स्थलों पर सुरक्षा और श्रमिक सत्यापन संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा? क्या कचरा प्रबंधन के लिए नियमित निगरानी और जवाबदेही तय होगी?

इन सवालों के जवाब केवल कागजी पत्राचार से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई से मिलेंगे।

नोएडा की पहचान केवल एक्सप्रेसवे, ऊंची इमारतों और बड़े निवेश से नहीं बनती। किसी भी आधुनिक शहर की असली कसौटी यह है कि उसके नागरिकों को स्वच्छ वातावरण, सुरक्षित सड़कें, व्यवस्थित सार्वजनिक स्थान और जवाबदेह प्रशासन कितना मिलता है।

सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए की पहल ने कम से कम इन बुनियादी सवालों को प्रशासन के सामने औपचारिक रूप से रख दिया है। अब निगाह इस बात पर है कि नोएडा प्राधिकरण और पुलिस प्रशासन इन मांगों को किस तरह लेते हैं और नागरिक हित में कौन से ठोस कदम सामने आते हैं।

पर्दाफाश न्यूज़ की नजर अब मांग पत्र से आगे की कार्रवाई पर रहेगी—क्योंकि असली परीक्षा मांग सुनने की नहीं, उसे नियमों और कानून के दायरे में जमीन पर लागू करने की है।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
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