नई दिल्ली :लोकसभा में नारी शक्ति वंदन विधेयक पर बोलते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi ने स्पष्ट कहा कि विकसित भारत का सपना सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर या आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें महिलाओं की बराबर भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की 50% आबादी को नीति निर्धारण में सक्रिय भूमिका मिलनी चाहिए।
“विकसित भारत का मतलब सिर्फ सड़क और रेल नहीं”
पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत का अर्थ केवल बेहतर सड़कें, रेल या आर्थिक प्रगति नहीं है, बल्कि ऐसा भारत है जहां “सबका साथ, सबका विकास” का मंत्र नीति निर्माण में झलके और हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो।
महिला आरक्षण पर ऐतिहासिक पल
प्रधानमंत्री ने इसे भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास का अहम क्षण बताते हुए कहा कि अगर यह कदम 25-30 साल पहले उठाया गया होता, तो देश और आगे बढ़ चुका होता। उन्होंने कहा कि अब यह अवसर है कि हम इस ऐतिहासिक गलती को सुधारें।
“नारी शक्ति को उसका हक दे रहे हैं”
पीएम मोदी ने साफ कहा कि महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका अधिकार है। उन्होंने कहा,
“हम इस भ्रम में न रहें कि हम कुछ दे रहे हैं, यह उनका हक है, जिसे दशकों तक रोका गया।”
राजनीति से ऊपर उठकर सोचने की अपील
उन्होंने सभी दलों से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीतिक फायदे-नुकसान के नजरिए से न देखें।
“यह राष्ट्रहित का निर्णय है, इसे राजनीति के तराजू से मत तौलें।”
“क्रेडिट का ब्लैंक चेक तैयार”
पीएम मोदी ने विपक्ष को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें इस बिल का श्रेय लेने में कोई आपत्ति नहीं है।
“हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, आप ले लीजिए—मैं ब्लैंक चेक देने को तैयार हूं।”
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का जिक्र
उन्होंने बताया कि आज देश में 900 से अधिक शहरों में महिलाएं शहरी निकायों का नेतृत्व कर रही हैं। पंचायत स्तर पर भी महिलाओं की भागीदारी ने राजनीतिक चेतना को मजबूत किया है।
“नारी शक्ति नियत भी देखेगी”
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाएं केवल फैसलों को नहीं, बल्कि सरकार की नीयत को भी परखेंगी।
“हमारी नीयत में खोट हुई तो नारी शक्ति हमें माफ नहीं करेगी।”
सर्वसम्मति की अपील
पीएम मोदी ने कहा कि इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करना देश के लिए बेहतर होगा, क्योंकि सामूहिक शक्ति से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
प्रधानमंत्री का यह भाषण स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार महिला सशक्तिकरण को विकसित भारत के केंद्र में रखना चाहती है। अब नजर इस बात पर है कि यह पहल जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू होती है और देश की आधी आबादी को निर्णय प्रक्रिया में कितना वास्तविक स्थान मिल पाता है।














