प्रयागराज — हालिया आरोपों के बीच स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद की कानूनी स्थितियाँ और जटिल होती दिख रही हैं। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के दावों और पुलिस जांच के आधार पर धूमनगंज थाने (स्थानीय) में पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले में स्वयं के शिष्य दानंद गिरी समेत अन्य के नाम भी दर्ज किए गए हैं। प्राथमिकी धूमनगंज थाने में दर्ज कर केस की विवेचना जारी है। धूमनगंज थाने
घटना-क्रम और मेडिकल रिपोर्ट
शिकायत के बाद पुलिस ने बुधवार को दोनों नाबालिग पीड़ितों का मेडिकल परीक्षण कराकर उसमें पाए गए तथ्यों को केस डायरी में शामिल करने की दिशा में कदम उठाए हैं। शिकायतकर्ता आशुतोष ने मीडिया को बताया कि मेडिकल रिपोर्ट में नाबालिगों के साथ यौन शोषण के स्पष्ट संकेत दर्ज हैं और यह रिपोर्ट जांच के महत्वपूर्ण प्रमाणों में शामिल की जा रही है। पुलिस सूत्रों का भी कहना है कि मेडिकल जांच के निष्कर्षों ने जांच को निर्णायक दिशा दी है, पर आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक होने तक आगे के निष्कर्ष कोर्ट और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर निर्भर रहेंगे।
फिरोज़-डिजिटल साक्ष्य और सबूतों की प्रकृति
आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया कि जांच एजेंसियों को उन दस्तावेजों के साथ कुछ फोटो और वीडियो भी सौंपे गए हैं जो नाबालिगों से जुड़े हैं। पुलिस अब इन डिजिटल साक्ष्यों की सत्यता, तारीख-समय और स्रोत की फॉरेंसिक जाँच करा रही है ताकि यह स्थापित किया जा सके कि क्या प्रस्तुत सामग्री घटनास्थल/समय और आरोपों से मेल खाती है। डिजिटल साक्ष्य की जांच में मोबाइल, स्टोरेज डिवाइस और क्लाउड बैकअप की फॉरेंसिक वेरिफिकेशन शामिल होगी — और यदि आवश्यकता पड़ी तो विशेषज्ञों से तकनीकी सहायत भी ली जाएगी।
कानूनी कार्रवाई और हाईकोर्ट याचिका
जैसे-जैसे मामला गरमा रहा है, अभियुक्त ने गिरफ्तारी की आशंका के चलते इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। यह याचिका एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, जिसकी सुनवाई के लिए जस्टिस जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ का नाम उल्लेखित है। अदालत में पेश होने पर पुलिस अपनी ओर से अभी तक जो साक्ष्य और मेडिकल रिपोर्ट इकट्ठा कर चुकी है, उन्हें प्रस्तुत कर सकती है; अदालत के निर्णय के आधार पर अगला क़दम — अग्रिम जमानत दी जानी या गिरफ्तारी कर रिमांड के आदेश — तय होगा।
पुलिस की जांच-प्रक्रिया और संभावित परिणाम
पुलिस अधिकारियों ने माना है कि प्रकरण की गहन जाँच हो रही है। मामले की विवेचना में निम्न-प्रमुख कदम अपेक्षित हैं: पीड़ितों और संदिग्धों के बयान दर्ज करना, मेडिकल रिपोर्ट का फोरेंसिक विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी पड़ताल, और आश्रम/स्थल पर छानबीन। यदि जांच में आरोप पुष्ट होते हैं तो पोक्सो और संबंधित दंडात्मक धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई संभव है — लेकिन यह प्रक्रिया न्यायालयीन आदेश और फॉरेंसिक निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
शिकायत में किए गए अन्य आरोप और जांच का दायरा
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि केवल इन दो बच्चों तक ही सीमित नहीं, अन्य बच्चों से भी दुर्व्यवहार हुआ है तथा आश्रम में आर्थिक अनियमितताओं और करोड़ों रुपये के गबन के भी आरोप हैं। पुलिस ने कहा है कि आर्थिक मामलों और आश्रम-प्रबंधन से जुड़ी शिकायतों की स्वतंत्र रूप से अलग जाँच की जाएगी और आवश्यकता होने पर वेबसाइट/बैंक रेकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की भी पड़ताल की जाएगी। साथ ही जांच में किसी प्रभावशाली व्यक्ति के संलिप्त होने के दावों का भी सत्यापन किया जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का नजरिया (सामान्य व्याख्या)
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पोक्सो मामलों में मेडिकल रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, पर सिर्फ मेडिकल संकेत ही ठोस दोषारोपण नहीं करते — आरोपों की समग्र पद्धति और सबूतों का आपस में मिलान आवश्यक है। अदालतों में पीड़ित-हित में संवेदनशील प्रक्रिया अपनाई जाती है (जैसे-बालक की गोपनीयता, बाल-दोस्ताना माहौल में बयान दर्ज करना), और आरोपियों को भी कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है। यह भी आवश्यक है कि मीडिया और सार्वजनिक चर्चा आरोपित के प्रति पूर्वनिर्धारित दोषारोपण का रूप न ले — अपराध सिद्ध होने तक कानून प्रदेश में ‘न बेहद’ सिद्धांत लागू रहता है।
लोकल प्रशासन और आगे की संभावनाएँ
घटना के सार्वजनिक होने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस की सतर्कता बढ़ गई है। मामले के बड़े होने पर राज्य स्तर की विशेष जांच टीम (यदि आवश्यक समझी गई) गठित की जा सकती है और बाल संरक्षण समिति/पोक्सो कोर्ट से समन्वय बना कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अगली कानूनी कार्रवाई और जाँच-रिपोर्टें अदालत की सुनवाई के आधार पर सार्वजनिक होंगी।
नोट — संवेदनशीलता और सावधानी
इस खबर में उठाए गए सभी बिंदु वर्तमान जांच तथा शिकायतों पर आधारित आरोप/दावे हैं। मामला अभी जाँच के दायरे में है और किसी भी व्यक्ति को दोषी बताना केवल न्यायालयीन आदेशों और अंतिम फैसले के बाद ही सही होगा। नाबालिगों की पहचान-सुरक्षा, उनकी गोपनीयता और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए जांच और रिपोर्टिंग को आगे जारी रखा जा रहा है।
(प्रकरण की आगे की सुनवाई और पुलिस की जांच रिपोर्ट के आधार पर जैसे ही नए आधिकारिक विवरण सामने आएँगे, उनकी रिपोर्टिंग की जाएगी।)














