
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 को बुधवार को लोकसभा में पारित करा लिया। हालांकि, विपक्ष ने इस विधेयक को असंवैधानिक करार देते हुए इसका कड़ा विरोध किया। विपक्ष ने इसे मुसलमानों के अधिकारों के खिलाफ बताते हुए सरकार पर निशाना साधा और इस मुद्दे पर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया।
लोकसभा में विधेयक पास, विपक्ष की मजबूत उपस्थिति
मोदी सरकार ने लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 को पेश किया, जिसे बहुमत के साथ पारित कर दिया गया। विधेयक के पक्ष में 288 सांसदों ने मतदान किया, जबकि 232 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट डाला। हालांकि, सरकार ने विधेयक पारित करवा लिया, लेकिन इस दौरान विपक्ष की मजबूत उपस्थिति देखी गई।
इससे पहले विपक्ष के कई मुद्दों पर बिखराव की स्थिति बनी हुई थी—चाहे वह राज्य चुनावों में कमजोर प्रदर्शन हो या संसद में अडानी विवाद। लेकिन वक्फ बिल के मुद्दे पर विपक्ष ने एक साथ खड़े होकर अपनी ताकत का एहसास कराया। यह ऐसा प्रदर्शन था, जो हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भी नजर नहीं आया था।
विपक्ष की आक्रामक रणनीति और संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट
विपक्ष ने शुरुआत से ही इस विधेयक के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। 8 अगस्त 2023 को जब यह विधेयक पहली बार लोकसभा में पेश किया गया, तो विपक्ष ने इसे लेकर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया था।
बाद में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) द्वारा सुझाए गए 14 संशोधनों को मंजूरी दी। इसके बाद, जेपीसी की रिपोर्ट 13 फरवरी 2024 को संसद में पेश की गई, लेकिन उस समय विपक्ष ने हंगामा किया और कई सांसदों ने वॉकआउट किया।
बीजेपी को समर्थन, विपक्ष को संख्याबल का भरोसा
2 अप्रैल को जब यह विधेयक दोबारा लोकसभा में पेश हुआ, तो यह पहले से ही स्पष्ट था कि जद (यू) और टीडीपी के समर्थन के चलते बीजेपी को इसे पारित कराने में कोई कठिनाई नहीं होगी। हालांकि, 232 सांसदों द्वारा विरोध में मतदान करना विपक्ष के लिए एकजुटता और संख्याबल बढ़ाने वाले संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
विपक्ष की एकजुटता: जो चुनावों में नहीं दिखी, वो वक्फ मुद्दे पर दिखी
हाल ही में विपक्ष कई बड़े मुद्दों पर बिखरा हुआ नजर आया। राज्यों के चुनावों में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और एनसीपी जैसे दल एकजुटता नहीं दिखा सके। लेकिन वक्फ विधेयक के मुद्दे पर सभी दलों ने एक स्वर में इसका विरोध किया।
सभी विपक्षी दलों ने विधेयक को बताया असंवैधानिक
लोकसभा में विपक्ष ने कड़ी तैयारी के साथ सरकार को घेरने की कोशिश की। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (TMC), डीएमके, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), आम आदमी पार्टी (AAP) समेत कई दलों ने विधेयक का विरोध किया और इसे मुसलमानों की जमीन हड़पने वाला कानून करार दिया।
- कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “इस विधेयक के जरिए सरकार का एकमात्र एजेंडा भारत माता को बांटना है।”
- राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि “यह विधेयक केवल एक संशोधन नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का उल्लंघन करने का जरिया साबित होगा।”
- समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह ने कहा कि “यह विधेयक न केवल मुसलमानों के बुनियादी अधिकारों बल्कि समानता के अधिकार के खिलाफ भी है।”
- वाईएसआर कांग्रेस के पीवी मिथुन रेड्डी ने कहा कि “विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 के खिलाफ है।”
- माकपा के के. राधाकृष्णन ने इसे “धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला” बताया।
- AAP के गुरमीत सिंह मीत हेयर ने कहा कि “बीते 11 वर्षों से मुसलमानों के खिलाफ सरकार की नीति साफ नजर आ रही है।”
- JMM के विजय कुमार हंसदाक ने भी विधेयक का विरोध किया।
ओवैसी का तीखा हमला, सदन में विधेयक की प्रति फाड़ी
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया। उन्होंने संसद में विधेयक की प्रति फाड़ते हुए इसे “भारत के ईमान पर हमला” बताया।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विधेयक के जरिए देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है।”
किन मुद्दों पर पहले बिखरा था विपक्ष?
विपक्ष पिछले कुछ समय से अलग-अलग मुद्दों पर बिखरा हुआ नजर आया था।
- परिसीमन विवाद – DMK ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की बैठक बुलाई थी, लेकिन हिंदी पट्टी के कई दलों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया।
- अडानी विवाद – कांग्रेस ने अडानी मामले में बीजेपी पर हमले किए, लेकिन सपा और टीएमसी ने उनका साथ नहीं दिया।
- इंडिया गठबंधन की टूट – कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव में साथ नहीं लड़ीं। टीएमसी और कांग्रेस बंगाल में आमने-सामने रहीं। महाराष्ट्र में भी सहयोगी दलों में तालमेल की कमी देखी गई।
क्या विपक्ष को मिला नया मुद्दा?
विपक्ष की इस एकजुटता को लोकसभा चुनाव 2024 से पहले एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। 232 वोटों का आंकड़ा विपक्ष के लिए बूस्टर डोज साबित हो सकता है। इस मुद्दे ने वह कर दिखाया, जो विपक्षी नेता राहुल गांधी, अखिलेश यादव, शरद पवार और ममता बनर्जी हालिया चुनावों में नहीं कर पाए थे।
आगे क्या होगा?
अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां सरकार के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है। विपक्ष इस विधेयक को अदालत में चुनौती देने की भी तैयारी कर रहा है।
इस बिल को लेकर अब सियासी माहौल और गरमाने की संभावना है। विपक्ष इसे 2024 चुनाव से पहले ध्रुवीकरण का मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर सकता है।
📌 क्या वक्फ संशोधन विधेयक विपक्ष को 2024 में मजबूती देगा?
📌 क्या राज्यसभा में इस पर सरकार को मुश्किल होगी?
📌 क्या विपक्ष इस मुद्दे को मुस्लिम समुदाय के वोट बैंक को साधने के लिए इस्तेमाल करेगा?
आने वाले दिनों में इस पर और सियासी घमासान देखने को मिल सकता है।

VIKAS TRIPATHI
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