मिडिल क्लास, किसान और निवेशकों की निगाहें टिकीं, इंफ्रा और ग्रोथ पर रहेगा फोकस
नई दिल्ली: देश का आम बजट आज संसद में पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बजट के साथ एक नया रिकॉर्ड बनाने जा रही हैं, क्योंकि यह उनका लगातार 9वां केंद्रीय बजट होगा। वर्ष 2019 में अपने पहले बजट में दशकों पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए उन्होंने चमड़े के ब्रीफकेस की जगह पारंपरिक ‘बही-खाता’ अपनाया था। पिछले चार वर्षों की तरह इस बार भी बजट पूरी तरह पेपरलेस रूप में पेश किया जाएगा।
इस बजट से मिडिल क्लास, किसानों, सीनियर सिटिज़न्स से लेकर शेयर बाजार के निवेशकों तक को खास उम्मीदें हैं। हालांकि संकेत यही हैं कि यह बजट बड़ा झटका देने वाला नहीं, बल्कि संतुलन और निरंतरता पर आधारित होगा।
ग्रोथ की रफ्तार बढ़ाने पर जोर
इंफ्रा, सड़क, रेलवे और डिफेंस में बढ़ सकता है खर्च
सरकार आर्थिक विकास को रफ्तार देने के लिए खर्च बढ़ा सकती है, खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क, रेलवे और डिफेंस जैसे सेक्टरों में। कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) यानी सरकारी निवेश इस बजट की रीढ़ बना रह सकता है। PSU और बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स के जरिए रोजगार और नौकरियों को सपोर्ट देने की रणनीति रहेगी।
घाटे पर भी रहेगी नजर
फिस्कल डिसिप्लिन के साथ खर्च का संतुलन
सरकार खर्च बढ़ाने के साथ-साथ राजकोषीय घाटे को काबू में रखने की कोशिश करेगी।
अनुमान है कि फिस्कल डेफिसिट को GDP के 4 से 4.5 प्रतिशत के दायरे में रखने का लक्ष्य रखा जा सकता है। इस बजट में बहुत बड़े या चौंकाने वाले फैसलों की बजाय स्थिर और अनुमानित नीति देखने को मिल सकती है।
मिडिल क्लास को मिल सकती है हल्की राहत
टैक्स स्लैब या स्टैंडर्ड डिडक्शन में मामूली बदलाव संभव
मिडिल क्लास और सैलरीड वर्ग को लेकर सरकार कुछ सीमित टैक्स राहत दे सकती है।
टैक्स स्लैब या स्टैंडर्ड डिडक्शन में हल्का बदलाव संभव है, हालांकि बड़े टैक्स कट की उम्मीद कम मानी जा रही है।
सीनियर सिटिजन और सोशल सेक्टर पर फोकस
टारगेटेड योजनाओं पर जोर, बड़े फ्रीबीज से दूरी
बुजुर्गों के लिए टैक्स, पेंशन या हेल्थ से जुड़ी कुछ राहत मिल सकती है।
इसके अलावा आदिवासी इलाकों, महिलाओं और बच्चों के लिए टारगेटेड योजनाओं का ऐलान संभव है।
सरकार की रणनीति बड़े फ्रीबीज की बजाय सीधे लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं पर रहने की उम्मीद है।
भविष्य के सेक्टरों पर दांव
EV, ग्रीन एनर्जी, डिफेंस और फिनटेक को बढ़ावा
इस बजट में EV, ऑटोमोबाइल और ग्रीन एनर्जी सेक्टर को बढ़ावा मिल सकता है।
रिन्यूएबल एनर्जी के साथ-साथ न्यूक्लियर और पावर सेक्टर पर भी खास जोर रहने की संभावना है।
डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और फिनटेक जैसे सेक्टरों से जुड़े कुछ बड़े ऐलान निवेशकों का ध्यान खींच सकते हैं।
शेयर बाजार के लिए राहत की उम्मीद
निवेशकों का भरोसा बनाए रखने की कोशिश
बजट को लेकर संकेत हैं कि यह शेयर बाजार को डराने वाला नहीं होगा।
कैपिटल गेन टैक्स या म्यूचुअल फंड निवेश पर कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार का फोकस बाजार का सेंटीमेंट पॉजिटिव बनाए रखने पर रहेगा, ताकि ज्यादा उतार-चढ़ाव न हो।
कुल मिलाकर, यह बजट स्थिरता, विकास और संतुलन का संदेश देने वाला हो सकता है—जिसमें बड़े वादों से ज्यादा व्यावहारिक और लक्षित फैसले देखने को मिलें।














