Friday, February 27, 2026
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SIR का सियासी झटका: ओवर कॉन्फिडेंस में फंसी बीजेपी, 4 करोड़ वोटरों की गुत्थी

उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया अब सिर्फ प्रशासनिक कवायद नहीं रही, बल्कि यह 2027 विधानसभा चुनाव की दिशा और दशा तय करने वाला राजनीतिक भूचाल बन चुकी है। जिस प्रक्रिया को वोटर लिस्ट की ‘सफाई’ कहा जा रहा था, वही अब सत्तारूढ़ बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण बन गई है।

बीजेपी के भीतर बेचैनी इतनी गहरी है कि पार्टी कार्यकर्ता से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक सार्वजनिक मंचों से अपनी आशंका ज़ाहिर कर चुके हैं। वजह साफ है—
डेडलाइन में महज़ 10–12 दिन बचे हैं और अब भी 15 से 20 प्रतिशत मतदाताओं के SIR फॉर्म जमा नहीं हुए हैं। यही कारण है कि सीएम योगी ने विधायकों, मंत्रियों और संगठन के हर स्तर को युद्धस्तर पर मैदान में उतरने का निर्देश दिया है।


15.44 करोड़ से 12 करोड़: कहां गायब हो गए 4 करोड़ वोटर?

जनवरी 2025 में उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में 15 करोड़ 44 लाख नाम दर्ज थे। तर्क के मुताबिक 2026 तक यह संख्या बढ़नी चाहिए थी, लेकिन SIR के बाद यह घटकर करीब 12 करोड़ रह गई। यानी लगभग 4 करोड़ मतदाता लापता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे बीजेपी के लिए “बड़ा झटका” बताते हुए दावा किया कि
इनमें से 85 से 90 प्रतिशत वोटर बीजेपी समर्थक हैं,
खासकर शहरी क्षेत्रों में यह नुकसान सबसे ज़्यादा है।

यहीं से सियासत गरमा गई।


शहरी इलाकों में क्यों टूटी बीजेपी की पकड़?

लखनऊ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, कानपुर, वाराणसी और गोरखपुर जैसे शहरों में बड़ी संख्या में वे लोग रहते हैं जो दूसरे जिलों से आकर बस गए थे
SIR के दौरान “एक व्यक्ति–एक स्थान” के नियम को सख्ती से लागू किया गया।

नतीजा यह हुआ कि—

कई मतदाताओं ने अपने मूल जिले में फॉर्म भर दिया

शहरी वोटर लिस्ट में भारी कटौती हो गई

और चूंकि शहरी मतदाता बीजेपी का मज़बूत आधार माने जाते हैं, इसलिए यह गिरावट पार्टी के लिए राजनीतिक झटका बन गई।


लापरवाही बनाम चौकसी: यहां चूक गई बीजेपी?

बीजेपी के आंतरिक आकलन में एक और अहम बात सामने आई है—

शहरी मतदाता SIR को लेकर गंभीर नहीं रहे

फॉर्म नहीं भरने पर नाम कट जाएगा, इस चेतावनी को हल्के में लिया गया

वहीं समाजवादी पार्टी के समर्थक ज़्यादा सतर्क रहे और समय पर फॉर्म जमा कर दिए

यही वजह है कि बीजेपी मानती है कि ओवर कॉन्फिडेंस ने उसे इस संकट में डाला।


समुदायिक समीकरण भी बने वजह?

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक—

मुस्लिम मतदाताओं ने नागरिकता और सरकारी योजनाओं से जुड़ी आशंकाओं के चलते तेज़ी से SIR फॉर्म जमा किए

जबकि हिंदू मतदाताओं में वैसी तत्परता नहीं दिखी

यही अंतर अब वोटर लिस्ट के आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।


सीएम योगी का अलार्म: “यह सिर्फ लिस्ट नहीं, चुनाव की धुरी है”

14 दिसंबर को प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के स्वागत समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ असाधारण रूप से चिंतित और आक्रामक दिखे।

उन्होंने साफ कहा—

आने वाले चुनाव बूथ स्तर पर लड़े जाएंगे

और SIR ही उसका सबसे बड़ा आधार है

सीएम ने कार्यकर्ताओं को चेताया कि—“काग़ज़ों में 100% काम दिखता है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई कुछ और होती है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि—

कुछ जिलों में बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम तक जोड़ दिए गए

पिता-पुत्र-दादा की उम्र का गणित तक गड़बड़ है

असम के गांवों से जुड़े फर्जी नाम सामने आए हैं


फॉर्म-6 और फॉर्म-7: आख़िरी लड़ाई अभी बाकी

चुनाव आयोग ने 14 दिन का अतिरिक्त समय दिया है, यानी अब गिनती के दिन बचे हैं।

सीएम योगी का स्पष्ट आदेश—

हर बूथ से फर्जी नामों पर आपत्ति (फॉर्म-7)

हर वास्तविक मतदाता का नाम जोड़ना (फॉर्म-6)

गांव-गांव जाकर ड्राफ्ट सूची का सत्यापन

उनका संदेश साफ है—“चुनाव की तीन-चौथाई मेहनत अभी करनी है, तभी 2027 में एक-चौथाई मेहनत काफी होगी।”


अखिलेश यादव का पलटवार: “गड़बड़ी बीजेपी की, नुकसान भी बीजेपी का”

सीएम योगी के दावे पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखा तंज कसा।

उन्होंने कहा—

अगर 4 करोड़ हटे वोटरों में 85–90% बीजेपी के हैं,
तो इसका मतलब—

या तो पीडीए की चौकसी से बीजेपी की जुगाड़ फेल हो गई

या फिर सारे फर्जी वोटर बीजेपी के ही थे

अखिलेश ने गणित पेश करते हुए कहा—

3.4 करोड़ वोटों को 403 सीटों से भाग दें

तो हर सीट पर बीजेपी को करीब 84,000 वोटों का नुकसान

उनका दावा—“इस हिसाब से बीजेपी 2027 की रेस से बाहर हो जाएगी।”


क्या SIR बनेगा सत्ता परिवर्तन का ट्रिगर?

SIR अब सिर्फ वोटर लिस्ट की प्रक्रिया नहीं रह गई है।
यह—

संगठन की सतर्कता

कार्यकर्ताओं की सक्रियता

और वोटरों की जागरूकता

तीनों की अग्निपरीक्षा बन चुकी है।

अब सवाल यही है—
क्या बीजेपी आख़िरी दिनों में नुकसान की भरपाई कर पाएगी?
या फिर SIR, 2027 में सत्ता परिवर्तन की पटकथा लिख चुका है?

जवाब आने वाले दिनों में, बूथ स्तर पर मिलेगा।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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