
सहारनपुर – भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता संजय जोशी के जन्मदिन के अवसर पर सहारनपुर में लगाए गए होर्डिंग्स ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। इन होर्डिंग्स के माध्यम से उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएँ दी गईं, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ भी सामने आ रहे हैं।
भाजपा नेताओं में बेचैनी, गुटबाजी के संकेत?
संजय जोशी को भाजपा से अलग-थलग किए जाने के बावजूद, उनकी बढ़ती लोकप्रियता और कार्यकर्ताओं में उनकी पकड़ बनी हुई है। इस बार उनके जन्मदिन पर सहारनपुर में लगे पोस्टर्स और बैनरों ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। अमित शाह और नरेंद्र मोदी के कट्टर समर्थकों में इस घटना को लेकर चिंता देखी जा रही है कि यह कहीं पार्टी में गुटबाजी को बढ़ावा देने वाला कदम तो नहीं है।
राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल जन्मदिन की बधाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भाजपा के आंतरिक समीकरणों में बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। खबरों के अनुसार, संघ और भाजपा के कुछ असंतुष्ट नेताओं के बीच संजय जोशी को दोबारा महत्वपूर्ण भूमिका देने की चर्चा भी चल रही है।

सहारनपुर से क्यों शुरू हुई यह हलचल?
सहारनपुर को भाजपा और संघ की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। बताया जा रहा है कि संजय जोशी की संगठनात्मक क्षमता और उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए कुछ कार्यकर्ता उन्हें फिर से पार्टी नेतृत्व में देखना चाहते हैं।
अमित शाह और मोदी समर्थकों की चिंता
संजय जोशी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के करीबी नेताओं द्वारा किनारे कर दिया गया था। ऐसे में, उनके समर्थन में सहारनपुर में अचानक इस तरह के होर्डिंग्स लगना, राजनीतिक रणनीति का संकेत माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
6 अप्रैल को संजय जोशी का जन्मदिन है और इस मौके पर भाजपा के भीतर और बाहर के समीकरणों पर नजर रखी जा रही है। क्या संघ संजय जोशी को फिर से भाजपा की मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रहा है? या यह सिर्फ स्थानीय नेताओं की व्यक्तिगत पसंद है?
सहारनपुर में यह मामला तेजी से तूल पकड़ रहा है और आने वाले दिनों में भाजपा की राजनीति पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

VIKAS TRIPATHI
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