नई दिल्ली: मणिपुर में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने मणिपुर के सभी बीजेपी और एनडीए सहयोगी दलों के विधायकों को दिल्ली तलब किया है। सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक राज्य में नई सरकार के गठन और राजनीतिक पुनर्गठन को लेकर बेहद अहम मानी जा रही है।
बताया जा रहा है कि 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन की अवधि समाप्त होने से पहले राज्य में सरकार बनाने की आखिरी कोशिश की जा रही है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि एक सप्ताह के भीतर मणिपुर को नई सरकार मिल सकती है।
2 फरवरी दोपहर 2 बजे तक दिल्ली पहुंचने का निर्देश
बीजेपी हाईकमान की ओर से जारी निर्देश के अनुसार सभी विधायकों को 2 फरवरी को दोपहर 2 बजे तक दिल्ली पहुंचने को कहा गया है। कई विधायक 1 फरवरी को ही दिल्ली रवाना होने वाले हैं।
सूत्रों के अनुसार यह संदेश बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी के माध्यम से भेजा गया, जबकि पार्टी के पूर्वोत्तर समन्वयक संबित पात्रा ने व्यक्तिगत रूप से विधायकों से संपर्क कर बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहा है।
राष्ट्रपति शासन के बीच अहम बैठक
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब मणिपुर में 13 फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू है और राज्य विधानसभा का कामकाज निलंबित है।
12 फरवरी को राष्ट्रपति शासन के एक साल पूरे होने वाले हैं, जिससे इस बैठक का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। माना जा रहा है कि इस दौरान शासन व्यवस्था, राजनीतिक स्थिरता और राज्य के भविष्य के रोडमैप पर गंभीर मंथन होगा।
एजेंडे पर सस्पेंस, अटकलें तेज
हालांकि बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने बैठक के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है, लेकिन इस बुलावे ने राज्य में संभावित नेतृत्व परिवर्तन, नई सरकार की संरचना और राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलों को तेज कर दिया है।
राजनीतिक अनिश्चितता पर लग सकता है विराम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मणिपुर में लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक और राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए यह बैठक बेहद निर्णायक साबित हो सकती है। विधायक और पार्टी पदाधिकारी दिल्ली में होने वाले घटनाक्रमों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति शासन
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी 2025 से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। अब राष्ट्रपति शासन की अवधि समाप्त होने से पहले राज्य में निर्वाचित सरकार बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं।














