
बरेली के शाही-शीशगढ़ क्षेत्र में महिलाओं की सिलसिलेवार हत्या के पीछे एक साइको किलर का हाथ होने का खुलासा हुआ है। आरोपी कुलदीप, जो नवाबगंज के बाकरगंज गांव का निवासी है, अपनी सौतेली मां की क्रूरता और पत्नी के छोड़ जाने के बाद महिलाओं के प्रति उग्र हो गया था। अकेली महिलाओं को देखकर वह अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाता और उन्हें मौत के घाट उतार देता।
गला घोंटकर करता था हत्याएं
जून 2023 से जुलाई 2024 के बीच शाही-शीशगढ़ क्षेत्र में गला घोंटकर महिलाओं की हत्याएं हुईं। इन हत्याओं में कुल नौ घटनाएं सामने आईं, जिनमें से पुलिस ने तीन का खुलासा किया, लेकिन छह घटनाओं का रहस्य बना रहा। तीन जुलाई को फिर एक महिला की हत्या गला घोंटकर की गई।
एसएसपी ने शुरू किया ‘ऑपरेशन तलाश’
बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य ने ऑपरेशन तलाश की शुरुआत की और वार रूम की स्थापना कर इस रहस्य को सुलझाने के लिए काम शुरू किया। पुलिसकर्मी गांव-गांव की पगडंडियों को नापते हुए आरोपी के हुलिए के बारे में पता लगाने में जुटे। तीन स्केच जारी किए गए, जिनमें से एक की पुष्टि हुई, और इसी स्केच के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंच सकी।
पारिवारिक तनाव के कारण बना साइको किलर
कुलदीप की दो सगी बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। उसकी मां की मृत्यु के बाद पिता ने दूसरी शादी कर ली, जिससे कुलदीप में अपनी सौतेली मां के प्रति विद्वेष की भावना आ गई। 2014 में कुलदीप की शादी हुई, लेकिन उसकी पत्नी से भी उसका संबंध सामान्य नहीं था। 2018 में उसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई, जिसके बाद कुलदीप कुंठित हो गया और नशे का आदी हो गया।
घर छोड़कर खेतों और जंगलों में भटकता था
कुलदीप ने 1 जुलाई 2023 को पहली हत्या की और उसके बाद विभिन्न स्थानों पर अकेली महिलाओं की हत्याएं करता रहा। वह गन्ने के खेतों में हमले करता था, जहां उसे छिपने की आड़ मिलती थी।
हत्या के बाद ट्रॉफी के रूप में रखता था निशानी
एसएसपी के अनुसार, कुलदीप हत्या के बाद ट्रॉफी के रूप में कुछ निशानी अपने पास रखता था। अनीता देवी की हत्या के बाद उसने उसका ब्लाउज का टुकड़ा, बिंदी, लिपिस्टिक, और वोटर आईडी कार्ड अपने पास रखा। इसी तरह अन्य हत्याओं के बाद भी वह कुछ न कुछ अपने साथ ले जाता था और हर महिला का एक नया नाम रखता था।
पुलिस टीम को मिला पुरस्कार
इस केस के राजफाश में शामिल पुलिसकर्मियों की पूरी टीम को एसएसपी ने 25 हजार रुपये नगद पुरस्कार से पुरस्कृत किया। इसके अलावा, डीजीपी मुख्यालय से भी इस मामले की निगरानी की जा रही थी, और इन पुलिसकर्मियों के लिए मेडल की सिफारिश की गई है।














