देश के अगले और 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) बनने जा रहे जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि वे अपने कार्यकाल की शुरुआत न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने और मध्यस्थता (मीडिएशन) को बढ़ावा देने से करेंगे। शनिवार को सुप्रीम कोर्ट प्रेस के साथ हुई अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि मुकदमों की बढ़ती संख्या न्याय व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती है और इसका समाधान उनकी शीर्ष प्राथमिकता होगी।
सुप्रीम कोर्ट में 90 हजार लंबित मामले
जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या 90 हजार तक पहुँच चुकी है। उन्होंने कहा,
“हम सभी न्यायाधीश पहले से अधिक काम कर रहे हैं, लेकिन मामलों की फाइलिंग लगातार बढ़ रही है। इसका एक कारण यह भी है कि अब मुकदमा दर्ज करना आसान हो गया है।” उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे मामलों की पहचान की जा रही है, जिनके निपटारे से देशभर की अदालतों में हजारों मामलों का स्वतः समाधान हो सकता है।
‘लिंक्ड केस’ के समाधान से तेजी आएगी न्याय प्रक्रिया
उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली में भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक फैसले से 1200 से अधिक मामले एक साथ निपट गए थे। “इसी तरह देशभर से ऐसे मामले जुटाए जाएंगे जिनके साथ बड़ी संख्या में केस जुड़े होते हैं—कहीं 1000, कहीं 500, कहीं 200—ताकि प्राथमिकता के आधार पर उनका रोडमैप तैयार किया जा सके।”
मध्यस्थता बनेगी गेम चेंजर
जस्टिस सूर्यकांत के अनुसार भविष्य में मेडिएशन न्यायिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा बनने वाला है। उन्होंने कहा कि बड़ी कंपनियाँ, बैंक और बीमा संस्थान भी अब विवाद समाधान के लिए मध्यस्थता को प्राथमिकता दे रहे हैं। “उच्च न्यायालय और जिला न्यायालयों में लंबित मुकदमों को कम करने में मीडिएशन गेम चेंजर साबित हो सकती है,” उन्होंने कहा।
नए हाईकोर्ट बेंच पर फैसला केवल सुप्रीम कोर्ट नहीं ले सकता
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ हाईकोर्ट बेंच बनाने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि यह केवल सुप्रीम कोर्ट का विषय नहीं है, बल्कि राज्य सरकार और अन्य संस्थागत हितधारकों का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान होता है। “उत्तर प्रदेश बड़ा राज्य है, यहाँ किसी नई पीठ के गठन से पहले गहन विचार-विमर्श आवश्यक है।”
राष्ट्रीय महत्व के मामले कभी भी सुने जा सकते हैं
जस्टिस सूर्यकांत ने इस धारणा को खारिज किया कि बड़े वकीलों की अनुपस्थिति में महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई टल जाती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के मामलों को कभी भी सुना जा सकता है और न्यायाधीश रात में ही फाइल पढ़कर तैयारी कर लेते हैं।
एआई के उपयोग पर निगरानी
एआई को लेकर उन्होंने कहा कि इसके फायदे भी हैं और कमियाँ भी। सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामलों की भी समीक्षा करेगा जिनमें चैटजीपीटी जैसे टूल्स की गलतियों के कारण विवाद पैदा हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोग अब भी चाहते हैं कि उनके मामले की सुनवाई एक जज ही करे, इसलिए चेक बाउंस से जुड़े वर्चुअल कोर्ट बंद करने का विचार भी विचाराधीन है।
सोशल मीडिया ट्रोलिंग का जजों पर प्रभाव नहीं होना चाहिए
उन्होंने साफ कहा कि सोशल मीडिया की टिप्पणियों का न्याय प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं होता और न ही होना चाहिए।
“असल में यह सोशल नहीं, अनसोशल मीडिया है,” उन्होंने कहा। उनके अनुसार न्यायिक स्वतंत्रता सर्वोपरि है और जजों को किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी बनाएगी समारोह को विशेष
जस्टिस सूर्यकांत का शपथ ग्रहण समारोह ऐतिहासिक होने जा रहा है। नेपाल, भूटान, श्रीलंका, केन्या, मॉरिशस, ब्राज़ील और मलेशिया के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश और उनके परिवार इस समारोह में शामिल होंगे।














