नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में 19 फरवरी को आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भव्य उद्घाटन किया। यह सम्मेलन न केवल भारत बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। इस वैश्विक मंच पर 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, 20 से ज्यादा राष्ट्राध्यक्ष, 30 अंतरराष्ट्रीय संगठन और 500 से अधिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विशेषज्ञ और उद्योग जगत के दिग्गज शामिल हुए।
कार्यक्रम में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम सहित कई वैश्विक नेता मौजूद रहे।
‘AI का भविष्य इंसानों के लिए’ — पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत AI को केवल तकनीक नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम मानता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का विज़न “AI for All” है — यानी ऐसी तकनीक जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया की नींव ने देश को AI क्रांति के लिए तैयार किया है। आज भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणाली, मजबूत भुगतान नेटवर्क और तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम है, जो AI के विकास और उपयोग के लिए उपयुक्त आधार प्रदान करता है।

10 साल में भारत का डिजिटल बदलाव — मैक्रों
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘नमस्ते’ से की और भारत की डिजिटल प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत ने असाधारण बदलाव देखा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक दशक पहले मुंबई का एक स्ट्रीट वेंडर बैंक खाता नहीं खोल पाता था, लेकिन आज वही व्यक्ति मोबाइल फोन के जरिए डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रहा है।
मैक्रों ने भारत के ‘इंडिया स्टैक’ मॉडल की प्रशंसा करते हुए कहा कि 1.4 अरब लोगों के लिए डिजिटल पहचान प्रणाली, हर महीने 20 अरब से अधिक लेन-देन करने वाला पेमेंट सिस्टम और 50 करोड़ से अधिक डिजिटल हेल्थ आईडी — ये उपलब्धियां दुनिया में अनोखी हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो अन्य देशों के लिए प्रेरणा बन सकता है।
#WATCH | Delhi: At the #IndiaAIImpactSummit2026, French President Emmanuel Macron says, “10 years ago, a street vendor in Mumbai could not open a bank account. No address, no papers, no access and today the same vendor accepts payments on his phone…”
(Source: DD News) pic.twitter.com/GYzgmu1Eqg
— ANI (@ANI) February 19, 2026
ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा AI सम्मेलन
केंद्रीय रेल और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह ग्लोबल साउथ का पहला और अब तक का सबसे बड़ा AI शिखर सम्मेलन है। 118 देशों की भागीदारी इसे वैश्विक स्तर पर ऐतिहासिक बनाती है।
उन्होंने बताया कि सरकार AI को लोकतांत्रिक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत एक कॉमन कंप्यूट प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है, जहां स्टार्टअप्स, शोधकर्ता, शिक्षाविद और छात्र बेहद सस्ती दरों पर 38,000 GPUs का उपयोग कर सकते हैं। जल्द ही इसमें 20,000 और GPUs जोड़े जाएंगे।
वैष्णव ने कहा, “हम कंप्यूट को पब्लिक गुड मानते हैं। जब हम AI के फायदों का उपयोग कर रहे हैं, तो हमें उसके संभावित खतरों को कम करने के लिए भी मिलकर समाधान ढूंढना होगा। AI के केंद्र में मानव सुरक्षा और गरिमा होनी चाहिए।”
उद्योग जगत की भागीदारी
कार्यक्रम में टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि भारत AI को लेकर आशावादी राष्ट्र है। उन्होंने कहा कि भारत ने पहले ही दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर दिखाया है और अब AI के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
इसके अलावा गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने भी प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। माना जा रहा है कि इस दौरान AI सहयोग, रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
#WATCH | Delhi | At the #IndiaAIImpactSummit2026, Union Minister Ashwini Vaishnaw says, “While we harness the benefits of AI, we must also find collective solutions for mitigating the risks. By placing human safety and dignity at the heart of AI, we can move forward with… pic.twitter.com/umXIsfF1Va
— ANI (@ANI) February 19, 2026
वैश्विक सहयोग और नीति निर्माण पर जोर
सम्मेलन में AI के नैतिक उपयोग, डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, रोजगार सृजन और कौशल विकास जैसे मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा हुई। कई देशों ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल को अपनाने में रुचि दिखाई।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वैश्विक स्तर पर AI गवर्नेंस के लिए सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि AI का विकास मानवाधिकारों और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप होना चाहिए।
भारत की वैश्विक भूमिका मजबूत
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत केवल AI तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि नीति, नवाचार और वैश्विक सहयोग का अग्रणी केंद्र बनना चाहता है।
यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब दुनिया AI के अवसरों और चुनौतियों दोनों से जूझ रही है। ऐसे में भारत ने ‘मानव-केंद्रित AI’ का जो संदेश दिया है, वह वैश्विक विमर्श को नई दिशा दे सकता है।
भारत मंडपम से उठी यह आवाज अब विश्व मंच पर गूंज रही है — AI इंसानों के लिए, इंसानों द्वारा और इंसानों के हित में।














