नई दिल्ली: भारत के प्रशासनिक इतिहास में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। आज़ादी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अपने पारंपरिक स्थान साउथ ब्लॉक से शिफ्ट होकर नए परिसर में जाएगा। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री कार्यालय को सेंट्रल विस्टा परियोजना के अंतर्गत बने अत्याधुनिक ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में स्थानांतरित किया जाएगा।
यह कदम न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह नए भारत की कार्यसंस्कृति और आधुनिक शासन व्यवस्था का भी प्रतीक माना जा रहा है। अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक में ही संचालित होता रहा है, जो ब्रिटिश कालीन स्थापत्य और भारत के सत्ता केंद्र का प्रतीक रहा है।
सेंट्रल विस्टा परियोजना का अहम हिस्सा है ‘सेवा तीर्थ’
नया ‘सेवा तीर्थ’ परिसर सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का एक महत्वपूर्ण घटक है। इस परिसर को आधुनिक तकनीक, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और सुचारु प्रशासनिक कार्यप्रणाली को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। यहां प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ-साथ उच्चस्तरीय बैठकों, रणनीतिक निर्णयों और प्रशासनिक समन्वय के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नए परिसर में कामकाज अधिक पारदर्शी, कुशल और डिजिटल-अनुकूल होगा, जिससे शासन की गति और प्रभावशीलता बढ़ेगी।

साउथ और नॉर्थ ब्लॉक बनेंगे ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’
PMO के शिफ्ट होने के बाद साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को खाली कर दिया जाएगा। इसके बाद इन ऐतिहासिक इमारतों को ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ में परिवर्तित किया जाएगा। यह संग्रहालय भारत के प्रशासनिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विकास की यात्रा को दर्शाएगा।
आम जनता के लिए खुलने वाला यह संग्रहालय देशवासियों को यह समझने का अवसर देगा कि किस तरह भारत ने औपनिवेशिक शासन से निकलकर एक सशक्त लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बनाई। इसमें ऐतिहासिक दस्तावेज़, प्रशासनिक फैसले, दुर्लभ अभिलेख और आधुनिक भारत की शासन व्यवस्था को दर्शाने वाली प्रदर्शनी शामिल होंगी।
परंपरा से आधुनिकता की ओर एक बड़ा कदम
प्रधानमंत्री कार्यालय का यह स्थानांतरण परंपरा और आधुनिकता के संगम का प्रतीक माना जा रहा है। जहां एक ओर ऐतिहासिक इमारतों को संरक्षित कर उन्हें जनता के लिए खोला जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शासन व्यवस्था को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप ढाला जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव आने वाले वर्षों में भारत की प्रशासनिक संस्कृति को नई दिशा देगा और सेंट्रल विस्टा को देश के लोकतांत्रिक तंत्र का जीवंत केंद्र बनाएगा।














