Monday, February 2, 2026
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ED ने पश्चिम बंगाल—झारखंड के कोयला सिंडिकेट पर मारा बड़ा छापा

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल और झारखंड में कथित कोयला सिंडिकेट से जुड़े धनशोधन की जांच में समन्वित कार्रवाई कर कुल 44 स्थानों पर छापेमारी की। एजेंसी ने बताया है कि छापों में 14 करोड़ रुपये से अधिक नकदी और सोने के आभूषण बरामद किए गए हैं।

कहां-कहां और किसके ठिकानों पर रेड हुई
ED की कोलकाता यूनिट ने पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर, पुरुलिया, हावड़ा और कोलकाता में 24 स्थानों पर तलाशी ली जबकि Ranchi/झारखंड टीम ने धनबाद और दुमका सहित लगभग 18–20 स्थानों पर छापे मारे। तलाशी टीम ने रिहायशी मकान, दफ्तर, कोक प्लांट और कथित अवैध टोल-बूथ/चेकपोस्ट भी कवर किए। जिन व्यक्तियों और कारोबारों के ठिकानों पर कार्रवाई हुई उनमें नरेंद्र खारका, कृष्ण मुरारी कायल, युधिष्ठिर घोष, राजकिशोर यादव, लोकेश सिंह, चिन्मय मंडल, निराद बरन मंडल, लाल बहादुर सिंह, अनिल गोयल, संजय खेमका, अमर मंडल और उनसे जुड़े अन्य नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

जाँच का आधार और ED की कार्रवाई की दिशा
ED ने कहा है कि यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल और झारखंड पुलिस द्वारा दर्ज कई FIRs पर आधारित है — आरोप हैं कि सीमा पार अवैध कोयला सप्लाई, खनन, चोरी, परिवहन, भंडारण और बिक्री का एक व्यवस्थित नेटवर्क चल रहा था और इससे हुई कमाई को प्रॉपर्टी, कंपनियों तथा नकद में बदलकर वैध आहरण (money-laundering) का रूप दिया जा रहा था। PMLA (Prevention of Money Laundering Act) की धाराओं के तहत जांच जारी है और ED टीमों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CRPF) के जवान भी ऑपरेशन में तैनात रहे। तलाशी ऑपरेशन सुबह जल्दी शुरू हुआ और इसमें सौ से अधिक ED अधिकारी शामिल हुए।

क्या-क्या मिला — सबूतों का सामग्रीगत ब्यौरा
छापों के दौरान प्रॉपर्टी डीड्स, जमीन खरीद-बिक्री के एग्रीमेंट, कंपनियों के बही-खाते, वित्तीय रसीदें, डिजिटल डिवाइस (मोबाइल/लैपटॉप), और आधारभूत लेखा-पर्चे बरामद किए गए। टीमों ने ऐसे डायरी व रजिस्टर भी जब्त किए जिनमें कथित अवैध नकद वसूली, टोल/चेकपोस्ट से होने वाली आमद और लाभार्थियों के नाम दर्ज बताए जा रहे हैं। ED अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेज FIR में दर्ज आरोपों को पुष्ट करते हैं और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलीभगत के संकेत भी मिल रहे हैं — जिनसे यह रैकेट लंबे समय से सक्रिय रहा।

किस प्रकार काम करता था कथित सिंडिकेट (जांच की शुरुआती परत)
प्रारंभिक जांच से संकेत मिलते हैं कि नेटवर्क का संचालन कई स्तरों पर होता था — खनन/चोरी से कोयला निकाला जाता, ट्रकों के माध्यम से राज्य-सीमा पार ले जाया जाता, अवैध चेकपोस्ट/टोल बूथ पर रखकर हिस्सा काटा जाता और फिर स्थानीय कोयला व्यापारियों/कोक प्लांटों तक पहुंचाया जाता। नकदी की बड़ी मात्रा को ज़मीन, फर्जी कंपनियों और ठेकेदारी/आउटसोर्सिंग के जरिए “धुलाई” कर बैंक ट्रांजैक्शन्स और प्रॉपर्टी लेन-देन के माध्यम से वैध दिखाया जाता था — ED इस तरह की धनराशि के स्रोत और धारकों का पता लगाने में लगा है। (पृष्ठभूमि और क्षेत्र में पहले से मौजूद कोयला-माफिया से जुड़ी रिपोर्टें यह तस्वीर और बढ़ाती हैं)।

आगे की प्रक्रिया — क्या हो सकता है आगे?
ED अब बरामद दस्तावेजों और डिजिटल डिवाइस के रिकॉर्ड की forensic जांच कर वित्तीय प्रवाह का नक्शा (money-trail) तैयार करेगी — जहाँ से पैसा आया, किसके खातों में गया और किस तरह संपत्ति में बदला गया। इसके आधार पर आगे PMLA के तहत समन जारी, बैंक खातों की फ्रीजिंग, अचल संपत्तियों पर रोक और आवश्यकतानुसार जिन व्यक्तियों/कंपनियों के खिलाफ स्पष्ट अपराधी साक्ष्य मिलते हैं, उनके खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई और 法ी मामले शुरू किए जा सकते हैं। साथ ही राज्य पुलिस के उन FIRs में भी ED की फोरेंसिक जानकारी जोड़ी जाएगी।

प्रभाव और स्थानीय परिदृश्य
यदि आरोप सिद्ध हुए तो इससे न केवल संबंधित व्यापारियों व अधिकारियों के खिलाफ संगीन कानूनी कार्रवाई होगी, बल्कि कोयला की आपूर्ति-श्रंखला, स्थानीय रोजगार और राजस्व संग्रह पर भी असर पड़ सकता है। लंबे समय से कोयला-माफिया को लेकर इन क्षेत्रों में शिकायतें और पर्यावरण/सामाजिक प्रभाव भी रिपोर्ट होते रहे हैं — इसी पृष्ठभूमि में केंद्र-एजेंसियों द्वारा बड़े पैमाने पर कार्रवाई का संकेत मिलना मायने रखता है।

ED या किसी आरोपी की ओर से आधिकारिक बयान अभी व्यापक रूप से सामने आना बाकी है; मामले की संवेदनशीलता और जाँच जारी होने के कारण जांच एजेंसी मीडिया को सीमित जानकारी दे रही है। जिन व्यक्तियों के ठिकानों पर छापे मारे गए हैं, उनसे भी पूछताछ और रिकॉर्ड-सत्यापन आगे जारी रहेगा।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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