भोपाल, 30 जनवरी 2026 — प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भोपाल जोनल यूनिट ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत स्वर्गीय अरविंद जोशी (पूर्व मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश) और उनके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए लगभग 5 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियाँ जब्त कर ली हैं। यह कार्रवाई लोकायुक्त (विशेष पुलिस स्थापना), भोपाल द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की जा रही ED जांच के भाग के रूप में की गई है।
ED की जांच में आरोप है कि जोशी और अन्य ने जुलाई 1979 से 10 दिसंबर 2010 के बीच अपनी ज्ञात आय से कहीं अधिक — लगभग 41.87 करोड़ रुपये — की संपत्ति जमा की। यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराएँ 13(1)(ई) तथा 13(2) के तहत भी दर्ज है। ED का कहना है कि जिन संपत्तियों को जब्त किया गया है, वे अपराध से अर्जित धन के जरिए खरीदी गई थीं।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि अवैध कमाई को छिपाने के लिए कई संपत्तियाँ परिवार के सदस्यों के नाम और कुछ मामलों में सहयोगियों व परिचितों के नाम पर दर्ज करवाई गईं। एजेंसी के अनुसार एक शेल कंपनी का गठन किया गया था, जिसमें एसपी कोहली को प्रबंधक दिखाया गया और उन्हें पावर ऑफ अटॉर्नी देकर वास्तविक मालिकाना हक छिपाने का प्रयास किया गया।
इन हाल की अटैचमेंट में भोपाल जिले स्थित आवासीय प्लॉट, कृषि भूमि और एक चालू रिसॉर्ट जैसी अचल संपत्तियाँ शामिल हैं। ED ने बताया है कि यह कार्रवाई विस्तृत जांच के बाद की गई है और सबूतों के मद्देनजर संपत्तियों को अटैच किया गया है ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।
इससे पहले ED ने इस मामले में तीन प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी कर चुके हैं और अब तक कुल मिलाकर लगभग 8.5 करोड़ रुपये की संपत्तियाँ पहले से अटैच की जा चुकी थीं। नई जब्ती के बाद जांच और वसूली की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
अधिकारिक तौर पर ED ने बताया है कि जांच जारी है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई तथा जांच-पड़ताल पूरी होने पर अगला कदम उठाया जाएगा। लोकायुक्त द्वारा दर्ज एफआईआर और सुपुर्द सबूतों के आलोक में एजेंसी आगे आरोपी संपत्तियों के स्रोत और लेनदेन का और भी गहरा परीक्षण कर रही है।
विश्लेषक इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति के खिलाफ ED की असरदार कार्रवाइयों में से एक मान रहे हैं। मामले से जुड़े अन्य कार्यक्रम, बैंकिंग लेनदेन और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आगे कितने और प्रावधान लागू होंगे तथा क्या अतिरिक्त आरोप जोड़े जाएंगे।














