गाजीपुर। गाजीपुर में आयोजित एक बैठक के दौरान सांसद अफजाल अंसारी ने माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई कथित बदसलूकी को लेकर प्रदेश सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की सरकार में भी एक बार शंकराचार्य के साथ अधिकारियों ने दुर्व्यवहार किया था, लेकिन उस समय अखिलेश यादव स्वयं हरिद्वार जाकर उनसे माफी मांगने पहुंचे थे। वहीं मौजूदा सरकार के अधिकारी अब तक माफी मांगने नहीं गए हैं।
गाय को राष्ट्र माता बनाने के समर्थन का किया जिक्र
अफजाल अंसारी ने कहा कि उन्होंने गाय को “राष्ट्र माता” घोषित करने की मांग का समर्थन किया था। इस समर्थन के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से उन्हें सम्मान पत्र भी भेजा गया था। उन्होंने कहा कि इतने ऊंचे विचार रखने वाले संत का अपमान किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
चारों शंकराचार्यों ने की कार्रवाई की निंदा
अफजाल अंसारी ने बताया कि माघ मेले में हुई कार्रवाई की देश के चारों शंकराचार्यों ने निंदा की है। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों को खुद जाकर शंकराचार्य से माफी मांगनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि वह पहले भी कई बार अविमुक्तेश्वरानंद से मिल चुके हैं।
मुजफ्फरनगर दंगे का उदाहरण देते हुए कही बड़ी बात
उन्होंने मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय वह शंकराचार्य के पास गए थे और उनसे कहा था कि हज के दौरान लोग आबे-जमजम का पानी लाते हैं, उसमें गंगा जल मिलाकर नफरत की आग पर डाल दिया जाए तो वह बुझ सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे ऊंचे विचार रखने वाले संत से यह प्रमाण मांगना कि वे संत हैं या नहीं, अपमानजनक है।
नेपाल के संत के साथ बदसलूकी का आरोप
अफजाल अंसारी ने कहा कि नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर से आए एक बड़े तांत्रिक संत, जो केवल फल और दूध पर जीवन यापन करते हैं, उनके साथ भी बदसलूकी की गई। कथित तौर पर उनकी शिखा पकड़कर घसीटा गया, जिससे वे पूरी तरह अपमानित हो गए। अंसारी ने कहा कि यह दृश्य देखकर उनकी आंखों से आंसू निकल आए।
अहिल्याबाई घाट मंदिर तोड़फोड़ का मुद्दा उठाया
इस दौरान उन्होंने वाराणसी के अहिल्याबाई घाट पर कथित मंदिर तोड़फोड़ का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि उस समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी में ही मौजूद थे और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस चंदौली में एक उद्घाटन कार्यक्रम में थे। इसके बावजूद प्रशासन ने मुख्यमंत्री को यह कहकर गुमराह किया कि वायरल वीडियो एआई से जनरेटेड है।
AI वीडियो बताए जाने पर प्रशासन पर सवाल
अफजाल अंसारी ने कहा कि जिस व्यक्ति ने वीडियो वायरल किया था, उसने कैमरे पर आकर कहा कि अगर कोई यह सिद्ध कर दे कि वीडियो एआई से बना है, तो वह सजा-ए-मौत तक भोगने को तैयार है। ऐसे में सरकार को यह साबित करना चाहिए कि वीडियो एआई जनरेटेड था।
24 घंटे में सर्टिफिकेट मांगने पर आपत्ति
उन्होंने कहा कि शंकराचार्य से 24 घंटे के भीतर प्रमाण मांगा गया, जबकि सुप्रीम कोर्ट भी किसी को इतना कम समय नहीं देता। उन्होंने सवाल किया कि अगर किसी अधिकारी ने उनसे कह दिया होता कि पहले यह सिद्ध कीजिए कि आप सांसद हैं, तो क्या यह उचित होता?
हलाल और बीफ एक्सपोर्ट पर भी साधा निशाना
अफजाल अंसारी ने योगी सरकार के ‘हलाल’ बयान का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरफ प्रदेश में हलाल लिखने पर कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी तरफ भारत बीफ एक्सपोर्ट में दुनिया में पहले नंबर पर पहुंच गया है। उन्होंने इसे विरोधाभास बताया।
संविधान और संतों के सम्मान की बात
अंत में अफजाल अंसारी ने कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद शांत स्वभाव के संत हैं और किसी को श्राप नहीं देते, लेकिन प्रशासन द्वारा किया गया व्यवहार पाप की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि संतों का सम्मान और संविधान की मर्यादा बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।














